संयम से व्यक्तित्व विकास : आचार्य महाश्रमणजी ने पत्रकार वार्ता में कहा



महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमणजी के दिल्ली आगमन पर आयोजित नागरिक अभिनंदन के पूर्व दिवस पर एक प्रेस वार्ता का आयोजन रखा गया. करीब 50 पत्र-पत्रिकाओं के संपादकों / प्रतिनिधियों ने आचार्य प्रवर की सन्निधि में आयोजित इस प्रेस वार्ता में सहभागिता दर्ज की.
पूज्यप्रवर ने प्रेस वार्ता के शुरुआत में कहा कि – जैन तेरापंथ धर्मसंघ के नवम आचार्य श्री तुलसी ने अणुव्रत के माध्यम से मानवता की सेवा की थी. हमारा दिल्ली आगमन का मुख्य कारण आचार्य तुलसी जन्म शताब्दी समारोह मनाने के लिए आना है. यह पूरा वर्ष आचार्य तुलसी जन्म शताब्दी वर्ष के रूप में मनाना निर्णित किया गया है. जिसके दो चरणों की समायोजना हो चुकी है एवं दो चरण दिल्ली में समायोजित होंगे.  आचार्य श्री तुलसी ने संयम की प्रेरणा दी.  हमने भी आचार्य तुलसी जन्म शताब्दी वर्ष पर “जन-जन में जागे विश्वास, संयम से व्यक्तित्व विकास” का उद् घोष दिया है.’
 पूज्यप्रवर ने पत्रकार बंधुओं को आगामी चातुर्मासों, मर्यादा महोत्सवों एवं यात्रा की जानकारी भी प्रदान की. संभागी पत्रकारों द्वारा पूज्यप्रवर के समक्ष कुछ जिज्ञासाएं रखी गयी जिसका पूज्यप्रवर द्वारा समाधान दिया गया जिसके मुख्य अंश यहाँ प्रस्तुत है.

पत्रकार- आप अपनी साधना के साथ अन्य क्या गतिवधियां करते है?
पूज्यप्रवर- हमारा पहला और मुख्य काम साधना करना है. दुसरा मार्ग जनता को सन्मार्ग दिखाने का, संयम-अहिंसा-सत्य की प्रेरणा देने का है. अणुव्रत की प्रेरणा भी देते है.
पत्रकार- साधना में क्या करते है ?
पूज्यप्रवर- साधना में हम ५ महाव्रतों का पालन करते है एवं उसके अनुरूप जीवन रखते है.
पत्रकार- आधुनिक संस्कृति में साधन ज्यादा है, ऐसे में साधना करना कठिन नहीं है क्या ?
पूज्यप्रवर- मन को साधने के लिए प्रेक्षाध्यान का उपयोग किया जाता है. आधुनिक जीवन शैली में जीवन विज्ञान के सूत्र भी साधना में उपयोगी है.
पत्रकार- प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने दुसरे राष्ट्राध्यक्षों को शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित किया. यह शांति की पहल है ? आपका क्या विचार है ?
पूज्यप्रवर- हमें अच्छा लगता है जब आस-पास शांति का वातावरण हो. परस्पर शांति से रहेंगे तो सब कुछ ठीक रहेगा. मैत्री भावना का प्रयोग अच्छी बात है.
पत्रकार- महिलाओं के प्रति जो अपराध एवं असुरक्षा की घटनाएं बढ़ी है, उसके क्या कारण है ?
पूज्यप्रवर- मुख्य कारण पुरुषों में बढ़ रहा असंयम है. पुरुष संयम में रहे यह जरुरी है. महिलाएं भी संयम रखें.
पत्रकार- आज के युग में नशा ज्यादा बढ़ रहा है, इसके लिए क्या उपाय है ?
पूज्यप्रवर- हम भी नशामुक्ति का कार्य कर रहे हैं. हमारी पदयात्रा के दौरान हम यह सन्देश देते है एवं कई व्यक्ति इससे लाभान्वित होकर नशा छोड़ रहे है.
पत्रकार- संत ध्यान एवं तपस्या करते है. कुछ लोग चमत्कार की बात भी करते है. आप चमत्कार में विश्वास करते है ?
पूज्यप्रवर- चमत्कार में हमारा विशवास नहीं है. साधना में चमत्कार या miracle  कोई महत्त्व नहीं है.
पत्रकार- क्या फिर महर्षि  पतंजलि ने जो एक रचना की है, आप उस पर विश्वास नहीं करते ?
पूज्यप्रवर- पातंजल योग दर्शन है. इससे कई सिद्धियाँ एवं लाब्धियाँ प्राप्त होती है. परन्तु साधू  इन भौतिक सिद्धियों में ना पड़े.
पत्रकार- भगवद् गीता के बारे में आपके विचार बताएं.
पूज्यप्रवर- भगवद् गीता एक धर्म ग्रन्थ है. स्थितप्रज्ञता का उसमे बड़ा सुन्दर वर्णन है. अनासक्ति की बात भगवद् गीता की बड़ी बात है. इसमें अनेक अच्छी बाते है. युद्ध से शुरू गीता व्यक्ति को आत्मोद्धार तक ले जाती है. भारतीय साहित्य का यह बड़ा सुन्दर रत्न है.
पत्रकार- महिलाओं एवं बाल-विकास के लिए क्या-क्या किया जा रहा है?
पूज्यप्रवर- हमारे यहाँ महिलाओं का एक राष्ट्रीय स्तर का संगठन है- अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल. बाल विकास के लिए ज्ञानशाला का उपक्रम चलता है.
पत्रकार- भारत में अनेक धर्म है. अध्यात्म एवं प्रेम से कई मसलों का रास्ता निकल सकता है. आपको नहीं लगता कि इसके लिए सभी धर्मगुरु एक मंच पर आएं ?
पूज्यप्रवर- सभी धर्मगुरु एक मंच पर आएं यह ठीक है, किन्तु एक मंच पर आकर तटस्थ भाव रखें यह जरुरी है. सभी का मिलना और आम सहमति से रास्ते निकाले जाएं तो अच्छी बात है.  अणुव्रत किसी सम्प्रदाय विशेष की बात नहीं करता. वह सभी धर्मों का समन्वय करने वाला है.
पत्रकार- युवा शक्ति को आप क्या सन्देश देंगे ?
पूज्यप्रवर- युवा अपनी शक्ति को पहचाने, उसका विकास करें एवं उसका सदुपयोग करें. नशामुक्त जीवन जीयें. संयम एवं नैतिक मूल्यों को आत्मसात करें. इस तरह वह स्वयं, परिवार, समाज एवं राष्ट्र के लिए उपयोगी बन सकता है.

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