हम चाहते है जैन कार्यवाहिनी से युवक परिषद्, तेरापंथ सभा,तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम जुड़े - साध्वी श्री त्रिशला कुमारी जी


जैन कार्यवाहिनी कोलकाता का स्थापना दिवस कार्यक्रम दिनांक 1 अक्टूबर को महासभा के प्रांगण में मनाया गया । मंत्री मुनि सुमेरमल जी स्वामी के सानिध्य में 27 सितम्बर 1991 को इसका गठन हुआ था। 13 की संख्या से प्रारंभ हुई यह जैन कार्यवाहिनी के आज लगभग 168 सदस्य है। जैसा की यहाँ चुनाव की प्रक्रिया नहीं है  प्रति वर्ष 2 नए संयाजको की नियुक्ति इसके निर्देशक बजरंग जी जैन करते है इस वर्ष 2 नए संयोजक सुशील चण्डालिया व संतोष सुराना के नाम की घोषणा हुई। सभी ने ॐ अर्हम की ध्वनि से नए 2 संयोजकों का स्वागत किया । 


इस वर्ष रजत जयंती वर्ष प्रारंभ हो रहा है इसलिए रजत जयंती वर्ष के लिए प्रकाश सुराना को संयोजक नियुक्त किया गया ।


जैन कार्यवाहिनी की रजत जयंती वर्ष प्रवेश पर परम श्रद्धेय आचार्य श्री महाश्रमण जी व मंत्री मुनि श्री सुमेरमल जी स्वामी ने महती कृपा करा जैन कार्यवाहिनी को अपना सन्देश प्रदान किया जिसका वाचन जैन कार्यवाहिनी के समन्यवक महेंद्र दुधोडिया ने किया । मंच का कुशल सञ्चालन निर्मल सुराना ने किया ।


दिनांक 4 अक्टूबर को उत्तर हावड़ा सभागार में साध्वी श्री त्रिशला कुमारी जी के सान्निध्य में स्थापना दिवस का द्वितीय चरण मनाया गया । साध्वी श्री जी ने मंगल आशीर्वचन प्रदान करते हुए फ़रमाया की धर्मसंघ के विकाश के लिए अनेक सभा संस्था अपना योगदान दे रही है उसमे एक है जैन कार्यवाहिनी। इसकी नींव के पत्थर है श्रद्धेय मंत्री मुनि प्रवर । उन्होंने कोलकाता चातुर्मास में ऐसी कोई योजना बनाई ।


मुझे लगता है ऐसे शुभ मुहर्त में इस जैन कार्यवाहिनी की नींव लगी है की जैन कार्यवाहिनी आज ज्यो की त्यों अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रही है । इसमें अनेक हमारे श्रावक जुड़े हुए है। इसमें 33 श्रावक ऐसे है जो उपासक बन चुके है । कोलकाता महानगर है और इनकी संख्या भी अच्छी है पर अभी संतुष्टि नहीं है । 


हम चाहते है जैन कार्यवाहिनी से अनेक लोग जुड़े । चाहे युवक परिषद्, चाहे तेरापंथ सभा, चाहे तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम सब इससे जुड़े । लेकिन इसमें आपको कोई पद नहीं मिलने वाला है । अन्य सभा संस्था में आपको पद मिल सकता है पर यहाँ कोई पद नहीं मिलने वाला यहाँ तो सिर्फ ज्ञान मिलने वाला है । गुरुदेव के पधारने से पहले जैन कार्यवाहिनी में और अधिक विकाश हो और अधिक ऊंचाई को छुए । समाज में हमारे युवक है भाई है वो इससे जुड़े और जुड़कर अपने व्यक्तित्व का विकाश करे । जीवन में विकाश करना है तो विकाश के अनेक राहे है उसमे एक राह है जैन कार्यवाहिनी तो हमारे भाई इससे जुड़े ।


जैन कार्यवाहिनी से किसी की माँ ने दीक्षा ली किसी के बेटे ने दीक्षा ली किसी की बेटी में दीक्षा ली, किसी की बहन ने दीक्षा ली  और एक ही कार्यवाहक मुनि डॉ विनोद कुमार जी ने दीक्षा ली है, तो ऐसे एक और दीक्षार्थी जुड़े तो अच्छा काम हो जाता है ।


इसका 25वे वर्ष में प्रवेश हो रहा है तो उपलब्धियों का दौर शुरू हुआ है । उपलब्धियों में और अधिक उपलब्धियां हाँसिल करे । अपने जीवन में ज्ञान दर्शन चारित्र तप का विकाश करे और संघ सेवा के लिए हमेसा तत्पर रहें । हमने देखा है रास्ते की सेवा में, तपस्या में हर कार्य में जैन कार्यवाहक आगे रहते है और भविष्य में भी आगे रहते रहें । जहाँ कही भी मौका मिले संघ सेवा करने का वहाँ सदा तत्पर रहें । जैन कार्यवाहिनी के प्रति मेरी बहुत बहुत मंगलकामना है। तपस्विनी बहन के प्रति भी मंगल कामना ।


उल्लेखनीय है की जैन कार्यवाहिनी कोलकाता के सदस्य के परिवार से दीक्षित साधू साध्वी संघ समर्पित है रणजीत चोरडिया के पुत्र मुनि योगेश कुमार जी,, बालचंद बोथरा के पुत्र मुनि मुदित कुमार जी, महेंद्र दुधोडिया की पुत्री साध्वी श्री मौलिकयशा जी व नरेन्द्र पुगलिया की माँ साध्वी हिम्मत यशा जी (संथारारत) थे। यह सूचना जैन कार्यवाहिनी कोलकाता के प्रचार प्रसार संयोजक पंकज दुधोडिया ने दी।

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