धर्म से बड़ा कोई मंगल नहीं होता : आचार्य श्री महाश्रमण

-तेरापंथ धर्मसंघ के महासूर्य की सन्निधि में अद्भुत नूतनवर्षाभिनन्दन समारोह-

आचार्यश्री महाश्रमणजी

          01 जनवरी 2017, गौरीपुर (असम) (JTN), तेरापंथ धर्मसंघ के महासूर्य के नववर्ष में प्रथम दर्शन को धुबड़ी जिला मुख्यालय स्थित शंकरदेव शिशु उद्यान (चिल्ड्रेन पार्क) में विशाल जनमेदिनी उमड़ पड़ी। उगते सूर्य की प्रशस्त रश्मियों के साथ आकाश में बढ़ते सूर्य की भांति अपनी धवल रश्मियों के साथ तेरापंथ के महासूर्य आचार्यश्री महाश्रमण भी जब मंचस्थ हुए तो मानों श्रद्धालुओं के अंतरंग भावों को ज्योतित कर दिया। जयघोष से पूरा वातावरण मंगल हो गया, फिर ऐसी मंगल बेला में अपने आपमें मंगल की प्रतिमूर्ति आचार्यश्री महाश्रमणजी ने नववर्ष का प्रथम मंगलपाठ श्रद्धालुओं को सुनाया तो वहीं नए वर्ष में श्रद्धालुओं को कुछ संकल्प करा उनके जीवन को भी मंगलमय बनाने का प्रयास किया। मंगलपाठ के उपरान्त आकाश में लक्ष्य की ओर अग्रसर रवि की भांति तेरापंथ के प्रणेता अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर थे। धुबड़ी जिला मुख्यालय पर त्रिदिवसीय प्रवास सम्पन्न कर रविवार को लगभग 10 किलोमीटर का विहार कर आचार्यश्री गौरीपुर पधारे। जहां पीसी इन्स्टीट्यूशन स्कूल में बने प्रवचन पंडाल में उपस्थित श्रद्धालुओं को सबसे उत्कृष्ट मंगल धर्म का बोध प्रदान कर समस्त प्राणियों के लिए नववर्ष मंगलमय होने की कामना की। 
  पूर्व निर्धारित समयानुसार लगभग छह बजे आचार्यश्री अपनी धवल सेना के साथ मंच पर ऐसे उपस्थित हुए मानों सूर्य अपनी रश्मियों के साथ आगमन कर रहा हो। गुरुमुख के दर्शन होते ही पूरा वातावरण मंगल जयघोष से गुंजायमान हो गया। आचार्यश्री ने विशेष वृहद मंगलपाठ सुनाया और श्रद्धालुओं को नववर्ष का प्रथम पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि सन् 2016 विदा ले चुका है और सन् 2017 का प्रारम्भ हुआ है। नए वर्ष का प्रारम्भ आदमी के जीवन में अध्यात्म की दृष्टि से अच्छा रहे। इसके लिए आदमी के भीतर कोई अच्छा संकल्प आ जाए तो उस संकल्प का बल वर्ष को अच्छा बनाने में विशिष्ट सहयोगी बन सकता है। एक अच्छा संकल्प आत्मोत्थान की दिशा में आगे बढ़ाने वाला पाथेय बन सकता है। आचार्यश्री ने श्रद्धालुओं पर कृपा बरसाते हुए उन्हें सामायिक करने और इस वर्ष अपशब्दों का प्रयोग न करने का संकल्प कराते हुए कहा कि शनिवार को सायं सात से आठ बजे के बीच सामायिक हो तो जीवन में आध्यात्मिकता का अच्छा विकास हो सकता है। प्रत्येक महीने में चार या पांच शनिवार आते हैं। आदमी से यदि पांचों शनिवार सामायिक न हो सके तो महीने के कम से कम दो शनिवार को तो सामायिक करने का प्रयास किया ही जा सकता है। यदि किसी विशेष परिस्थिति में यह क्रम भी टूट जाए तो इसके बदले किसी भी दिन सात सामायिक दो महीने के भीतर कर इसे पूरा किया जा सकता है। आचार्यश्री ने इसका संकल्प भी स्वीकार कराया। इसके उपरान्त आचार्यश्री ने श्रद्धालुओं को इस वर्ष अपशब्दों का प्रयोग न करने का भी संकल्प कराया और कभी अपशब्द निकले तो उसके अगले दिन नमक का करने का भी संकल्प कराया। आचार्यश्री की इस कृपा से श्रद्धालु अभिभूत थे। आचार्यश्री ने कहा कि सभी के लिए वर्ष 2017 खूब अच्छा रहे, अध्यात्ममय रहे, लोग चित्त समाधि में रहें। आचार्यश्री की प्रेरणा के बाद तेरापंथ धर्मसंघ की असाधारण साध्वीप्रमुखाजी ने श्रद्धालुओं पर अपनी ममतामयी वाणी से अभिसिन्चन प्रदान करते हुए कहा कि आज 2017 का सूर्योदय हुआ है और आपसभी ने आचार्यश्री के मुखारविन्द से पावन पाथेय प्राप्त किया है। आचार्यश्री ने जो कठोर शब्द न कहने का संकल्प कराया है, वह एक विशेष साधना है। इसका पालन कर अपने जीवन को सफल बनाने का प्रयास करें। साध्वीप्रमुखाजी ने अंत मंे नूतन वर्ष पर लिखी अपनी कविता का पाठ किया। 
धुबड़ी में प्रथम मंगलपाठ कर आचार्यश्री एकबार पुनः गौरीपुर के पीसी इन्स्टीट्यूशन स्कूल प्रांगण में पहुंचे और वहां उपस्थित श्रद्धालुओं को वर्ष 2017 के प्रथम मंगल प्रवचन प्रदान करते हुए कहा कि आदमी अपने जीवन में मंगल की कामना करता है और दूसरों के मंगल की कामना भी जा जाती है। उसके लिए प्रयास भी किया जाता है। जीवन में मंगल रहे, इसके लिए शुभ मुहूर्त का निर्धारण किया जाता है तो कुछ पदार्थों और मंत्रों का प्रयोग भी मंगल के लिए किया जाता है। आदमी का जीवन का उत्कृष्ट मंगल धर्म को माना गया है। धर्म से बड़ा कोई मंगल नहीं होता। धर्म के तीन प्रकार होते हैं-अहिंसा, संयम और तप। आदमी अपने जीवन में अहिंसा रूपी धर्म को अपनाने का प्रयास करना चाहिए। सभी प्राणियों के प्रति मैत्रीभाव रखने का प्रयास करना चाहिए। आदमी को अपने इन्द्रिय, मन और वचन को भी संयमित बना मंगल धर्म की प्रभावना को बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए। आदमी को जीवन में साधना और तपस्या करने का प्रयास करना चाहिए। आचार्यश्री ने नववर्ष की प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि वर्ष 2016 हम सभी से दूर हो गया और वर्ष 2017 ने हम सभी के साथ रहना आरम्भ कर दिया है। आदमी को अपने इस नए साल के समय न गंवाते हुए पूर्ण उपयोग करने का प्रयास करना चाहिए। सन् 2017 सभी के लिए अच्छा, धर्म, अध्यात्म और नैतिकता जीवन में बनी रहे, मंगलकामना। 
गौरीपुरवासियों पर विशेष कृपा बरसाते हुए वर्ष प्रथम दिन ही सभी को अपने श्रीमुख से सम्यक्त्व दीक्षा (प्रदान) कर उन्हें जीवन भर देव, गुरु और धर्म के प्रति संपूर्ण श्रद्धा समर्पित करने का संकल्प कराया और मंगल पाथेय भी प्रदान किया। इसके पूर्व आचार्यश्री की मंगलवाणी से पूर्व साध्वीप्रमुखाजी ने श्रद्धालुओं संयम को ही जीवन बताते हुए कहा कि इस नववर्ष के अवसर पर श्रद्धालु अपने जीवन में संयम लाने का संकल्प करें और जितना संभव हो सके अपने जीवन को सुफल बनाने का प्रयास करें। आचार्यश्री की मंगलवाणी के उपरान्त मुख्यनियोजिकाजी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को उत्प्रेरित किया और उन्हें सकारात्मक सोच रखने की प्रेरणा प्रदान की। 
अंत में प्रेक्षा इन्टरनेशल जैन विश्वभारती द्वारा वर्ष 2017 का कैलेण्डर और कोलकाता की ओर से नववर्ष का कैलेंडर आचार्यश्री के चरणों में समर्पित किया गया। गौरीपुर कन्या मंडल और महिला मंडल ने सामूहिक रूप में मंगल गीत का संगान किया। तेरापंथी सभा गौरीपुर के अध्यक्ष श्री विजयसिंह चोरड़िया ने अपनी धरा पर नववर्ष की बेला में पहुंचे आचार्यश्री के समक्ष अपने भावों के श्रद्धासुमन अर्पित किए और आचार्यश्री से शुभाशीष प्राप्त किया। कार्यकम का कुशल संचालन मुनि दिनेश कुमार जी ने किया। 




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