नशामुक्त भारत के अथक प्रयास रूप अहिंसा यात्रा

परम पूज्य आचार्य श्री महाश्रमण जी प्रेरित अहिंसा यात्रा विशेष 

नशामुक्त भारत के अथक प्रयास रूप अहिंसा यात्रा
His Holiness Aachary Shri Mahashraman ji, Started Non Violence March (Ahimsa Yatra)
Jain Terapanth News File Photo


भारत एक विकासशील देश है। विश्व में विकास की राह पर तीव्र गति से आगे बढ़ने के लिए तत्पर देशों के समक्ष बहुत सारी चुनौतियां हैं। भारत देश जनसंख्या की दृष्टि से विश्व का दूसरा सबसे बड़ा देश है। यहाँ की करीब आधे से ज्यादा आबादी ग्रामीण इलाकों  में बसी हुई है। जिस देश में नशे को पाप माना जाता था, वहीं अपने ही देश के लोग आज पश्चिमी संस्कृति की चकाचौंध में अपनी महान पुरातन संस्कृति को भूल रहे हैं। 2014 का वर्ष समापन की ओर है। वर्ष 2015 के स्वागत के लिए जोर शोर से तैयारियाँ चल रही है। शहरी क्षेत्रों में तो आज कल न्यू इयर पार्टी का एक क्रेज़ सा बन गया है। जिसमें मादक पदार्थों का सेवन आम बात हो गई है। शराब, ड्रग्स, हुक्का वगैरह आज कल की पीढ़ी का शौख बन गया है। स्टेटस सिंबल माना जाने लगा है।

इस पश्चिमी प्रवाह में बहते युवा जहाँ, अपना स्वास्थ्य विकृत करते हैं वहीं अपनी संस्कृति को नष्ट कर देते हैं। नशीले पदार्थ का सेवन चाहे वो गुटखा, तम्बाकू, जर्दा, बीड़ी, सिगरेट, शराब या अन्य किसी रूप में हो, आदमी को शारीरिक एवं मानसिक रूप से अक्षम कर देता है। जिस रफ़्तार से यह नशा समाज को अपनी गिरफ्त में ले रहा है, उसे देख यही कहा जा सकता है कि यह सुरसा के मुंह की तरह बढ़ रहा है। धीरे धीरे यह शौख अपने परिवार, समाज एवं देश को बर्बाद करने वाला है। इस भयानक बुराई से मुक्ति पाना अपने आप में एक मुश्किल कार्य है।

परन्तु महापुरुष वही होते हैं जो अपने संकल्प बल के आधार पर युग को बदलने की अर्हता रखते हैं। परमपूज्य आचार्य श्री महाश्रमण जी अपनी अहिंसा यात्रा द्वारा इस कड़ाके की , रूह को कंपा देने वाली सर्दी में पाद विहार कर ग्राम-ग्राम, नगर-नगर विचरण करते हुए नशा मुक्ति की प्रेरणा देते हुए लोगों को नशा मुक्त बनाने का महनीय कार्य कर रहे है। यह उनके भीतर की करुणा का ही परिचायक है। स्वयं की परवाह किये बिना सामाजिक बुराइयों के निर्मूलन में अपना योगदान दे रहे हैं।

अहिंसा यात्रा भारत के कई राज्यों, नेपाल एवं भूटान जैसे भारत के पड़ोसी देशों में भी नशा मुक्ति का सन्देश देगी । अहिंसा यात्रा के 3 मुख्य उद्देश्य हैं:
 • सदभावना का संप्रसार
 • नशामुक्ति अभियान
 • नैतिकता का प्रचार प्रसार
ग्रामीण जनों की कुटीर से राष्ट्रपति भवन तक, पूज्य प्रवर जहाँ भी पधारते हैं सभी को नशा मुक्त होने का संदेश देते हैं। आचार्य प्रवर के इस अभियान में अनेक लोग नशा मुक्त होने का संकल्प ले चुके हैं तथा ले रहे हैं।

राष्ट्रहित के इस महान कार्य को, शांतिदूत आचार्यप्रवर अपनी धवल सेना के साथ जन-जन तक पहुचाने में संकल्परत हैं। हम सब शांतिदूत आचार्यप्रवर के ये संकल्प को साकार करने में अपना अपना योगदान दें और अपने गुरु के प्रति, अपने देश के प्रति अपना फर्ज अदा करें। प्रश्न हो सकता है  शुरुआत कहाँ से? तो उत्तर होगा शुरुआत स्वयं से हो। यदि आप किसी भी प्रकार का नशा करते हैं तो सर्वप्रथम आप उसका त्याग करें, उससे मुक्त बनें। फिर अपने परिवार व समाज को भी नशा मुक्त होने की प्रेरणा दें।
"सुधरे व्यक्ति समाज व्यक्ति से, राष्ट्र स्वयं सुधरेगा।"

अहिंसा यात्रा निश्चय ही इस युगीन समस्या को समूल नष्ट करने में अपनी उच्च भूमिका अदा करेगी। तथा युग को एक नव बोध प्रदान करेगी।
शुभाशंसा।।


अभातेयुप जैन तेरापंथ न्यूज़ टीम
दिनांक 29-12-2014

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