सम्यक्त्व के 5 दूषण होते हैं- मंत्री मुनि श्री सुमेरमल जी

नई दिल्ली, 15 अक्टूबर 2014 आज वर्धमान समवसरण में उपस्थित धार्मिक जनों को संबोधित करते हुए मंत्री मुनि प्रवर ने फ़रमाया- हमारे जीवन में सम्यक्त्व का बड़ा महत्त्व है। सम्यक्त्वी बनने का मतलब बहुत बड़ी सम्पदा प्राप्त करना। हमें सम्यक्त्व की बड़ी हिफाजत के साथ निगरानी रखनी चाहिए। एक बार सम्यक्त्व हाथ से गया तो अनेक भव बढ़ाने वाला हो जाता है। दृढ आस्था व् जागरूकता के साथ आगे बढ़ना, कि कोई गलत कार्य न हो जाये।

सम्यक्त्व के 5 दूषण होते हैं-
1) शंका
2) कांक्षा
3) निर्विचिकित्सा
4) पर पाषंड प्रशंसा
5) पर पाषंड परिचय



संसार में अनेक मत हैं प्रलोभन हैं, जब सीमित बुद्धि होती है तो वहां कुतर्क होता है। यदि हमारे भीतर पूर्ण आस्था है तो बाहर का प्रलोभन हमारा कुछ नहीं बिगड़ पायेगा।
धर्म के मामले में ले दे के काम चलने वाली बात नहीं होती है। तत्व समझ कर धर्म धारण किया जाता है।



अगर कोई मुझे भटकाना चाहता है तो मैं अपने आप क्यों भटकू? गलत का अनुसरण क्यों करू? हमें सम्यक्त्व के खातिर प्रतिकूलता का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए। धार्मिक बनें, दृढ़ता रखें। थोड़ी बहुत प्रतिकूलता में न डगमगाएं। अपने आप को मजबूत बनायें। सम्यक्त्व को पुष्ट करने का प्रयास करें।


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