साध्वी सुषमाश्री जी की अंतिम यात्रा


आचार्यश्री महाश्रमणजी की आज्ञानुवर्ती सुशिष्या साध्वी सुषमाश्री जी वय 60 वर्ष बुधवार रात को 7.30 बजे शांति निकेतन सेवाकेंद्र में अरिहंत शरण हो गयी. मूलतः गंगाशहर निवासी सुश्रावक स्व. केशरीचंद जी गोलछा एवं बुधीदेवी गोलछा के यहाँ विक्रम संवत २०११ (सन 1954)  फाल्गुन बदी ६ को एक पुत्री का जन्म हुआ उसी ने आगे चलकर १७ वर्ष की युवावस्था में विक्रम संवत २०२८ (सन 1971) को माघ पूर्णिमा को तेरापंथ के नवंम अधिशास्ता आचार्यश्री तुलसी के कर कमलों से गंगाशहर में ही संयम रत्न (दीक्षा) ग्रहण की.

साध्वी सुषमाश्री जी बहुत ही सौम्य एवं हंसमुख स्वाभाव की धनी साध्वी थी. हर समय धर्म-ध्यान, जप-स्वाध्याय मे लीन रहने वाली साध्वी थी. अभी पिछले चार वर्षों से यहाँ सेवाकेंद्र में रहकर स्वास्थ्य लाभ कर रही थी और मात्र ६० वर्ष की अवस्था में ४३ वर्षों की संयम यात्रा संपन्न करके स्वर्गस्थ हो गयी.

उनकी अंतिम यात्रा आज प्रातः १०.१५ बजे शांति निकेतन सेवाकेंद्र से प्रारम्भ होकर तेरापंथ भवन, महावीर चौक, मैन बाज़ार, बाबा रामदेव रोड होते हुए पुराणी लाईन स्थित शमशान गृह पहुंची जहाँ दिवंगत साध्वी जी के संसार पक्षीय गोलछा परिवार के भाईओं ने  पार्थिव देह को मुखाग्नि दी. उनकी अंतिम यात्रा मे आगे आगे बेंड बाजा अध्यात्मिक धुन बजाता हुआ चल रहा था फिर गायक मण्डली उपदेशात्मक गीतिका का संगान करते हुए चल रहे थे. फिर हर आयु वर्ग के बच्चे, युवक युवती, महिला पुरुष इत्यादि पंक्ति पूर्वक चल रहे थे. इस अवसर पर तेरापंथी सभा, महिला मंडल, युवक परिषद सहित समाज की सभी सभा संस्थाओं के प्रतिनिधि और सदस्य उपस्थित थे. सेवा केंद्र की साध्वियों ने भी दिवंगत साध्वी सुषमाश्री जी के गुणों को बखान करने वाली भावपूर्ण गीतिका का संगान किया.

वैसे कल साध्वी सुषमाश्री जी के उपवास ही था, शाम के समय थोड़ी स्वास्थ्य की अनुकुलता नहीं होने की वजह से डॉक्टर के परामर्ष के आधार पर तेरापंथी सभा के पदाधिकारियों एवं पारिवारिक जनों ने उनसे हॉस्पिटल चलने का आग्रह किया लेकिन उन्होंने मना कर दिया. इसके साथ ही वे कई दिनों से अपनी साथ की साध्वियों कों कहती थी कि मेरा आयुष्य अब बहुत कम ही बचा है.


प्रेषक :-  JTN धर्मेन्द्र डाकलिया

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