नैतिकता की देवी की करे स्थापना : आचार्यश्री महाश्रमण

-अहिंसा यात्रा का बीलासिपाडा में भव्य प्रवेश, दो दिवसीय प्रवास के प्रथम दिन बहती ज्ञानगंगा में श्रद्धालुओं ने लगाये गोते-

आचार्यश्री महाश्रमणजी

          24 दिसम्बर 2016, बीलासीपाड़ा, धुबड़ी (असम) : असम की धरा को अपने चरणरज से पावन बनाने, जन-जन के हृदय में मानवता का संचार करने को अहिंसा यात्रा लेकर जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशम् अनुशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, मानवता के मसीहा, शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी अपनी धवल सेना के साथ शनिवार को धुबड़ी जिले के बिलासीपाड़ा नगर में पहुंचे। जहां स्थानीय विधायक श्री अशोक सिंघी सहित विशाल जनसमूह ने आचार्यश्री व उनकी धवल सेना का स्वागत-अभिनन्दन किया। यह विशाल जनसमूह स्वागत जुलूस के रूप में आचार्यश्री के साथ तेरापंथ भवन पहुंचे। यहां आचार्यश्री का दो दिवसीय प्रवास होगा। तेरापंथ भवन के दूसरी ओर बने प्रवचन पंडाल में उपस्थित श्रद्धालुओं पर महातपस्वी आचार्यश्री ने अमृतवाणी की वृष्टि की और उन्हें शुभाशीष प्रदान किया। वहीं अपनी धरा पर अपने आराध्य पाकर अभिभूत श्रद्धालुओं ने भी अपनी भावनाओं की पुष्पांजलि आचार्यश्री के चरणों में समर्पित की। 
शनिवार को प्रातः आचार्यश्री अपनी धवल सेना के साथ टीलापाड़ा से बिलासीपाड़ा की ओर विहार किया। लगभग तेरह किलोमीटर के विहार के दौरान मार्ग में ईंट-भट्ठों की अधिकता इस क्षेत्र में होने वाले ईंट व्यवसाय की व्यापकता को प्रदर्शित कर रही थी। वहीं खेतों में लहलहाती सरसों की फसल भी इस क्षेत्र में अपनी विशेष उत्पादकता के द्योतक बनी हुई थी। लगभग तेरह किलोमीटर का विहार कर आचार्यश्री अपनी धवल सेना के साथ जैसे ही नगर के समीप पहुंचे, वर्षों से अपने आराध्य देव के पदार्पण को तरस रहे श्रद्धालुओं सहित इस गौरवशाली अहिंसा यात्रा और उसके प्रणेता के दर्शन को अन्य जैनेतर समाज के हजारों लोग उपस्थित थे। इसके साथ तेरापंथी सभा, महिला मंडल, कन्या मंडल और ज्ञानशाला के ज्ञानार्थियों और विभिन्न स्कूलों के विद्यार्थी भी महासंत के दर्शन और स्वागत को उपस्थित थे। 
          इसके साथ ही क्या बंगाली, क्या मुस्लिम, क्या हिन्दू, क्या बच्चे और क्या महिलाएं। सभी अपने-अपने परिधान में शांतिदूत के स्वागत को पलक पांवड़े बिछाए हुए थे। आचार्यश्री के नगर सीमा में प्रवेश करते ही गगनभेदी जयकारों से पूरा वातावरण गूंजायमान हो उठा। वहीं से विशाल जनसमूह कतारबद्ध होकर जुलूस के रूप में महासंत की अगवानी करती हुई चल पड़ा। आचार्यश्री सभी पर आशीष की वृष्टि करते और अपने दर्शन से सबके नयनों की प्यास बुझाते नगर स्थित तेरापंथ भवन पहुंचे। 
भवन के दूसरी ओर बने प्रवचन पंडाल में उपस्थित श्रद्धालुओं को आचार्यश्री ने अहिंसा यात्रा और उसके तीन महान उद्देश्यों की अवगति प्रदान करते हुए कहा कि नौ नवम्बर 2014 को दिल्ली से अहिंसा यात्रा का प्रारम्भ किया था। भारत के विभिन्न राज्यों के साथ नेपाल और भूटान की यात्रा के उपरान्त अभी असम भ्रमण कर रहे हैं। इसके अंतर्गत हम लोगो को तीन बातों को बताई जा रही हैं-सद्भावना, नैतिकता और नशामुक्ति। देश में विभिन्न जातियां, धर्म, संप्रदाय और राजनैतिक दल के लोग रहते हैं। सभी लोग में आपस में मैत्री भाव रखें। आपस में सद्भावना रखने का प्रयास करना चाहिए। आदमी किसी भी क्षेत्र में कोई भी कार्य करे, उसमें ईमानदारी रखने का प्रयास करना चाहिए। आचार्यश्री ने कहा कि बिलासीपाड़ा में हम लोग आए हैं। यहां के बाजारों और दुकानों में किसी देवी-देवता की फोटो भी हो सकती है। यहां के लोग अपने दुकानों में किसी देवी-देवता की फोटो रखें या न रखें, किन्तु नैतिकता की देवी को यथासंभव स्थापित करें। यह देवी की प्रतिमा कागज या किसी धातु की नहीं बल्कि ग्राहक और दुकानदार के व्यवहार में स्थापित होनी चाहिए। 
आचार्यश्री ने लोगों को उत्प्रेरित करते हुए कहा कि सच्चाई का रास्ता कठिन होता है, लेकिन उसकी मंजिल अच्छी होती है। कुछ लोग सच्चाई के मार्ग पर चलने का साहस नहीं जुटा पाते हैं। कुछ लोग कठिनाई के डर से अच्छे कार्यों का शुभारम्भ ही नहीं कर पाते हैं, ऐसे लोग निम्न श्रेणी के होते हैं। कुछ लोग हिम्मत कर कार्य आरम्भ तो करते हैं लेकिन कठिनाइयों से डर कर बीच में ही छोड़ देते हैं, वे लोग मध्यम श्रेणी के होते हैं। दुनिया में कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो बार-बार विघ्न-बाधा आने के बाद भी अपने कार्यों को संपन्न करते हैं वे उत्तम श्रेणी के होते हैं। आदमी को जीवन में भयभीत नहीं होना चाहिए। भयभीत होना भी पाप होता है। डरा हुआ आदमी झूठ बोल सकता है, पाप कर सकता है। आदमी को अपने भीतर साहस और अभय का भाव विकसित करने का प्रयास करना चाहिए। आदमी को नशामुक्त जीवन जीने का प्रयास करना चाहिए। जिस व्यक्ति के जीवन में अहिंसा यात्रा के तीनों संकल्पों का प्रादुर्भाव हो जाता है, वह अपनी आत्मा का कल्याण कर सकता है। 
आचार्यश्री ने बिलासीपाड़ावासियों पर अपनी आशीषवृष्टि करते हुए कहा कि यहां के लोगों में सद्भावना और नैतिकता का विकास हो, नशामुक्ति की चेतना जागृत हो, आध्यात्मिक भावना प्रबल हो, लोगों के जीवन में शांति रहे, मंगलकामना। 
आचार्यश्री के आह्वान पर प्रवचन पंडाल में उपस्थित समस्त श्रद्धालुओं ने एक साथ अहिंसा यात्रा के तीन संकल्प सद्भावपूर्ण व्यवहार करने, यथासंभव ईमानदारी का पालन करने व पूर्णतया नशामुक्त जीवन जीने का संकल्प स्वीकार किया। 
आचार्यश्री की ज्ञानगंगा में अभिस्नात और आशीष से आह्लादित श्रद्धालुओं को धर्मसंघ की असाधारण साध्वीप्रमुखाजी ने ममतामयी प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि जिस गांव, नगर या कस्बे में संतों का आगमन होता है, वह अमरपुरी बन जाता है। तेरापंथ के किसी आचार्य का बिलासीपाड़ा में यह प्रथम आगमन है। आचार्यप्रवर के आगमन से बिलासीपाड़ा स्वर्ग बन गया है। यह आप सभी को दुर्लभ समय मिला है, इसका लाभ उठाएं और अपने जीवन को मनुष्यता के शिखर तक ले जाने का प्रयास करें। इसके उपरान्त मुख्यनियोजिकाजी ने भी श्रद्धालुओं को अपने संबोधन से उत्प्रेरित किया। समणी जगतप्रज्ञाजी ने अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त किया। 
इसके उपरान्त बिलासीपाड़ा महिला मंडल और कन्या मंडल ने स्वागत गीत का संगान किया। तेरपंथी सभा और युवक परिषद के सदस्यों ने भी गीत के माध्यम से अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त किया। बिलासीपाड़ा सभा के अध्यक्ष और स्थानीय विधायक श्री अशोक सिंघी ने आचार्यश्री का अभिनन्दन करते हुए कहा कि आज बिलासीपाड़ा में स्वर्णिम सूर्योदय हुआ है। मैं अपनी इस धरा पर अपने आराध्य देव आचार्यश्री का अभिनन्दन करता हूं। आपके आगमन से यह धरती पावन बन गई। एक प्रतिनिधि होने के साथ क्षेत्र की समस्त जनता का विकास कर सकूं, सबको साथ लेकर चल सकूं, सबका विकास के लिए प्रयास करता रहूं, ऐसा आशीर्वाद आपसे चाहता हूं। आचार्यश्री महाश्रमण प्रवास व्यवस्था समिति के संयोजक श्री नरेन्द्र सेठिया, महिला मंडल अध्यक्ष श्रीमती सुमित्रा सेठिया, युवक परिषद के मंत्री श्री सुभाष बैद और श्री अमरचंरदजी ने भी आचार्यश्री के चरणों में अपनी भावनाओं के श्रद्धासुमन अर्पित किए और आशीर्वाद प्राप्त किया। 
स्थानकवासी साधुमार्गी जैन संघ के अध्यक्ष श्री भंवरलाल लुणावत ने आचार्यश्री का स्वागत करते हुए कहा कि एक साथ इतने संतों का दर्शन कर बिलासीपाड़ा का हर समाज अपने आपको धन्य महसूस कर रहा है। आपश्री के दर्शन और स्वागत कर हमारा जीवन धन्य हो गया है। अग्रवाल समाज के श्री गोविन्द अग्रवाल ने सनातन समाज की ओर से आचार्यश्री का स्वागत-अभिन्दन करते हुए कहा कि आपके चरणरज से यह धरती पावन हो गई है। 
बिलासीपाड़ा जामा मस्जिद के प्रतिनिधि श्री अब्दुल मजीद ने अपनी भावना को व्यक्त करते हुए कहा कि इतनी अच्छी धर्मसभा मैंने आज तक नहीं देखी थी। जिसमें सर्वधर्म समभाव की बात की जाती है। आप जैसे संत जो लोगों को इंसानियत की शिक्षा दे रहे हैं तो हम बताना चाहेंगे कि बिलासीपाड़ा में अहिंसा व्याप्त है तो आप ऐसा आशीर्वाद दें कि यह अहिंसा वर्षों तक लोगों के दिलों में बनी रहे। सभी धर्म के लोगों को प्रेरित करते हुए कहा कि सभी वर्ग और धर्म के लोग आचार्यश्री से प्रेरणा लेकर इंसान बनने का प्रयास करें।



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