पैसे, पद, प्रतिष्ठा से इतना सुख नहीं - आचार्य महाश्रमण जी

परमपूज्य आचार्यप्रवर मालचंद दुगड के निवास पर प्रवासित हैं। दुगड़ परिसर में आज का प्रवचन हुआ। 25 अप्रेल के बाद पूरे पांच दिनों के अंतराल पश्चात आज पूज्यप्रवर का प्रवचन श्रवण लाभ जनमानस को प्राप्त हुआ। पर रात्रीकालीन प्रवचन अभी भी कुछ दिनों तक स्थगित रह सकेगा।
परमपूज्य महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमणजी ने अपने प्रेरणादायी पाथेय में कषाय मुक्त होने की प्रेरणा देते हुऐ फरमाया कि अर्हतों, सिद्धों को जो सुख प्राप्त है वह सुख हमें भी नही प्राप्त है क्यूंकि हमारे में कषाय है पैसे, पद, प्रतिष्ठा से इतना सुख नहीं, जितना सुख अर्हतों व सिद्धों के पास है। वे परमसुखी हैं इसलिए हमें भी जल्दी वीतराग होने का प्रयास करना है। हम केवल ज्ञानी बन जाऐं। हम तीर्थंकर बनने की तो वांछा नहीं करते पर मोक्ष की वांछा करते हैं। हम राग-द्वेष मुक्त बनने का प्रयास करें। केवली बनने पर यथार्थ सामने आ जाऐगा हमें सर्वज्ञता प्राप्त हो, यह हमारे लिऐ काम्य है। हम पंचपरमेष्ठी का स्मरण करें। मुख्य नियोजिका साध्वी विश्रुतविभा जी ने कहा कि हमारे यहां गुरू का महत्व है और जो अकिन्चन होता है, वह सच्चा गुरू होता है। सच्चा पथदर्शक सही मार्गदर्शक होता है।

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