अभातेयुप के 50 वें अधिवेशन का द्वितीय दिवस


युवक सकारात्मक रहे : मुनि श्री योगेशकुमार
प्रथम सत्र : अधिवेशन के द्वितीय दिवस का आगाज मुनि श्री योगेशकुमारजी के मंगल उद्बोधन के साथ हुआ. मुनि श्री ने युवाओं को विधायक एवं सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा दी. गुरु इंगित की आराधना युवाओं के लिए सर्वोपरि है.
हर हाथ में काम और मन पर रहे लगाम : पूज्यप्रवर
मुख्य प्रवचन में आचार्यश्री महाश्रमणजी ने युवाओं को प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि जीवन में युवकत्त्व की अवस्था कार्यकारी अवस्था होती है। बुढ़ापे और बचपन के बीच की स्थिति की इस अवस्था में परिपक्वता, बलवता और सक्षमता जो होती है, वह किसी अन्य अवस्था में नहीं होती। इस अवस्था में किए गए कार्य क्रांतिकारी परिवर्तन लाने में सक्षम हो सकते हैं। पूज्यप्रवर ने ‘हर हाथ में काम और मन पर रहे लगाम’ सूक्ति वाक्य प्रदान करते हुए कहा कि आदमी को हमेशा कार्य करते रहने का प्रयास करना चाहिए।
अभातेयुप उपाध्यक्ष श्री राजेश जम्मड़ ने कहा कि पूज्यप्रवर के आशीर्वाद से युवाओं में ऐसी ऊर्जा का संचार हुआ है कि वह किसी भी कार्य को सम्पन्न करने में सक्षम महसूस कर रही है। उन्होंने संगठन के अनेक कार्यों की जानकारी श्रीचरणों में निवेदित की. अभातेयुप महामंत्री श्री विमल कटारिया ने कहा कि पूज्यप्रवर के इंगित की आराधना के लिए यह संगठन निरंतर तत्पर है। आप द्वारा सामायिक किए जाने की प्रेरणा से अभिप्रेरित युवाओं ने विगत एक सितम्बर को पूरे देश में एक साथ तीन घंटे के भीतर एक लाख से अधिक सामायिक का सफल आयोजन कराकर आध्यात्मिक कीर्तिमान स्थापित करने का प्रयास किया। आपसे युवाओं को प्रेरणा प्राप्त होती रहे और संगठन पूरी निष्ठा, समर्पण और संकल्प के साथ आपकी आराधना और निर्देशों को पूर्ण करने को तत्पर बना रहे।
युवाशक्ति के लोगों ने ‘शासन सेवा करते जाएं’ गीत का संगान भी किया। साथ ही पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं की बनी टेलीफोन डायरेक्ट्री को आचार्यश्री के चरणों में अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
अभातेयुप के पूर्व पदाधिकारियों ने किया युवकों को संबोधित
द्वितीय सत्र का शुभारंभ सहमंत्री-1 श्री पंकज डागा के जोशीले गीत के साथ हुआ. अभातेयुप पूर्व अध्यक्ष श्री रतन दुगड़ ने अपने वक्तव्य में अभातेयुप को बहुआयामी व्यक्तित्व निर्माण का कारखाना एवं कार्यकर्ता निर्यात करने वाली संस्था बताया. अभातेयुप के पूर्व अध्यक्ष श्री गौतम डागा ने युवाओं को त्याग-प्रत्याखान का क्रम बनाने एवं जैन तत्वज्ञान सीखने की प्रेरणा दी. अभातेयुप के पूर्व संगठन मंत्री श्री राजेश सुराणा ने अपनी बात रखते हुए कहा कि अब समय है कि हम हमारे कदम और द्रुत गति से आगे बढ़ाएं. हमारी युवा शक्ति जोश-जज्बे से लबरेज है, हमारे पास संसाधन भी है. हम पुरे विश्व में तेरापंथ धर्मसंघ की ख्याति बढाने में आगे बढे. अभातेयुप पूर्व अध्यक्ष श्री संजय खटेड ने अपने वक्तव्य में अभातेयुप के महत्वपूर्ण उपक्रमों ATDC एवं MBDD की सफलता का उल्लेख किया एवं व्यसनमुक्त अथवा पदमुक्त सूक्त पर जोर दिया. अभातेयुप पूर्व महामंत्री श्री प्रफुल्ल बेताला ने बताया कि उनकी विकास यात्रा अभातेयुप से शुरू हुई एवं अभातेयुप का प्रत्येक कार्यकर्ता के निर्माण में अहर्निश योगदान है.
श्री धर्मेन्द्र डाकलिया एवं श्री सुनील दुगड़ ने जैन संस्कार विधि, श्री राजेश चावत एवं श्री राजेन्द्र मुथा ने जैन विद्या कार्यशाला, श्री नवीन बैंगनी एवं श्री अपूर्व मोदी ने अभिनव सामयिक, श्री प्रवीण बेताला एवं श्री अर्पित नाहर ने विश्व पर्यावरण दिवस आयोजन, श्री अभिषेक पोखरना एवं श्री मुकेश भटेवरा ने बारह व्रत कार्यशाला, श्री श्रेयांस कोठारी एवं श्री अरुण सेठिया ने किशोर मंडल की गति-प्रगति के बारे में क्रमश: अपनी प्रस्तुतियां दी.
मन में हो जज्बा तो हर कार्य संभव – श्री राजेन्द्र लूंकड़
मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित भारतीय जैन संघटना के राष्ट्रीय सचिव श्री राजेन्द्र लूंकड़ ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि- मन में जज्बा हो तो हर कार्य संभव है. हमारा नजरिया बदलेगा तो नजारे भी बदलेंगें. जो हुआ अच्छा हुआ के सूत्र को अपनाएंगे तो सुखी बनेगें. उन्होंने युवाओं के समुचित प्रशिक्षण पर भी जोर दिया. युवकों को सामायिक, स्वाध्याय की प्रेरणा भी दी. दहेज़ उत्पीडन, पारिवारिक बिखराव जैसी समस्याओं के समाधान में युवाओं की भूमिका पर बल दिया. इससे पूर्व श्री अभिनंदन नाहटा ने अतिथि परिचय प्रस्तुत किया. संचालन सहमंत्री-1 श्री पंकज डागा ने किया.
तृतीय सत्र में MBDD, व्यक्तित्व विकास कार्यशाला, सरगम, कार्यकर्ता प्रशिक्षण कार्यशाला, किशोर मंडल अधिवेशन  अभिनव सामायिक, युवावाहिनी आदि आयोजित करने वाली परिषदों एवं क्रमशः उनके केन्द्रीय संयोजकों, नवोदित परिषदों आदि को सम्मानित किया गया.
सामूहिक सामयिक की आराधना
चतुर्थ सत्र में युवकों ने सामूहिक सामायिक की आराधना की. उपासक श्री सूर्यप्रकाश श्यामसुखा ने अहिंसा, संयम, तप रूपी धर्म की व्याख्या की एवं लौकिक एवं लोकोत्तर धर्म का अंतर भी बताया. उन्होंने संवर और निर्जरा के बारे में बताते हुए कहा कि सामायिक से संवर और निर्जरा दोनों होते है. उन्होंने युवकों को सम्यक्त्व की परिभाषा, उसके व्यवाहरिक लक्षण, भूषण एवं दूषण के बारे में बताया. श्री मनीष पगारिया ने सामायिक गीत का संगान किया.
साधारण सदन की बैठक
विजय गीत के सामूहिक संगान एवं सदन की अध्यक्षता कर रहे उपाध्यक्ष-1 श्री राजेश जम्मड द्वारा श्रावक निष्ठा पत्र के वाचन के साथ साधारण सदन की बैठक शुरू हुई. महामंत्री श्री विमल कटारिया ने वर्ष २०१५-१६ का प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया एवं कोषाध्यक्ष श्री नवीन वागरेचा ने वित्तीय वर्ष २०१५-१६ का अंकेक्षित आय-व्यय का बयौरा प्रस्तुत किया जिसे सदन ने पारित किया. वित्तीय वर्ष २०१६-१७ हेतु अंकेक्षक की नियुक्ति की गयी. मन की बात में उपस्थित परिषदों ने अपने-अपने सुझाव, जिज्ञासा, शिकायत रखे जिसे महामंत्री श्री विमल कटारिया द्वारा समाहित किया गया.
सेवा, संस्कार, संगठन में संख्या की दृष्टि से विभिन्न श्रेणियों में शाखा परिषदों को सम्मानित किया गया.

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