एकादशम अधिशास्ता का 5 वा पट्टोत्सव दिवस ! आराध्य की अभिवन्दना का महापर्व !






एकादशम अधिशास्ता का 5 वा पट्टोत्सव दिवस ! चारो और आमाप्य उत्साह ! आराध्य की अभिवन्दना का महापर्व !
मंडी आदमपुर 08 मई 2014 जैन तेरापंथ न्यूज  
आचार्य श्री महाश्रमणजी अपनी धवलवहिनी के साथ गुरुवार सुबह सात बजे आदमपुर में मंगल प्रवेश किया इससे पहले गांव सदलपुर के राजकीय विद्यालय में सुबह चार बजे श्रद्धालुओं ने थाली बजाकर आचार्य श्रीं को उनके 53वें जन्मदिन की बधाई दी। आदमपुर की धरती पर करीब ढाई सौ साल में पहली बार पहुंचे आचार्य श्रीं महाश्रमण ज़ी के जन्मोत्सव पर सुबह सवा आठ बजे किसान रेस्ट हाउस से धर्म ध्वजा के साथ भव्य कलश यात्रा निकाली गई। यात्रा का शुभारंभ राष्ट्रगान के बाद शांति निकेतन स्कूल की छात्राओं ने किया। इसके बाद कन्या व राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के स्काउट्स ने राष्ट्र ध्वज व जैन धर्म के ध्वज को सलामी दी और आचार्य श्री महाश्रमण का अभिनंदन किया।

आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) अपनी 25 हजार स्कूलों में अणुव्रत पाठ्यक्रम को शामिल किया
मंडी आदमपुर आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) ने जैन समाज के 9वें आचार्य श्री तुलसी की ओर से चलाए गए अणुव्रत अभियान को पाठ्यक्रम में लागू कर बच्चों में अणुव्रत के नियमों पर चलने की पहल की है। गुरुवार को आचार्य महाश्रमण के राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में मनाए गए जन्मोत्सव के दौरान मुनि अक्षय प्रकाश ने उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं को यह जानकारी दी। जैन मुनि ने बताया कि उन्होंने 9वें आचार्य तुलसी की अणुव्रत शिक्षा के कई अध्याय बनाकर आरएसएस को भेजा था। इसके बाद संघ ने इस अध्याय पर सहमति जताते हुए इसे अपने देशभर मे चल रहे करीब 25 हजार शिक्षण संस्थानों में लागू कर दिया है। मुनि अक्षय प्रकाश ने बताया कि आचार्य तुलसी नौवें आचार्य थे, इसलिए कक्षा चौथी से लेकर बारहवीं तक के सिलेबस में यह नौवे अध्याय के रुप में शामिल किया गया है।

नमस्कार महामंत्र से हुआ आगाज
आचार्य श्री महाश्रमण जन्मोत्सव व पाटोत्सव व्यवस्था समिति की ओर से आचार्य श्री महाश्रमण का कल जन्मोत्सव समारोह मनाया गया। तेरापंथ के सरताज एवं 11वें आचार्य श्री महाश्रमण का 53वां जन्मोत्सव समारोह का आगाज नमस्कार महामंत्र से हुआ। इसके बाद साध्वी सुमति प्रभा ने 'हमारे अंतर के अरमान' गीत सुनाया वहीं मुनि गौरव कुमार ने समय प्रबंधन का महत्व बताया। मुनि वर्धमान ने 'गुरुवरम जय गुरुवरम' मुनि विनम्र कुमार ' श्रद्धावत हूं मैं भगवन' कविता पेश की। मुनि महावीर कुमार ने 'मुक्ति का यह पंथ सुनहरा' मुनि विवेक कुमार ने 'तू ही है भगवान मेरा' गीत सुनाकर अपनी भावना प्रकट की। वहीं बाल मुनि प्रेश कुमार ने 'लला लला लोरी दूध की कटोरी, भक्त तेरा सच्चा' कविता सुनाकर उपस्थितजनों का मन मोह लिया। कार्यक्रम में आदमपुर की विधायक रेणुका बिश्नोई ने आचार्य को उनके जन्मदिन की बधाई देते हुए दीर्घायु होने की कामना की।

मनुष्य अपने जीवन में आदर्श ग्रहण करे: आचार्य महाश्रमण
आचार्य श्री महाश्रमणजी ने कहा कि मनुष्य जन्म से कुछ साथ लेकर नहीं आता है। वह धरती पर आने के बाद ही कुछ अर्जित करता है। बहुत कुछ पिछले जन्मों के कर्मों के आधार पर होता है। जन्म लेना महात्मय नहीं है यह एक सामान्य घटना है, मगर सांसारिक मोह-माया का त्याग करके दीक्षा लेकर अहिंसा, सत्य, धर्म व ईमानदारी के मार्ग पर चलने का विशेष महत्व है। पुरुषार्थ का महत्व बताते हुए उन्होंने कहा कि मनुष्य को विवेकपूर्ण और संयमित जीवन जीना चाहिए। आदमी को तप और संयम में पराक्रम करना चाहिए। हमें दूसरों की भलाई, संयम की साधना व तपस्या करनी चाहिए। जिस तरह अमावस्या के दिन कोई शुभ कार्य नहीं होता उसी तरह अगर दीवाली के दिन अमावस्या हो तो दीपमालाओं की जगमगाहट में उसकी कीमत बढ़ जाती है।

जन्म के बिना उपलब्धि संभव नहीं : साध्वी प्रमुखा श्री कनकप्रभाजी
साध्वी प्रमुखा श्री कनकप्रभाजी ने कहा कि जन्म के बिना उपलब्धि संभव नहीं। क्योंकि दीक्षा व निर्वाण सभी जन्म के बाद ही संभव है। उन्होंने कहा कि मनुष्य जन्म के साथ पचास फीसदी गुणों को लेकर पैदा होते हैं तथा बाकी 40 प्रतिशत उसे अपनी मेहनत, लगन व गुरुओं के प्रोत्साहन से मिलते हैं और बाकी बची दस प्रतिशत विशेषताएं उसमें घर-परवार के संस्कारों से पनपती है।

कार्यक्रम में मंच संचालन मुनि श्री दिनेश कुमारजी ने किया। इस मौके पर हरियाणा जैन तेरापंथी सभा के प्रांतीय अध्यक्ष घीसाराम जैन, पदम जैन, लक्ष्मी सागर, सुरेश कुमार, संजय जैन, श्यामलाल जैन, सुभाषचंद्र ऐलनावाद, प्रमोद जैन, तरसेम गोयल, व्यापार मंडल प्रधान प्रहलाद गोयल, सरपंच सुभाषचंद्र अग्रवाल, रामनिवास गर्ग, हनुमान प्रसाद, कृष्णा भाटी, रणधीर पनिहार आदि मौजूद थे।

पूज्य प्रवर आचार्य श्री महाश्रमणजी का आदमपुर में मंगल प्रवेश, महिलाओं ने थाली बजाकर दी जन्मदिन की बधाई
हिसार सामाजिक संस्था अणुव्रत ज्योति ने मुफ्त साक्षरता एवं शिक्षा केंद्र में आचार्य श्री महाश्रमणजी का 53वां जन्मदिवस मनाया। इस अवसर पर साध्वी श्री धर्मप्रभाजी , साध्वी श्री शुभप्रभाजी एवम साध्वियो ने मंगल-भावना गीत से कार्यक्रम का शुभारंभ किया। संस्था अध्यक्ष विद्यासागर जैन ने कहा कि जब विश्व हिंसा के चक्रवात में फंसा है, व्यक्ति निराश है। मानव में जीवन के सारे गुणों - नैतिकता, प्रामाणिकता, ईमानदारी, सद्व्यवहार, भाईचारा, पारस्परिक सामंजस्य, सहिष्णुता व सहजता को भौतिकता की चमक में भुला दिया है। इस अवसर पर संस्था की शिक्षा प्रभारी संगीता जैन ने कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए संगीता जैन ने गुरु आराधना की। साक्षरता केंद्र में शिक्षा ग्रहण करते हुए बच्चों ने भी गीत संगीत के माध्यम से आचार्य महाश्रमण की दीर्घायु होने की कामना की।

अणुव्रत ज्योति संस्था ने आचार्य श्री महाश्रमण का जन्मदिन मनाया 








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