"ताला मुक्त हो भारत- आचार्य महाश्रमण"



 नई दिल्ली , 9 सितम्बर 2014
अध्यात्म साधना केंद्र, महरौली

आज तुलसी जन्म शताब्दी के तृतीय चरण के अंतिम दिन वर्धमान समवसरण में उपस्थित धार्मिक जनों को संबोधित करते हुए पूज्यप्रवर ने कहा हमारे यहाँ सुनने की विद्या चल रही है। महाविद्यालय, विद्यालय, धर्म स्थानों में धर्म गुरुओं से सुनते हैं और संस्कार ज्ञान प्राप्त करते हैं। सुनकर कल्याण और पाप दोनों को जाना जा सकता है। श्रेय क्या है ? कल्याणकारी क्या है ? यह सुनकर जाना जा सकता है तथा जीवन में उतारा जा सकता है।
आचार्य तुलसी एक संप्रदाय के आचार्य थे । वे अपने संप्रदाय का नेतृत्व करते थे। उन्होने अपने धर्म संघ की समस्या पर ही ध्यान नहीं दिया बल्कि राष्ट्रीय समस्याओं पर भी बहुत ध्यान दिया। जातिवाद, आतंकवाद, अनैतिकता, सांप्रदायिक उन्माद आदि पर काफी काम किया। पंजाब समस्या पर उन्होंने संत लोंगोवाल से बातचीत की थी। और अणुव्रत आंदोलन अनेक समस्याओं  का समाधान दिया। समस्या के मूल तक जो जाता है वह समस्या को समूल नष्ट कर देता है।

आचार्य तुलसी राजनैतिक नेताओं से भी काफी मिले राजेंद्र बाबू , पंडित नेहरु नगर से मिलना हुआ। उन्होने राष्ट्रीय समस्याओं के समाधान में अपना योगदान दिया। गुरुदेव ने कहा साधु को भौतिक लालसा में नहीँ जाना चाहिए। नैतिकता के संदर्भ में गुरुदेव ने फरमाया कि मैं भारत को ताला मुक्त भारत देखना चाहता हूँ। इतनी नैतिकता हो की कहीं चोरी न हो। राष्ट्र के लिए भौतिक विकास, आर्थिक विकास, शैक्षिक विकास, नैतिक विकास, आध्यात्मिक विकास जरुरी है। और ऐसा भारत बन जाए यही कामना करता हूँ।

रिपोर्ट :  डॉ कुसुम लुनिया
प्रस्तुति : जैन तेरापंथ न्यूज़ ब्यूरो से विनीत मालू दिव्या जैन

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