‘‘नशामुक्त रहे दिल्ली समाज और अच्छा कार्य करे’’ - आचार्य महाश्रमण

मंगलाचरण समारोह का प्रथम चरण

नई दिल्ली, 4 नवम्बर, 2014 आचार्य श्री महाश्रमण प्रवास व्यवस्था समिति की ओर से आयोजित मंगल भावना समारोह में दिल्ली समाज को प्रेरणा देते हुए आचार्य श्री महाश्रमण ने कहा कि प्रेय और श्रेय दो प्रकार की स्थितियां होती है कुछ प्रिय होती है लेकिन हितकारी नहीं। कुछ श्रेष्ठ होती है किन्तु प्रिय नहीं। श्रेयस का पथ कल्याणकारी होता है। व्यवहार कुषलता और क्रोध नियंत्रण सफलता के लिए आवश्यक तत्व है। चातुर्मास  आज समापन की ओर से श्रावक समाज नशामुक्त रहे। अच्छा काम करता रहे, सबका विकास हो, सबका मंगल हो।

प्रवास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष कन्हैयालाल जैन, महामंत्री शांति कुमार जैन, भानुप्रकाष बरडि़या, नथुराम जैन, प्रकाश छल्लाणी, संजय जैन, डालमचन्द बैद, श्रीमती सुमन नाहटा, कुसुम लूणिया, अभय चिण्डालिया, श्रीमती तारा बैंगानी एवं अशोक संचेती ने मंगल भावना के क्रम में अपनी प्रस्तुति दी। तेरापंथ महिला मण्डल व युवक परिषद की सुमधुर गीतिकाएं बेहद प्रभावशाली थी। कार्यक्रम का कुशल संचालन मुनि दिनेश कुमार ने किया। अमृत इण्डिया के चेयरमेन अमृत छाजेड़ का सम्मान कन्हैयालाल जैन पटावरी एवं मीडिया प्रभारी कुसुम लूणिया ने किया।
‘दसावो’ आगम व ‘रहस्य सफलता’ का पुस्तक लोकार्पित आचार्य श्री महाश्रमण द्वारा जैन प्राचीन ‘दसावो’ का लोकार्पण हुआ। जिसका विवेचक, अनुवादक व निवेदक मुख्य नियोजिका साध्वी विश्रुत विभा है।
दूसरी पुस्तक ‘रहस्य सफलता’ का लोकार्पण करते हुए आचार्य प्रवर ने कहा कि इसके लेखक शासन श्री मुनि राकेश कुमार जी बहुत विद्वान मनीषी सन्त हैं। यह पुस्तक जन-जन के लिए प्रवचनकारी उपयोगी सिद्ध होगी।

साभार : डॉ  कुसुम लूणिया, मान्या कुण्डलिया, विनय जैन, ऋषभ जैन, विनीत जैन, दिव्या जैन ABTYP JTN टीम



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