घर्म का मूल विनय

17.12.2015 छातापुर. अहिंसा यात्रा प्रणेता आचार्य श्री महाश्रमणजी के नेतृत्व में सद्भावना, नैतिकता और नशामुक्ति के संदेश को लेकर चल रही अहिंसा यात्रा आज सुबह महदीपुर से छातापुर पहुंची। रास्ते में हजारों श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री के दर्शन किये। स्कुल के बच्चों ने समस्त ग्रामवासियों ने पूज्य प्रवर का स्वागत किया। आचार्यश्री के आगमन से पूरे गांव में हर्षोल्लास का माहौल बन गया।

अहिंसा यात्रा के प्रणेता आचार्य श्री महाश्रमणजी ने अपने प्रातःकालीन उद्बोधन अर्हत वाड़ग्मय के सूत्र को उदघृत करते हुए फरमाया कि घर्म का मूल विनय है। जैसे वृक्ष का मूल होता है इसी प्रकार घर्म का भी मूल है और मूल विनय को बताया गया है। घर्म की अन्तिम निष्पत्ति मोक्ष है। विनय एक ऐसा तत्व है जिससे आदमी कीर्ति, श्रुत को पा लेता है। अहंकार आदमी के विकास में बाघक बनता है।

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