साध्वी श्री प्रमोदश्री जी के सान्निध्य में स्मृति सभा

बालोतरा 6 दिसम्बर 2014, श्रीमती फुंदीदेवी धर्मपत्नी स्व. लालचन्दजी गोलेच्छा का 31 दिन का संथारा सम्पन्न होने पर तेरापंथ भवन में स्मृति सभा आयोजित हुई। 
साध्वी प्रमोदश्रीजी ने कहा - श्रावक के तीन मनोरथ है जिसमें से एक है संथारा, व्यक्ति संसार में आता है और चला जाता है। कुछ व्यक्ति बिरले होते है जो अपना नाम स्वर्णक्षरों में लिखा जाता है।

ऐसी हलुकर्मी आत्मा थी, आप ऐसी भाग्यषाली पुण्यात्मा की आपको संथारा आया। उनकी आत्मा में इतनी शक्ति थी कि परिवार के साथ प्रेम साथ समय बिताया। ये आत्मा जहाँ भी जाए आध्यात्मिक उच्चगति करते हुए मोक्ष का वरण करें। सभी भाई-बहिन जो उपस्थित हुए है सभी 1-1 नवकार मंत्र की श्री माला का संकल्प ले एवं आत्मा के प्रति मंगलभावना करें।
साध्वी संघप्रभाजी ने कहा मृत्यु जीवन का अंग है एक है अकाम मरण एवं एक दे सकाम मरण फुंदीदेवी ने सकाम मरण को प्राप्त किया है। हम एक-एक पल एक-एक क्षण मृत्यु की ओर जा रहे है। फुंदीदेवी ने 31 दिन के संथारे में अपने जीवन का सार निकाला है।

आगरा से आचार्य  श्री महाश्रमण के द्वारा प्रेषित संदेश का वाचन ललित जीरावला ने किया। बालोतरा तेरापंथ समाज मंत्री महेन्द्र वैद द्वारा स्मृति चिन्ह का वाचन कर सभा अध्यक्ष, मंत्री एवं तेयुप अध्यक्ष ने पारिवारिकजनों को प्रदान किया।
रोटरी क्लब द्वारा श्रद्धासुमन पत्र प्रदान किया गया। इस दौरान सभापति रतन खत्री, सभा अध्यक्ष मांगीलाल सालेचा, गौतम गोलेच्छा, तेयुप अध्यक्ष रमेश भंसाली, तेयुप प्रभारी कांतिलाल ढेलडि़या, शांतिदेवी तलेसरा, शांतिलाल डागा, बबीतादेवी बालड़ आदि ने अपने विचार प्रस्तुत किये तथा साध्वीश्रीजी, तेयुप, महिला मण्डल एवं पारिवारिकजनों ने गीतिका की प्रस्तुती दी।  अन्त में मुकेश गोलेच्छा ने आभार ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन मिनाक्षी संकलेचा ने किया।

फोटो व रिपोर्ट साभार : JTN प्रतिनिधि निलेश सालेचा, नवनीत बाफना
प्रस्तुति : अभातेयुप जैन तेरापंथ न्यूज़ ब्यूरो 

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