“तेरापंथ की संत परंपरा में सच्चे ‘नग’ के समान थे मुनि नगराज” - मुनि राजकरण

(तेरापंथी सभा द्वारा  स्मृति सभा का आयोजन)


" मुनि श्री नगराज जी बहुत ही भद्र मिलनसार और सरल प्रकृति के संत थे. करुणा और वत्सलता की साक्षात् प्रतिमूर्ति थे. व्यक्ति व्यक्ति को उसके नाम से जानते थे इसी कारण वे सेकडो सेकडों श्रद्धालुओं की श्रद्धा और आस्था के कारण थे. उनकी स्मरण शक्ति भी बेजोड थी. अपने पास सेवा दर्शन के लिये आने वाले हर एक श्रावक श्राविका को धर्म ध्यान, जप तप, ज्ञान दर्शन में निरंतर रत रहने की प्रेरणा देते थे, उनके खुद में सिखने और औरों कों सिखाने की लगन लगी रहती थी. ऐसे संतों का चले जाना समाज और धर्मसंघ में रिक्तता का आभास करने वाला होता है. इसलिए हम कह सकते है कि तेरापंथ की संत परंपरा में सच्चे 'नग' के समान थे मुनि नगराज...

उपरोक्त विचार आचार्य श्री महाश्रमण जी के आज्ञानुवर्ती मुनि श्री राजकरण जी ने तेरापंथ भवन, गंगाशहर में तेरापंथी सभा द्वारा आयोजित स्मृति सभा में व्यक्त किये. इसके साथ ही इस अवसर पर विशेष रूप से उपस्थित शांतिनिकेतन सेवाकेंद्र की व्यवस्थापिका साध्वीश्री चंद्रकलाजी ने अपनी भावांजलि प्रस्तुत करते हुए फ़रमाया कि संत नगराज जी बड़े मेहनती और पुर्शार्थी मुनि थे जब तक सक्षम थे गांव के हर घर तक जाने और दर्शन देने में संकोच नहीं करते थे. धर्म और ज्ञान का प्रतिबोध देने में हमेशा आगे रहते थे, यही सबसे बड़ा कारण था कि छोटा बड़ा हर कोई उनके पास आता और उनसे व्यावहारिक ज्ञान सिखने का प्रयास करता था.

पिछले 26 वर्षों से उनके साथ छाया की तरह उनके साथ रहने वाले मुनि शांतिकुमारजी ने दिवंगत मुनि प्रवर कों गुणों की खान बताया और उन्हें विरल विशेषताओं का धनी महान साधक संत बतलाया. शांति मुनि ने फ़रमाया कि मुनि श्री नगराजजी कों अंतिम समय में लगभग 1 बजे चोविहार प्रत्याख्यान करवा दिया था तथा अंतिम सांस लेने के वक्त नमस्कार महामंत्र के जप का संगान भी किया जा रहा था उनके संस्मरणों कों बतलाते हुए मुनि शांतिकुमारजी भावुक हो गाये और उन्हे अपनी वाणी कों विराम देना पड़ा.      

आज के इस अवसर पर साध्वी पुण्यप्रभाजी, मुनि विमल बिहारी जी, मुनि राजकुमारजी, मुनि पियूषकुमारजी, मुनि मलयजकुमारजी सहित समाज की सभी सभा संस्थाओं के पदाधिकारियों और श्रावक समाज के गण मान्य लोगों ने मुनिश्री नगराजजी का गुणगान करते हुए उनकी दी हुयी सीख कों अपने जीवन में आत्मसात करने का संकल्प लिया.



इस अवसर पर मुनि श्री नगराज जी के संसार पक्षीय भतीजे की पत्नी अमिता सुराना ने अपने भावपूर्ण विचार रखे. किशन बैद ने कुशल संचालन किया.



प्रेषक - JTN धर्मेन्द्र डाकलिया

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