साधू साध्वियां श्रुत की साधना करें : आचार्य श्री महाश्रमण


फारबिसगंज. 15 जुलाई.  परमपूज्य महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमणजी ने चतुर्दशी के अवसर उपस्थित सभी साधू-साध्वियों, समणियों को प्रेरणा स्वर में फरमाया कि प्रवचन समय पुर शुरू हो एवं निर्धारित समय पर पूरा हो.  प्रवचनकार प्रवचन से पूर्व प्रवचन विषय की तैयारी करके जाएँ. प्रवचनकार का अध्ययन मजबूत हो, वाणी ठीक हो और चित्त में प्रतिभा की स्फुरणा तो प्रवचन अच्छा हो सकता है. प्रवचन में थोड़ा श्रम करना पड़े तो श्रम की परवाह नहीं करनी चाहिए. 

पढ़ाने से ज्ञान मजबूत :  अध्ययन-अध्यापन के लिए फ़रमाया कि साधू-साध्वियों को बाल साधू साध्वियों को बाल साधू साध्वियों को पढ़ाने में समय लगाना चाहिए. पढ़ाने से स्वयं का ज्ञान मजबूत बनता है. तेरापंथ धर्मसंघ में उपाध्या पद की व्यवस्था नहीं है पर बहुश्रुत साधू-साध्वियां है. जैन शासन की अन्य परम्पराओं में उपाध्याय की व्यवस्था है. उपाध्याय का काम ज्ञान देने का है. उपाध्याय पद हो या न हो, ज्ञानी साधू-साध्वियों को अध्यययन-अध्यापन के रूप में श्रुत की आराधना करनी चाहिए. 
वैराग्य वर्धक गीत गाएं: साधू-साध्वियाओं को ज्ञानवर्धक, वैराग्य्वर्धक एवं श्रद्धावर्धक गीतों का संगान करना चाहिए एवं संगान लय के साथ करने का प्रयास करना चाहिए.
साध्वी रतनकुमारीजी की आत्मा करें आध्यात्मिक विकास: 
पूज्यप्रवर ने शासनश्री साध्वी रतनकुमारीजी 'सरदारशहर' की स्मृति सभा में उनकी आत्मा के प्रति आध्यात्मिक विकास की मंगलकामना की. इससे पूर्व पूज्यप्रवर ने उनका जीवन परिचय प्रस्तुत किया. 
साध्वीप्रमुखा कनकप्रभाजी ने शासनश्री साध्वी रतनकुमारीजी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि- वे अनुशासन प्रेमी साध्वी थे. उन्हें गुरुकुलवास में लम्बे समय तक रहकर गुरु सन्निधि में साधना व अध्ययन का मौका मिला. गुरुदेव तुलसी ने स्वयं उन्हें अतितिक्त समय देकर पढ़ाया-लिखाया. वे संघनिष्ठ, शालीन एवं सरल साध्वी थी. उन्हें गुरुदेव तुलसी, आचार्य महाप्रज्ञजी एवं आचार्य महाश्रमणजी, तीन -2 आचार्यों की विशेष कृपा प्राप्त थी. साध्वियां उनकी विशेषताओं को ग्रहण करने का प्रयास करें. 
चतुर्दशी के अवसर पर हुआ हाजरी का वाचन: आज हाजरी के कार्यक्रम में सभी साधू-साध्विया, समनियां उपस्थित हुई. बाल साध्वियो साध्वी प्रफुल्ल्प्रभा व साध्वी विशालप्रभा ने लेख पत्र का वाचन किया. तत्पश्चात सभी साधू-साध्वियों ने लेख पत्र का वाचन किया. 
नियम: पूज्य्प्रवर ने गुरुकुलावास में रह रहे साधू-साध्वी एवं समण श्रेणी के लिए  कहा कि वे गोचरी में उबले हुए फल, सलाद न ले. छिलके उतरे हुए और बीज निकाले हुए फल, सलाद ले सकते है. 

मुनि महावीरकुमार जी ने 'तेरापंथ अधिराज भिक्षु स्वामी पधारो जी"  गीत का संगान किया. 




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