आत्मा के साथ रिश्ता बनायें-आचार्य श्री महाश्रमण

रिश्तों को मजबूत बनाने के बताये उपाय, कषाय मुक्त बनने की दी प्रेरणा
H.H. Aacharya shri Mahashraman ji, at the Capital of Nepal, Kathmandu.

12 मई 2015 काठमांडू, परमपूज्य महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमण जी ने "रिश्तों को मजबूत कैसे बनाएं"विषय पर तेरापंथ महिला मण्डल द्वारा आयोजित कार्यक्रम में फरमाया कि व्यक्ति अपनी आत्मा के साथ रिश्ता बनाए या फिर परमात्मा के साथ रिश्ता बनाए क्युंकि आत्मा तत्व सबसे बड़ा हितकारी है। इसलिए व्यक्ति आत्मस्थ रहने का प्रयास करे। पूज्यवर ने कहा कि व्यक्ति अपनी आत्मा की स्थिति के बारे  मे सोचे। अपनी साधना के बारे में सोचे। आत्मा को पापों से बचाने का प्रयास करे। कषायों से आत्मा को बचाए रखे।

पूज्यवर ने सभी महिलाओं एवं उपस्थित जनमेदनी को रिश्तों को मजबूत बनाने के गुर देते हुये कहा कि रिश्ते वहाँ मजबूत रह सकते है जहाँ हितैषिता की भावना होती है। सेवा भावना रिश्तों को मजबूत करने वाली है। संकट ग्रस्त का सहयोग रिश्तों को मजबूत करता है। एक झटके को सहन करने, सहनशीलता होने से रिश्ते मजबूत बनते हैं। आदमी में क्षमता का विकास भी होना चाहिए।

पूज्यवर ने कहा कि परिवार में लोगों को एक दुसरे को सहना चाहिए गलती होने पर मौके पर कहना चाहिए और शान्ति से रहना चाहिए। व्यक्ति आत्मा का रिश्ता मजबूत करें और आत्मा के रिश्ते को मजबूत बनाने के लिये वीतराग प्रभु के पथ पर बढ़ने का प्रयास करें। मुख्य नियोजिका साध्वी विश्रुत विभा जी ने रिश्तों को मजबूत बनाने के टिप्स देते हुये कहा कि व्यक्ति-
Talk करे - परिवार के सदस्य परस्पर बातचीत करें । इससे रिश्ता मजबूत बनता है।
Trust करे - विश्वास संबंधों को मजबूत बनाता है।
Tolerance - सहिष्णुता के विकास से संबंध अच्छे बन पाते हैं।
Thank you - धन्यवाद कहने से सौहार्द बढ़ता है।

तेरापंथ विकास परिषद के सदस्य पदमचंद जी पटावरी ने विचाराभिव्यक्ति दी। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि ऊर्जा मंत्री राधा ज्ञावली ने पुज्यवर को वंदना करते हुये कहा कि आचार्य श्री की यह अहिंसायात्रा सुखमय हो। आचार्य श्री ने आहत मानव जाति को राहत दी है।

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