चातुर्मास में आत्म कल्याण हो लक्ष्य : मुनि श्री संजयकुमार

मुंबई। 09जुलाई। आज मुनिश्री संजयकुमारजी, मुनि प्रसन्नकुमारजी, मुनिश्री प्रकाश कुमारजी एवं समण सिद्धप्रज्ञजी का चातुर्मासिक प्रवेश तेरापंथ भवन भाईन्दर में हुआ।

मुनि श्री संजय कुमारजी ने फ़रमाया कि-  साधू साध्वी जहा जाते है वहा अध्यात्म की धारा बहती है. ये गुरुदेव का आशीर्वाद है कि आज यहाँ 2 सिंघाड़े विराज रहे है। गुरु निर्देशानुसार आज हम अपने गंतव्य पर पहुच गए है। मुनि श्री प्रसन्नकुमारजी ने आ. तुलसी जन्म शताब्दी पर ज्यादा से ज्यादा लोगो को अणुव्रती बनने हेतु प्रेरित किया। मुनिश्री प्रकाशकुमारजी ने चतुर्मसिक प्रवास में लोगो को धर्म आराधना एवं तपस्या की गंगा बहाने को कहा। समण सिद्धप्रज्ञजी ने चातुर्मास में आत्म-कल्याण कैसे करे ? उस पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि मीरा-भाईन्दर महापौर केटलिन परेरा एवं पूर्व महापौर नरेन्द्र मेहता थे। कार्यक्रम में तेरापंथी महासभा के उपाध्यक्ष किशनजी डागलिया,अणुव्रत महासमिति के अध्यक्ष डालचंदजी कोठारी, अभातेमम की उपाध्यक्षा कुमुद कच्छारा, अणुव्रत समिति मुंबई के अध्यक्ष गनपतजी डागलिया, तेरापंथ सभा मुंबई के वरिष्ठ उपाध्यक्ष दिनेश जी सुतारिया, अहिंसा आर्ट गेलेरी के अध्यक्ष खेमराजजी हिरन, तेरापंथ सभा मुंबई के पूर्व अध्यक्ष भंवरजी कर्णावत, तेरापंथ महिल मंडल मुंबई की अध्यक्ष कांताजी तातेड, मंत्री रचना हिरन, नगरसेविका गीता जैन, अणुव्रत उपसमिति उत्तर मुंबई 2 की संयोजिका करुणा कोठारी के साथ सभी सभा संस्थाओ के विभिन्न पदाधिकारी पधारे थे। तप और त्याग के संकल्पों से श्रावक समाज ने मुनिश्री का स्वागत किया। तेरापंथ सभा, महिला मंडल, तेरापंथ युवक परिषद् ,कन्यामंडल, ज्ञानशाला प्रशिक्षिका भाईन्दर ने गीतिका के माध्यम से भावो की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का सञ्चालन भगवती लाल जी वागरेचा एवं छत्तर जी खटेड ने किया।
रिपोर्ट: करुणा कोठारी, महावीर कोठारी।

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