दुनिया में कर्तव्य का ऊँचा स्थान-आचार्य श्री महाश्रमण

दुनिया में कर्तव्य का ऊँचा स्थान-आचार्य श्री महाश्रमण 
1फ़रवरी2015
सर्वोदय इंटर कॉलेज, गोपालगंज
आज पूज्यप्रवर ने जनता को मंगलदायी  कर्तव्य परायणता का बोध कराने वाला पावन संदेश प्रदान करते हुए फ़रमाया कि दुनिया में  कर्तव्य का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। धर्म का एक अर्थ  कर्तव्य भी होता है। व्यक्ति अपने  कर्तव्य के प्रति जागरूक रहता है तो व्यवस्था अच्छी होती है, इसलिए व्यक्ति को अपने  कर्तव्य के प्रति जागरूक रहना चाहिए। आपश्री ने कहा की हर व्यक्ति का अपना अपना  कर्तव्य होता है। राजा, प्रजा, कर्मचारी, मालिक सभी का अपना अपना कर्तव्य है। जिसका जो  कर्तव्य है, उसके प्रति उसमे निष्ठा रहे तो दुनिया अच्छे से चल सकती है।

कर्तव्य व  अकर्तव्य का विवेक- भेद रेखा पशु व मनुष्य की :
पूज्यप्रवर ने कहा की जो लोग अपने  कर्तव्य, अकर्तव्य को नहीं पहचानते हैं उनका ऐसा अनिष्ट हो सकता है जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की हो।  कर्तव्य-अकर्तव्य को नहीं जानने वाले मनुष्य पशुजन्य हो जाते हैं। कर्तव्य व  कर्तव्य का विवेक ही पशु व मनुष्य के बीच की भेद रेखा होती है।
पूज्यप्रवर ने प्रेरणा देते हुए कहा कि साधु का पहला कर्त्तव्य है कि वह साधुत्व की रक्षा करे। उनमें प्रमाद होता है तो उसके परिष्कार का प्रयास होना चाहिए। साधु का धर्म है कि वह साधुत्व की रक्षा करे।

जीवन है परस्पर सापेक्ष:
संसार व परिवार में कर्त्तव्य कि बात पर गुरुदेव ने कहा कि प्राणियों का जीवन एक दूसरे से सापेक्ष है। सर्वथा निरपेक्ष होकर जीवन जीना कठिन है। सापेक्षता-निरपेक्षता दोनों का योग जीवन मैं चलता रहता है। माता-पिता का अपना कर्त्तव्य होता है। माता-पिता अपनी सन्तान को सुशिक्षा, सुसंस्कार ना दे तो वे अपने कर्त्तव्य से च्युत हैं।
माँ-बाप को वृध्दाश्रम भेजकर उनके प्रति उपेक्षा की भावना है तो वह भी गलत है। किसी माँ-बाप की सन्तान शारीरिक या मानसिक अविकसित हो तो उसकी सेवा को ड्यूटी मानें। गुरु व शिष्य का परस्पर संबंध होता है। शिष्य का काम है गुरु की सेवा करना गुरु डूबते हुए को तारने का काम करते हैं। गुरु शिष्य को धर्म व अधर्म का ज्ञान देते हैं। शिष्य को गुरु की सेवा करनी चाहिए व गुरु की आज्ञा में रहना चाहिए। गुरु शिष्य को विकास का अवसर दे, उसे बोध दे। शिष्य को चित्त समाधि देना, संरक्षण देना गुरु का कर्त्तव्य है।
 पति-पत्नी  का अपना-अपना  कर्तव्य  होता है। रामायण में जब रामजी वनवास यात्रा गए तब सीताजी भी साथ गई थीं। सीताजी ने अपने कर्तव्य के प्रति निष्ठा भावना दिखाई। पत्नी की सुरक्षा करना पति का कर्तव्य व धर्म होता है। पति का कर्तव्य रामचन्द्रजी से और पत्नी का कर्तव्य सीताजी से सीखा जा सकता है।

अ.भा.ते.यु.प ने निवेदित किया राजस्थान सरकार द्वारा प्रदत्त प्रशस्ति पत्र 
कार्यक्रम में अ.भा.ते.यु.प. को २६ जनवरी'२०१५ को राजभवन जयपुर में चिकित्सा व सेवा के क्षेत्र में राजस्थान सरकार द्वारा अभातेयुप अध्यक्ष श्री अविनाश नाहर को प्रशस्ति पत्र भेंट कर अभातेयुप को सम्मानित किया गया था। अ.भा.ते.यु.प. के सहमंत्री श्री सुरेन्द्र जी सेठिया ने इसके बारे में कार्यक्रम में अवगति दी तथा प्रतिष्ठित पत्र पूज्यप्रवर को निवेदित किया। इस दौरान ते.यु.प. जयपुर, चेन्नई , कानपूर के कार्यकर्ता भी मौजूद थे। श्री नरेश जी मेहता (ते.यु.प. जयपुर) ने अपने भावों को अभिव्यक्ति दी। कार्यक्रम का संचालन मुनि श्री दिनेश कुमार जी ने किया।
आज गुरुदेव का प्रवास गोपालगंज के सर्वोदय इंटर कॉलेज में हुआ। गोपालगंज में १९३० में महात्मा गांधी, १९५० में जवाहरलाल नेहरू जी आये थे। गोपालगंज वासियों का सौभाग्य है कि आज परम पावन आचार्यवर इस धरा पर पधारे।

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