दुराग्रह को त्याग, सत्याग्रही बनें - आचार्य श्री महाश्रमण

Aacharya Shri Mahashraman ji Addressing the People of Kathmandu, Nepal in his Non Violence March.

5 मई 2015, काठमांडू, नेपाल, Jain Terapanth News.
परमपूज्य महातपस्वी आचार्य प्रवर ने फ़रमाया कि जीवन में यथार्थवाद के प्रति आकर्षण होता है तो व्यक्ति में सम्यक्त्व की निर्मलता का विकास होता हैं। व्यक्ति को आग्रही, दुराग्रही नहीं होना चाहिए। वह सदाग्रही बने। दुराग्रह का त्याग कर सत्याग्रही बने। सम्यक्त्व के प्रति हमारा सम्मान होना चाहिए। ऐसा होने पर हम सम्यक्त्व के दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

मुख्य नियोजिका जी साध्वी विश्रुत विभा जी का सकारात्मक चिंतन पर प्रेरणादायी वक्तव्य हुआ। एकता संचेती, विनोद छाजेड़ ने कविता प्रस्तुत की।

Listening to His Holiness Aacharya shri Mahashraman ji people of Kathmandu, Nepal. 

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