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जैन संस्कार विधि से दीपावली पूजन

जैन संस्कार विधि से दीपावली पूजन विधि प्राप्त करने के लिए उपर वाले पोस्टर पर क्लिक करें

जलगांव में जैन संस्कार विधि से जन्मदिन मनाया गया

तेरापंथ युवक परिषद् जलगांव के निवर्तमान अध्यक्ष पवन जी सामसुखा  का जन्मदिन जैन संस्कार विधी से उनके निजी निवास पर मनाया गया। युवक प...

जैन संस्कार विधि दीपावली पूजन कार्यशाला: ग्रीन पार्क , दिल्ली

अभातेयुप द्वारा निर्देशित तेयुप दिल्ली द्वारा आयोजित जैन संस्कार विधि द्वारा दीवाली पूजन कार्यशाला का शुभांरभ C-15 ग्रीन पार्क में म...

जैन संस्कार विधि द्वारा दीवाली पूजन कार्यशाला: मॉडल टाउन, दिल्ली

अभातेयुप द्वारा निर्देशित तेयुप दिल्ली द्वारा आयोजित जैन संस्कार विधि द्वारा दीवाली पूजन कार्यशाला का शुभांरभ तेरापंथ भवन,...

जैन संस्कार विधि से दीपावली-पूजन कार्यशाला: ओसवाल भवन, दिल्ली

15 अक्टूबर 2017-दिल्ली(शाहदरा सभा) 'शासन श्री' साध्वी श्री रविप्रभा जी के सानिध्य में अभातेयुप के निर्देशन में तेयुप द्वारा ...

शुद्ध प्रत्याख्यान का आध्यात्म साधना में विशेष महत्त्व : आचार्यश्री महाश्रमण

-आचार्यश्री ने प्रत्याख्यान को निर्मल और शुद्ध बनाए रखने के पांच आयामों को किया व्याख्यायित  -आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में टीपीएफ द्वा...

आश्रवों को रोकने प्रयास है अध्यात्म की साधना: आचार्यश्री महाश्रमण

-आश्रवों को रोक आत्मा को निर्मल बना कर आत्मा का कल्याण करने का आचार्यश्री ने बताया मार्ग -तृतीय न्यायाधीश व अधिवक्ता अधिवेशन आचार्यश्री की...

आदमी को विशिष्ट ज्ञान प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए - आचार्यश्री महाश्रमण

- महातपस्वी की मंगल सन्निधि में भव्य दीक्षांत समारोह का समायोजन - जैन विश्व भारती मान्य विश्वविद्यालय के 4427 विद्यार्थियों को प्रदान की ग...

पांच अविग्रह के द्वारा संघ हो सकता है स्वस्थ और दीर्घजीवी : आचार्यश्री महाश्रमण

- आचार्यश्री के श्रीमुख से निरंतर बह रही आगमवाणी लोगों को प्रदान कर रही विशेष ज्ञान  - आचार्यश्री ने विधेयात्मक और निषेधात्मक आज्ञा सहित प...

अहो भाव से सेवा कर आदमी महानिर्जरा को प्राप्त कर सकता है : आचार्यश्री महाश्रमण

- परकल्याण को समर्पित महातपस्वी आचार्यश्री ने सेवा का बताया महत्त्व - आगम में वर्णित सेवा के महत्त्व को आचार्यश्री ने बताया विशेष महत्त्व ...

औदारिक शरीर से परकल्याण का हो प्रयास: आचार्यश्री महाश्रमण

- ‘ठाणं’ आगम में वर्णित शरीर के पांच भेदों को आचार्यश्री ने किया सरस विवेचन  - मानव को प्राप्त होने वाले अवदारिक शरीर को बताया सबसे महत्त्...

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