अणुव्रत प्रकाश दीप है : साध्वीश्री सोमलता जी

कांदिवली : अणुव्रत अनुशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण जी की विदुषी शिष्या साध्वी श्री सोमलता जी के सानिध्य में अणुव्रत चेतना दिवस का कार्यक्रम आयोजित हुआ। महाप्रतापी संत सम्राट आचार्य श्री तुलसी के व्यक्तित्व व कर्तृत्व को उजागर करते हुए कहा कि तेजस्वी सितारे के समान जैन संघ के माले पर सुशोभित, मानवता के मसीहा आचार्य श्री तुलसी ने अणुव्रत आंदोलन का सूत्रपात किया। अणुव्रत मानवता का पथ है उसकी आचार संहिता मानव के लिए प्रकाश दीप के समान है।
साध्वी श्री सोमलता जी ने ओजस्वी वाणी में कहा कि अणुव्रत का मूलभूत उद्देश्य है। प्राणि मात्र को मैत्री के धागे में बांधना, हिंसात्मक प्रवृतियों पर रोक लगाना एवं व्यसन मुक्त जीवन जीने की प्रेरणा  देना। साध्वी जी ने वर्तमानिक समस्याओं पर चर्चा करते हुए कहा यदि विश्व का प्रत्येक प्राणी नैतिक आचार सहिंता का पालन कर ले तो भ्रूण हत्या, तलाक, अप्रमाणिकता जैसी जटिलतन समस्याओं का समाधान होने में देर नहीं लगेगी।
साध्वी श्री शकुन्तला कुमारी जी, साध्वी श्री जागृत प्रभाजी, रक्षितयशा जी ने मनु पुत्र हो मनुजता के गीत गुनगुनाओ गीत गाकर जन-जन को नैतिक बनाने का आहवन किया। साध्वी श्री संचित यश जी ने अपने विचार व्यक्त किये। दहिसर महिला मंडल के मंगल संगान के साथ कार्यक्रम का सुभारम्भ हुआ। दहिसर तेयुप अध्यक्ष अशोक जी डूंगरवाल ने स्वागत भाषण व आभार ज्ञापन सज्जन जी बम्ब ने किया। कार्यक्रम का संचालन धर्मेश जी दुगड़ ने किया।
इस मौके पर तुलसी महप्रज्ञ फाउंडेशन के अध्यक्ष माणक जी धींग व् ताराचंद जी धींग ने साध्वी श्री जी को मुंबई समय सारणी पुस्तिका भेंट की।  आयम्बिल तप करने वाली बहिन बसंता का तप अभिनन्दन किया गया। साध्वी श्री ने इस अवसर पर मुंबई में भवन कई है पर राजभवन नंबर वन है गीत का संगान किया तो पूरा पांडाल ओम अर्हम ध्वनि से गूंज उठा।

द्रौपदी की तरह नहीं, अनुपमा की तरह बोलें : साध्वी श्री सोमलताजी
कांदिवली : संत शिरोमणि आचार्य श्री महाश्रमण जी की विदुषी शिष्या साध्वी श्री सोमलता जी के सानिध्य में कांदिवली राजभवन में लगभग 450 व्यक्तियों ने चंदनवाला के तेले का सामूहिक पारणा करके राजभवन को तपोमय बना दिया। आयम्बिल का मासखमण करने वाली बहिन बासंती का भी तप अभिनन्दन किया गया।
विविध रंगी विशाल परिषद को संबोधित करते साध्वी श्री सोमलता जी ने कहा कि शक्ति को संचित करने का अपूर्व साधन है मौन। मौन से न केवल विकेन्द्रित शक्ति ही संचित होती है अपितु वाणी में बल एवं तेज भी जागृत होता है। प्रसंगवश साध्वी श्री जी ने जनचेतना को झकझोरते हुए कहा कि अपने कार्य के लिए व्यक्ति स्वयं बोले इसमें उसकी महानता नहीं होती है। महानता इसमें है कि उसका कार्य ही स्वयं बोले।
साध्वी श्री सोमलता जी ने ओजस्वी वाणी में कहा वाणी विश्व की अमूल्य निधि है। इसकी सुरक्षा के लिए आदमी को सत्य बोलना चाहिए। आपने कहा आज रिश्तों में जो दरारें पड़ रही हैं, आपस में पारस्परिक सामंजस्य नहीं हो पा रहा है इसका मूल कारण है वाणी का अविवेक होना है। सोच-विचार कर मुखारबिंद से जो हितकारी, मधुर, सत्य व मधुर भाषा का प्रयोग करे ताकि जीवन में शांति के पुष्प विकसित हो सके। साध्वी श्री जी ने जनमेदिनी को संकल्प करते हुए कहा शब्दों के बिना जीवन चलना मुश्किल है, बोलना तो पड़ेगा ही मगर संकल्प ऐसा करें कि द्रौपदी की तरह नहीं अनुपमा की तरह हम बोले। मलाड महिला मण्डल के मंगल संगान के साथ कार्यक्रम का प्रारम्भ हुआ। स्वागत भाषण देवेन्द्र जी कावड़िया व कृतज्ञता ज्ञापन मलाड तेयुप मंत्री हस्तिमल जैन ने किया। संचालन तेयुप मलाड अध्यक्ष भरत लोढ़ा ने किया। दहिसर कन्यामंडल ने चंदनबाला की आकर्षक नाटिका प्रस्तुत की।
इस मौके पर मुंबई सभा के विशिष्ट उपाध्यक्ष मनोहर जी गोखरू, शिक्षण संस्थान के अध्यक्ष श्री मान अर्जुन जी सिंघवी, जैन भारत महामंडल के महामंत्री बाबुलालजी बाफना, तुलसी महाप्रज्ञ फाउंडेशन के अध्यक्ष माणक जी धींग, सुराणा हॉस्पिटल के श्री मान डीसी सुराणा, मुंबई सभा के उपाध्यक्ष श्री अर्जुन चौधरी, निर्मल जी कुम्मठ, भिकमजी नाहाटा, अमृत जी खटेड़, गौतम जी डांगी, राजकुमारी जी चपलोत, अशोक जी तलेसरा, अणुव्रत समिति मंत्री महेशजी बाफना, सुनील जी मेहता, क्षेत्रीय प्रभारी योगेश जी चौधरी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बीसी भलावत आदि उपस्थित थे।

जप से होता है आत्म दर्शन – साध्वीश्री सोमलता जी
कांदिवली : आचार्य श्री महाश्रमण जी की विदुषी शिष्या साध्वी श्री सोमलता जी के सान्निध्य में आध्यात्मिक पर्युषण पर्व का छठा दिवस जप आराधना के रूप में मनाया गया। हजारों-हजारों भाई -बहनों ने मंत्रो के जप से अपने आभामण्डल को निर्मल बनाया। साध्वी श्री सोमलता जी ने ओजस्वी वाणी में विशाल जनसमुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि आत्मशक्ति जागरण का सुगमतम साधन है मंत्र जप। मंत्र का निरन्तर जप करने से मस्तिष्क के सूक्ष्म प्रकोष्ठ खुलते है, जीभ पर अमृत का स्राव होता है, आभामण्डल तेजस्वी बनता है। उस निर्मल आभामण्डल के सामने राक्षसी प्रवृत्तियों का भी जोर नहीं चलता। आधि, व्याधि, उपाधि यानि शारीरिक, मानसिक व भावनात्मक बीमारियों को भी जप से दूर किया जा सकता है। साध्वीश्री जी ने आगे कहा भव-भव के बंधनों को तोड़ने वाला सर्वोत्कृष्ट मंत्र है नमस्कार महामंत्र। इस महामंत्र की आराधना प्रत्येक व्यक्ति को करनी चाहिए।

कार्यक्रम का शुभारम्भ "मन मंदिर में आओ तुम से जुड़ा है मन का तार " गोरेगांव महिला मंडल के मधुर गीत से हुआ।  जोगेश्वरी महिला मंडल ने "चौदह पूर्वो का सार है महामंत्र नवकार "गीत के माध्यम से नमस्कार महामंत्र की महत्ता बताई। साध्वी श्री शकुन्तला कुमारी जी, जागृत प्रभा जी, रक्षितयशा जी ने जप हर रोज करो गीत का संगान किया।
गोरेगांव सभा के अध्यक्ष चतर जी सिंघवी ने आभार ज्ञापन किया। संचालन मंत्री रमेश जी राठौड़ ने व स्वागत भाषण तेयुप जोगेश्वरी के अध्यक्ष महेंद्र जी कोठारी ने दिया। एमएलए कांदिवली के अतुल जी भातलकर  का स्वागत भारत जैन महामंडल के अध्यक्ष रमेश जी धाकड़, उपाध्यक्ष जगदीश जी उमरिया, तेयुप के अध्यक्ष कांदिवली दिनेश जी सिंघवी, मलाड अध्यक्ष भरत जी लोढ़ा व किशोर मण्डल के सभी कार्यकर्ताओं ने किया।
सिद्धि का द्वार -स्वाध्याय -साध्वी श्री सोमलता जी
कांदिवली: सावद्या प्रेमी आचार्य श्री महाश्रमणजी की विदुषी शिष्या  सोमलता जी के सानिध्य में कांदिवली राजभवन में स्वाध्याय दिवस का कार्यक्रम उत्साह पूर्वक मनाया गया। कार्यक्रम  सुभारम्भ साध्वी श्री रक्षितयशा जी के चिदानन्दा रूपणमो वित्त राग से हुआ। साध्वी श्री जागृतप्रभा जी ,साध्वी श्री संचितयशा जी ने अपने विचार रखें। साध्वी श्री शकुंतला कुमारी जी ने अनुप्रेक्षा का प्रयोग करवाकर स्वाध्याय की महत्वता बताई।

साध्वी श्री सोमलता जी ने ओजस्वी वाणी में श्रमण भगवान महावीर के पूर्वजन्मों का उल्लेख करते हुए बताया कि समता के सागर भगवान महावीर ने नयसार भव में सम्यक्त्व प्राप्त किया। सम्यक्त्व यानी सच्ची समझ को जिसने प्राप्त कर लिया। जिसने यह जान लिया कि संसार मायाजाल हैं। वह परिवार ,ऐश्वर्य का भोग करता हुआ भी उनमें आसक्त नहीं होता बल्कि अपने आप में रमण करता रहता है।
साध्वी श्री सोमलता जी ने स्वाध्याय शब्द को विश्लेषित करते हुए कहा कि स्वाध्याय सिद्धि का द्वार है। वह ज्ञान तिमिर को दूर करने के लिए दीप के सामना व विचार मंथन के लिए सीप के सामना है । साध्वी श्री जी ने यह भी कहा स्वाध्याय से मन प्रसन्न रहता है। आभामंडल पवित्र बनता है।
सांताक्रुज महिला मंडल ने स्वाध्याय पर गीत गाकर वातावरण को स्वाध्यायमय बना दिया। तेयुप सांताक्रुज के अध्यक्ष महेश कोठारी मंत्री कमलेश बम्ब ने अणुव्रतक अतिथियों का स्वागत व कृतज्ञता ज्ञापित की । कार्यक्रम का कुशल संचालन संजय चंडालिया ने किया । आपकी भाग्यलता के कार्यक्रम में किशोर मंडल का कार्यकर्ता कपिल जैन विजेता रहा । तेयुप कांदिवली के अध्यक्ष दिनेश सिंघवी व मलाड के अध्यक्ष भारत जी लोढ़ा की टीम जागरूकता से कार्यक्रमों की व्यवस्था कर रही है । सम्पूर्ण कार्यक्रम तुलसी महाप्रज्ञ फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित हो रहे हैं।

ध्यान जीवन का परम विज्ञान हैं – साध्वी श्री सोमलता
कांदिवली: संत शिरोमणि आचार्य श्री महाश्रमण जी की विदुषी शिष्या साध्वी श्री सोमलता जी के सानिध्य में पर्युषण पर्व का सातवां दिवस दो चरणों में आयोजित हुआ। प्रथम चरण में साध्वी श्री जी ने विचारों की निर्मलता और आचरण की पवित्रता के लिए ध्यान को जीवन अनिवार्य अंग बताते हुए कहा कि ध्यान विचार नहीं निर्विचार है, क्योंकि यह जीवन का परम विज्ञान है। साध्वी श्री जी ने यह भी कहा की ध्यान समग्रता से स्व का दर्शन है, स्वभाव का परिवर्तन है व व्यवहार का शोधन है। ध्यान से जीवन में नई स्फूर्ति ,नया आनंद व नया उल्लास प्राप्त होता है।  क्रोध ,ईर्ष्या ,घृणा आदि निषेधक भावों को प्रेम ,विन्रमता जैसे सकारात्मक भावों में रूपान्तरण कर देता है। 

साध्वी श्री शकुन्तला कुमारी जी ने अनुप्रेक्षा के प्रयोग करा के भीतरी संपदा प्राप्त करने की चाबी बताई। मलाड महिला मंडल ने मंगलाचरण किया, मुम्बई महिला मंडल की अध्यक्षा भारती सेठिया व मंत्री तरुणा बोहरा ने अपने विचार व्यक्त किए। आभार ज्ञापन अनिषा कोठारी स्वागत भाषण निर्मला कोठारी ,पुष्पा बोहरा ने दिया।  इस मौके पर तुलसी महाप्रज्ञ फाउंडेशन के अध्यक्ष माणक जी धींग ,तेयुप परिषद के अध्यक्ष भरत जी ,दिनेश जी,मंत्री हस्ति व विनोद जी तथा किशोर मंडल के प्रभारी कपिल चण्डालिया आदि भी उपस्थित थे।
कांदिवली में इंटेलीजेन्स टेस्ट का भव्य कार्यक्रम का आयोजित हुआ

कांदिवली: अध्यात्म के शिखर पुरुष आचार्य श्री महाश्रमण की विदुषी शिष्या साध्वी श्री सोमलता जी के सान्निध्य में पर्युषण महापर्व के चतुर्थ दिन रात्रिकालीन कार्यक्रमों में ज्ञानवर्धक एवं रोचक कार्यक्रम इंटेलीजेंसी टेस्ट का रहा। कार्यक्रम की महत्ता यह रही कि साध्वी श्रो सोमलता जी ने स्वयं इस कार्यक्रम को संचालित किया। प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय तीन राउंड रखे गए जिसमें प्रतियोगियों ने बड़े उत्साह से भाग लिया। एक राउंड में तीन प्रश्न तत्पश्चात दो – दो प्रश्न पूछे गए। युवती बहनें, वृद्ध बहन-भाइयों ने इस प्रतियोगिता में शामिल होकर ज्ञानवृद्धि की। कार्यक्रम का शुभारंभ श्रीमती विनीता सेठिया के मंगलाचरण से हुआ। लकी ड्रॉ एवं जीरो मिस्टेक प्रतियोगिता का पारितोसिक दिया गया। प्रतियोगिता में प्रथम स्थान श्रीमती सुमित्रा बैगानी व मिट्ठू देवी कोठारी ने प्राप्त किया। तेयुप पदाधिकारी एवं महिला मंडल ने पारितोषिक वितरित किया।
2000 भाई बहनों ने पौषध व्रत की आराधना की
कांदिवली तेरापंथ भवन में आठ दिनों तक अध्यात्म की गंगा बही। उसमें सैकड़ों भाई-बहिनों ने अभिस्नान कर मन को निर्मल बनाया। इन दिनों में साध्वी श्रीजी की अमृतमयी ओजस्वी वाणी में तीर्थंकरों की वाणी को सुनकर सब पुलकित हो उठे। रात्रिकालीन प्रतियोगिताओं के माध्यम से श्रावक समाज को तत्वज्ञान का बोध मिला। चंदनबाला का व्याख्यान मन को भाव विभोर करने वाला था।

पर्यूषण महापर्व का सर्वोत्कृष्ट संवत्सरी दिवस धूमधाम से मनाया गया। सात भाईयों की लाडली बहन संवत्सरी की सात दिनों तक जप, ध्यान, स्वाध्याय आदि से आवभगत की वैसे ही विदाई के समय व्रतके दीप प्रज्ज्वलित किए। वैसे ही सबने संवत्सरी को अपनी शक्ति के अनुसार मासखमण आदि तप का उपहार भेंट किया। 2000 भाई-बहनों ने पौषध व्रत की आराधना की।
इस मौके पर साध्वी श्री सोमलताजी ने अपने प्रभावशाली वक्तव्य में कहा – जैन धर्म का सर्वोत्कृष्ट पर्व है पर्युषण। यह आत्म जागरण का पर्व है। इस महापर्व का प्राण है – संवत्सरि प्रतिक्रमण। प्रतिक्रमण का फलित है क्षमापना। प्राणिमात्र के साथ मैत्री का संबंध स्थापित करना। आपने आगे कहा कि क्षमा के संदर्भ में तीन शब्द विमर्शनीय है। वीर, महावीर और परमवीर। वीर वह होता है जो क्षमा मांगने की पहल करते हुए प्रसन्नता की अनभूति करता है। महावीर वह है जो अपने प्रति अशिष्ट व्यवहार करने वाले को क्षमा मांगने ही नहीं देता। उससे पहले स्वयं ही क्षमा प्रदान कर देता है। परमवीर व्यक्ति अशोभनीय व्यवहार और अप्रिय वचनों को तुरंत विस्मृत कर उसके साथ मित्रता स्थापित करता है। साध्वीश्री जी ने जनवेदिनी को आह्वान करते हुए कहा कि – क्षमा दिवस पर सब यही मंगल कामना करें कि हम अपने मन में मैत्री के वटवृक्ष को विकसित करें। साध्वी शकुंतला कुमारीजी ने संघर्षों में भी हार न मानने वाली सोलह महासतियों का सरस शैली में चित्रण किया। साध्वी संचित यशाजी ने जैन धर्म के गौरव को बढ़ाने वाले प्रभावक आचार्यों का व साध्वी जागृत प्रभा जी ने प्रथम तीर्थंकर ऋषभ से लेकर तेईसवें तीर्थंकर पार्श्वनाथ के जीवन को सारपूर्ण रूप में साध्वी रक्षितयशाजी ने तेरापंथ आचार्यों के बारे में बताया।
क्षमापना दिवस पर साध्वी श्रीजी के सान्निध्य में नवीन परंपरा का सूत्रपात राजभवन में हुआ। सभी पदाधिकारी गण व वरिष्ठ श्रावकों ने एक साथ क्षमायाचना परिपत्र का वाचन कर चरित्रात्माओं और श्रावक समाज से क्षमायाचना की। उपासक शिविर सानंद संपन्न हुआ। इन दिनों के सभी कार्यक्रम तुवसी महाप्रज्ञ फाउंडेशन कांदिवली के तत्वावधान में उत्साहपूर्वक आयोजित हुए। तेयुप कांदिवली, मालाड के युवक परिषद के व किशोर मंडल के सदस्यों ने निष्ठापूर्वक कार्यक्रमों की व्यवस्था में योगदान दिया।

अभातेयुप जैन तेरापंथ न्यूज़ ब्यौरों से महावीर कोठारी

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