पुनर्जन्म, अध्यात्म, कर्मवाद आदि का ज्ञान अलौकिक ज्ञान है - आचार्य महाश्रमण जी

"ज्ञान से अधिक पवित्र चीज़ नहीं"

3, दिसम्बर 2014, आनंद इंजीनियरिंग कॉलेज, कीमठ, आगरा, परमपूज्य आचार्य महाश्रमण जी की अहिंसा यात्रा का पदार्पण आनंद  इंजीनियरिंग कॉलेज के विशाल प्रांगण में हुआ। कॉलेज में पधारने पर शिक्षकगण व विद्यार्थियों द्वारा भव्य स्वागत हुआ। इसके पश्चात पूज्यवर कॉलेज के स्टेडियम में व्याख्यान देंने पधारे। गुरुदेव ने अपने मंगल उद्बोधन में समुपस्थित विद्यार्थीगण, शिक्षकगण व जनमेदनी को लक्षित करते हुए फ़रमाया जो विनीत होता है, विनम्र होता है वह सम्पति को प्राप्त करता है। जो अविनीत, उद्दंड होता है वह विपत्ति या विफलता को प्राप्त होता है।

मेरा चिंतन है इस दुनिया में ज्ञान से अधिक पवित्र चीज़ कोई नहीं होती। इसलिए आदमी को ज्ञान का अभ्यास करना चाहिए।ज्ञान ला अर्जन करना चाहिए। कितने कितने विद्यार्थी विद्यालयों और विश्वविद्यालयों में पढ़ते हैं। पूज्यप्रवर ने फ़रमाया कि शिक्षा के 3 उद्देश्य होते हैं- ज्ञानवत्ता, आत्मनिर्भरता ओर संस्कार। इन तीन उम्मीदों की पूर्ती जिस विध्यालय से होती है वह शत प्रतिशत सफल विद्यालय है। और जो विद्यालय इनमे सफल नहीं होता तो मानना चाहिए की कुछ कमी है। चाहे विद्यार्थी की कमी हो, शिक्षक की कमी हो या सिस्टम की।

विद्या संस्थानों में लौकिक विद्या सिखाई जाती है। यह जो गणित, भूगोल, खगोल आदि सिखाये जाते हैं ये लौकिक विद्या में आते हैं। मेरा मानना है की लौकिक विद्या चले संस्थानों में वह तो जरुरी है ही। साथ ही अलौकिक विद्या भी सिखाई जाये। अलौकिक विद्या धर्म की विद्या है। इससे अच्छे संस्कारो का निर्माण हो सकेगा। पुनर्जन्म, अध्यात्म, कर्मवाद आदि का ज्ञान अलौकिक ज्ञान है। विद्यार्थियो में संस्कारों को पुष्ट करने के लिए अनिवार्य है। अध्यात्म में सदाचार की बात पवित्रता की बात आती है। कहा गया "शिव संकल्प मस्तु मे मनः" अर्थात मेरा मन पवित्र आचरणों में लगा रहे। पवित्रता की बहुत महत्त्व दिया गया।

हमारे जीवन का 1 पक्ष है ज्ञान तो दूसरा पक्ष है आचार। हम ज्ञान के साथ साथ आचार पे भी ध्यान दें। सदाचार में हम अपना जीवन लगायें। ज्ञान का सार ही आचार है। संयम की सौरभ आ जाने से सोने में सुहागा हो जाता है।

इसके पश्चात् गुरुदेव ने विद्यार्थियों व शिक्षको को अहिंसा यात्रा के संकल्प कराये। आनंद कॉलेज के चेयरमैन ने गुरुदेव का स्वागत किया। कार्यक्रम का सुन्दर संचालन मुनि दिनेश कुमार जी ने किया।

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