आत्म साक्षात्कर की सर्वोत्तम विद्या है - 'योग'शासन श्री साध्वी नगिना जी


शासन श्री साध्वी श्री नगीनाजी ने कहा योग आत्म साक्षात्कार की सर्वोत्तम विद्या है।शुप्त शक्तियों  के जागरण की प्रभावी प्रक्रिया है। बिखरे हुए चित्त की धारा को एक दिशा में मोड़ना योग को उद्देश्य है।शारीरिक,मानसिक एवं आध्यात्मिक स्वस्थता के लिए जीवन में  योग साधना अनिवार्य है। जीवन का इतिहास  कर्म से प्रारम्भ होता है।उसका उत्प्रेरक तत्व है स्थूल शरीर।शारीर ऊर्जा का केंद्र है। जीवन है वहाँ समस्याएं होती है उसका समाधान ह योग।
उपासक सुरेश ओसवाल ने योग प्रशिक्षण दिया। साध्वी पद्मावती जी , गवेषणा जी, मेरुप्रभा जी एवं मयंक प्रभाजी ने विशेष प्रयत्न किया। तेरापंथ युवक परिषद् के प्रयास से अच्छी संख्या म युवक-युवतियों ने कार्यक्रम में भाग लिया।प्रस्तुतिः महावीर कोठरी
संस्कार जागरण कार्यशाला : गोरेगांव
शासन श्री साध्वी नगिना श्री जी ने कहाँ - किशोर मण्डल देश कि निधी है।। उन पर भविष्य मे बहुत संभावनाएं है।। वे अपनी संस्कृति औऱ कुल परंपरा का चिन्तन किए बिना कोई भी कदम न उठाए। इसी जिंदगी से दो रास्ते निकलते है उत्थान औऱ पतन का । अतःअपनी शक्ति को व्यसन औऱ फैशन मे ना लगाकर भविष्य अंधकारमय न बनाये ।
तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष गोपाल सिंघवी एवं तेरापंथ सभाध्यक्ष अशोक सिंघवी ने विचार रखे । साध्वी श्री गवेषणाश्री जी मंयकप्रभा ने किशोरों को धर्म एवं अध्यात्म से जुडने पर विशेष बल दिया साध्वी श्री पदमावती एवं साध्वी श्री मेरूप्रभा ने भावपूर्ण गितिका प्रस्तुत कि । तेरापंथ युवक परिषद के प्रयत्न से बहुत अच्छी संख्या मे युवक युवतियों ने योग कार्यक्रम मे भाग लिया । प्रस्तुतिः महावीर कोठरी

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