दया कल्याण की जननी है: आचार्य महाश्रमण


परमपूज्य आचार्य श्री महाश्रमणजी का आज का प्रवास टंकीसिनवारी में दुग्गड़ फेक्ट्री में हुआ. पूज्यप्रवर ने आज प्रवचन प्रदान करते हुए फरमाया कि- दया कल्याण की जननी है. दुःख व पाप रूपी शत्रु का नाश करने वाली कल्याणी है. पूज्यवर ने रजोहरण दिखाते हुए फरमाया कि- यहाँ हमारे अहिंसा का धर्मोपकरण है. जब चलते है तो जमीन को इससे पूज कर चलते है ताकि पैर के नीचे को जीव न आ जाएं. 
साध्वीप्रमुखा श्री कनकप्रभाजी ने फ़माया कि- आत्मार्थी व्यक्ति आत्महित के लिए साधक की शरण में आकर मार्गदर्शन प्राप्त कर मंजिल को प्राप्त करते है. आत्मार्थी व्यक्ति अपने जीवन को व्यर्थ नहीं खोते.
मुख्य नियोजिका साध्वीश्री विश्रुतविभाजी ने फरमाया कि- पूज्यप्रवर के दर्शन कर व्यक्ति अपने तन,मन, वचन एवं कर्म को पवित्र बना लेते है.
साध्वीवृंद द्वारा "अब मानव जीवन मिल्यो जागो" गीतिका का संगान किया गया. पूर्व सांसद एवं फैक्ट्री के मालिक श्री मोतीलाल दुगड़ ने पूज्यप्रवर की अभिवन्दना की.
संवाद: राजू हीरावत, प्रस्तुति- अभातेयुप जैन तेरापंथ न्यूज़.

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