जो आदमी पुरुषार्थ करता है वह जीवन में कुछ प्राप्त कर सकता है : आचार्य श्री महाश्रमण जी

08.07.2016 गुवाहाटी JTN जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्मसंघ के इतिहास पुरुष, अहिंसा यात्रा के प्रणेता, महातपस्वी और मानवता के मसीहा के रूप में जन-जन में समाहित आचार्यश्री महाश्रमण जी ने शुक्रवार को पूर्वोत्तर भारत के असम राज्य के प्रमुख शहर गुवाहाटी में अपनी अहिंसा यात्रा व धवल सेना के साथ ऐतिहासिक प्रवेश कर एक और इतिहास रच दिया।
9 माइल से सुबह निर्धारित समय के अनुसार करीब साढ़े पांच बजे आचार्यश्री महाश्रमणजी अपनी धवल सेना के साथ गुवाहाटी के लिए आचार्यप्रवर ने प्रस्थान किया।
चलते-फिरते तीर्थ व तीर्थंकर के प्रतिनिधि के चरणरज से पावन हो गई गुवाहाटी प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण असम का गुवाहाटी शहर जो अपनी प्राकृतिक सौंदर्य के लिए भी प्रसिद्ध है। महानद ब्रह्मपुत्र के किनारे बसे गुवाहाटी शहर लोग पूर्वोत्तर की राजधानी के रूप मंे भी जानते हैं। शुक्रवार के दिन गुवाहाटी को एक और प्रसिद्धि प्राप्त हो रही थी। वह प्रसिद्धि थी 09 नवंबर 2014 को भारत की राजधानी दिल्ली से निकली अहिंसा यात्रा व उसके प्रणेता, महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमण जी पुनीत आगमन। जिसके दर्शन मात्र से ही लोगों के शोक-संताप दूर होते हैं। जिसके वचनों के श्रवण के बाद लोगों का मानस परिवर्तन हो जाता है। वैसे मानवता के संप्रसारक, शांतिदूत, चलते-फिरते तीर्थस्थल आचार्यश्री महाश्रमण जी अपनी धवल सेना के साथ नगर में प्रवेश करने वाले थे। जैसे ही पावन चरणकमल गुवाहाटी नगर की सीमा में पड़े, अभिनन्दन को झुक गए शीश और जुड़ गए हजारों हाथ। सबकी प्रणत भावनाओं ज्वार को महासंत ने भी अपने हाथों को आशीर्वाद के देने को उठाए तो सभी के ऊपर आच्छादित हो गया आशीष का आवरण। 
तेरापंथ धर्मसंघ के इतिहास में पहली बार पूर्वोत्तर की धरती पर कदम रखने वाले धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता आचार्यश्री महाश्रमण जी के स्वागत के लिए जो भक्त वर्षों से प्रतीक्षा कर रहे थे। वह वक्त उनके सामने आ गया था। वर्ष 2011 केलवा चतुर्मास के दौरान गुवाहाटी में चतुर्मास फरमाने के बाद से ही अपने आराध्य देव का अपनी धरती पर आगमन को लेकर श्रद्धालुओं ने सपने संजोने लगे थे। उन सपनों को साकार रूप मिला शुक्रवार को, तो पूरे नगर में हर्षोल्लास का वातावरण छा गया। नगर भर में लगे बैनर व पोस्टर श्रद्धालुओं के घरों के प्रतीक चिन्ह बने हुए थे। जगह-जगह स्थाई झाकियां सजी थीं तो मोटरवाहनों पर भी कई झाकियां आचार्यप्रवर की अगवानी का इंतजार कर रही थी। जैसे ही आचार्यप्रवर नगर के जीएस रोड पहुंचे, वहां हजारों लोगों संग गुवाहाटी पूर्व के विधायक श्री सिद्धार्थ भट्टाचार्य ने आचार्यप्रवर का भव्य स्वागत किया। वहीं से आरंभ हो गया विशाल जुलूस व झाकियों का क्रम। धर्मसंघ की विभिन्न शाखाओं के महिला पुरुष सदस्यों की कतारबद्ध थे तो ज्ञानशाला के विद्यार्थी भी अपनी उल्लासमय उपस्थिति लिए हुए थे। वहीं जैन समाज के अलावा अन्य धर्म और समाज के लोग भी इस महातपस्वी के अभिनन्दन को पलक पांवड़े बिछाए खड़े थे। विभिन्न झाकियों और विशाल जुलूस के जयघोष से पूरा नगर गूंजायमान हो रहा था। जीएस रोड ने निकला जुलूस नगर के कई क्षेत्रों से होता हुआ लगभग साढ़े नौ बजे फैन्सी बाजार गेट नंबर चार स्थित तेरापंथ भवन पहुंचे। जहां आचार्यप्रवर का पावन प्रवास हुआ।
दिगम्बर जैन समाज के महावीर स्थल में बने भव्य प्रवचन पंडाल में अपने वचनामृत का पान करने के लिए उमड़े श्रद्धालुओं की प्यास बुझाते हुए आचार्यप्रवर ने अपने मंगल उद्बोधन में मानव जीवन में पुरुषार्थ का महत्व बताया। आचार्यप्रवर ने कहा कि जो भाग्य के भरोसे बैठ जाए वह अभागा होता है। जो आदमी पुरुषार्थ करता है वह जीवन में कुछ प्राप्त कर सकता है। पुरुषार्थ करने वाले का लक्ष्मी वरण करती है। आदमी अपने जीवन में विवेकपूर्ण पुरुषार्थ कर अपने जीवन को सफल बना सकता है। आचार्यप्रवर ने आचार्य तुलसी व आचार्य महाप्रज्ञ जी के जीवन में किए गए पुरुषार्थों का वर्णन करते हुए कहा कि ऐसे महापुरुषों से प्रेरणा प्राप्त कर या स्वयं की स्फुरणा से आदमी सम्यक पुरुषार्थ कर जीवन को सफल बनाने का प्रयास करे।
आचार्यश्री ने प्रसंगवश कहा कि हमारे साधु-साध्वियों ने भी कितना पुरुषार्थ किया। कहां राजस्थान और अब कहां भारत का पूर्वोत्तर क्षेत्र असम। हजारों किलोमीटर की पदयात्रा का पुरुषार्थ कर हमारे साधु-साध्वियां भी आज गुवाहाटी में पहुंच गए हैं। आदमी यदि अपने जीवन में विवेकपूर्ण पुरुषार्थ करने तो वह अपने जीवन को सुफल बना सकता है।
अपने आराध्य का वर्षों से अपने घर-आंगन में आगमन की राह देख रहे श्रद्धालुओं की आंखे आज अपने आराध्य का दर्शन पाकर हर्ष के आंसुओं से सजल थीं। भावनाओं का ज्वार अपने चरम पर था। सबके चेहरे पर दर्शन का संतोष तो भावनाओं की अभिव्यक्ति देकर मंगल प्राप्त का आनंद मुखर था। आचार्यश्री का स्वागत करने का प्रथम अवसर प्राप्त हुआ गुवाहाटी तेरापंथ महिला मंडल व कन्या मंडल को। दोनों ने संयुक्त से रूप मंगलाचरण का संगान कर आचार्यप्रवर का स्वागत किया। इसके उपरान्त गुवाहाटी जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा के अध्यक्ष श्री सुनील कुमार सेठिया, महिला मंडल अध्यक्षा श्रीमती रंजू बरड़िया, तेरापंथ युवक परिषद अध्यक्ष श्री बजरंग सुराणा, तेरापंथ प्रोफेनशल फोरम के अध्यक्ष श्री तारकेश्वर संचेती, अणुव्रत समिति गुवाहाटी के अध्यक्ष श्री निर्मल श्यामसुखा, आचार्य तुलसी महाश्रमण रिसर्च फाउण्डेशन अध्यक्ष श्री रणजीत मालू, आचार्य महाश्रमण चतुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति के मंत्री श्री सुपारसमल बैद व कन्यामंडल संयोजिका सुश्री दिव्या दस्साणी ने अपनी भावनाओं की अभिव्यक्ति दी और आचार्यप्रवर से पावन आशीर्वाद प्राप्त किया। ज्ञानशाला के बच्चों ने भी अपने आराध्य देव के चरणों में भावपूर्ण प्रस्तुति दी।
गुवाहाटी पूर्व से भाजपा के विधायक श्री सिद्धार्थ भट्टाचार्य ने आचार्यप्रवर का दर्शन कर आशीष प्राप्त और अपनी भावनाओं की अभिव्यक्ति देते हुए कहा कि धन्य भाग्य हमारे जो आप जैसे महासंत हमारे क्षेत्र में पधारे। आपके दर्शन व प्रवचन से जो मानसिक सुख की अनुभूति हुई है वह शब्दों में बयां नहीं कर सकता। आपके आगमन व सान्निध्य से गुवाहाटीवासियों को शांति की प्राप्ति हो सकेगी, ऐसी मैं कामना करता हूँ।
हमारी धरती बन गई धर्मस्थल
दिगम्बर जैन पंचायत के अध्यक्ष श्री महावीर जैन ने आचार्यप्रवर का स्वागत करते हुए कहा कि आपके आगमन से गुवाहाटी नगर धर्मस्थल बन गया है। आपके आगमन से ही पूरे नगर सद्भावना का विस्तार सा हो गया है। जैन समाज के पांचों संप्रदायों को एकजुट होने का आशीष आचार्यप्रवर से मांगा और आचार्यप्रवर से जैन मंदिर पधारने का आग्रह किया तो उदारमना आचार्यप्रवर ने तत्काल मंच से कहा कि आप जब चाहें हम मंदिर आने को तैयार हैं। ऐसी कृपा पाकर एक पूरा प्रवचन स्थल ओम अर्हम की ध्वनि से गूंज उठा।

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