ज्ञान के साथ सदाचार को करे आत्मसात् : आचार्य श्री महाश्रमण




 
परमश्रद्धेय आचार्य श्री महाश्रमणजी  ने पुरवामीर में अपने प्रवचन में ज्ञान के बाधक तत्त्वों के बारे में बताते हुए ज्ञान के साथ सदाचार को आत्मसात् करने हेतु उत्प्रेरित किया।  आचार्यवर  ने कार्यक्रम में उपस्थित विद्यार्थियों को विवेकपूर्ण सत्पुरुषार्थ करने की प्रेरणा प्रदान की।  आचार्यप्रवर ने ‘श्रेष्ठ बालक वह सुगुण का जो अमित भण्डार है' गीत का संगान किया।  विद्यार्थियों ने आचार्यवर से नशामुक्ति का संकल्प स्वीकार किया।  विद्यालय की विद्यार्थिनियों द्वारा प्रार्थना के पश्चात् आचार्यप्रवर के स्वागत में गीत का संगान किया गया  साध्वी चारित्रयशाजी ने गीत का संगान किया।  कार्यक्रम में ग्राम पंचायत के सभी विद्यालयों के सौ से अधिक शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित थे  अध्यापक श्री आशीष पंवार ने आचार्यप्रवर के स्वागत में भावपूर्ण अभिव्यक्ति दी। 

कार्यक्रम के पश्चात् पुरवामीर के शिक्षक-शिक्षिकाओं के लिए शिक्षक संगोष्ठी का आयोजन खण्ड शिक्षाधिकारी श्री संजय यादव द्वारा किया गया। श्री यादव प्रतिदिन संस्कार चैनल पर पूज्यवर के प्रवचन सुनते हैं। अपने कार्यक्षेत्र में आचार्यवर के पदार्पण से वे अत्यधिक उल्लसित थे। सम्मेलन में संभागी शिक्षक आचार्यवर के दर्शन कर भावविभोर थे। पूज्यवर ने पावन पाथेय प्रदान किया एवं शिक्षकों की जिज्ञासाओं को भी समाहित किया। पूज्यप्रवर के आह्वान पर प्रायः सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं ने खडे़ होकर अहिंसा यात्रा के संकल्प ग्रहण किए।  

श्री संजय यादव ने हाथीपुर प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका श्रीमती राधा गुप्ता द्वारा निर्मित आचार्यवर का चित्र आचार्यवर को भेंट किया । जूनियर स्कूल नरवल की शिक्षिकाओं तथा प्राथमिक विद्यालय लक्ष्मणपुर के अध्यापक श्री योगेश पाण्डे ने पूज्यप्रवर की अभ्यर्थना में आस्थासिक्त गीतों का संगान किया।


Related

Pravachans 4173742290896727969

Post a Comment Default Comments

Leave your valuable comments about this here :

emo-but-icon

Follow Us

Hot in week

Recent

Comments





Total Pageviews

item