मुंबई में जैन तेरापंथी भगवती दीक्षा का हुआ भव्य आयोजन : मुमुक्षु धर्मेन्द्र कुमार बने मुनि धैर्य कुमार

















तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशम अनुशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण जी के आदेशानुसार मुनि संजय कुमारजी, मुनि प्रसन्न कुमारजी, मुनि प्रकाश कुमारजी, साध्वी अणिमा श्रीजी, साध्वी निर्वाणश्रीजी आदि साधू-साध्वी वृन्द के मंगल सानिध्य में तेरापंथ सभा, मुम्बई द्वारा पोलिस हॉकी ग्राउंड, घाटकोपर में मुमुक्षु धर्मेन्द्र की जैन तेरापंथी भागवती दीक्षा का आयोजन हुआ |
दीक्षा महोत्सव पर मुनि संजय कुमार जी ने फ़रमाया भगवन महावीर की आर्ष वाणी हे की ज्ञान, दर्शन, चारित्र और तप हमारे जीवन में वर्धमान हो । आर्हत वाग्मय में आता है हे भगवन ! में सामायिक करता हु, सामायिक का बहुत बड़ा महत्त्व है  त्याग के मार्ग पर इसी के द्वारा चला जाता है इसलिए सामायिक सर्वोपरि है। और आज के युग में त्याग और संयम की परंपरा को जैन साधु संत ही अक्षुण्ण रखे हुए हे।
दीक्षा का अर्थ है आई और माय का विसर्जन, अकड़ से पकड़ को छोड़ना और कोहम् से सोऽहं की प्राप्ति। आज पूज्य प्रवर के आशीर्वाद से मुमक्षु धर्मेंद्र मुनि धैर्य कुमार बन कर इस राह पर गतिशील हुये हे। दीक्षा के बाद अपनी इच्छा का विसर्जन कर गुरु के प्रति सर्वात्मना समर्पित होकर अपने जीवन को धन्य बनाये ।
मुनि प्रसन्न कुमारजी ने अपनी भावाभिव्यक्ति में कहा आज हम जो नजारा देख रहे हे वो पूज्य प्रवर का ही प्रसाद हे। आज कई लोग अपने भविष्य को लेकर अनिश्चित हे उन्हें आज के इस प्रसंग से प्रेरणा लेनी चाहिए और अपना जीवन धर्मसंघ को समर्पित कर देना चाहिए । ये मेरा 40 वर्ष का अनुभव है कि जो इस संघ में आया वो सारी चिंता तनाव से मुक्त हो गया । यहाँ गुरु आज्ञा में रह कर सम्यक दर्शन और आचार की साधना के द्वारा जीवन का कल्याण हुआ है।
साध्वी अणिमा श्रीजी ने अपने वक्तव्य में फ़रमाया आज दीक्षा की अनुमोदना करने पुरे मुम्बई का श्रावक समाज यहाँ उमड़ा हे। ये अनुमोदना हे त्याग की भगवन महावीर ने देशना, पालना और अनुमोदना का उल्लेख किया है। पूज्य प्रवर देशना दे रहे हे साधु साध्वी उनका पालन कर रहे और श्रावक समाज उनकी अनुमोदना कर रहा है।
आचार्य भिक्षु ने मर्यादा और अनुशासन का एक सशक्त किला दिया आज उन्ही लक्ष्मण रेखा ने संघ विकास में अपना महवपूर्ण योगदान दिया।ये सौभाग्य शाली संघ हे जिनकी आस्था की चट्टानें हिल नहीं सकती जब तक हमारे विवेक का चिराग जलता रहेगा अनुशासन में समर्पण रहेगा।
साध्वी निर्वाणश्रीजी ने दीक्षा पर अपनी बात रखते हुए फ़रमाया की दीक्षा सिर्फ वेश परिवर्तन ही नही ह्र्दय परिवर्तन भी हे। अपने आप को अध्यात्ममय जीवन में समर्पित कर आत्मकल्याण और स्व विकास के साथ पर विकास की और बढ़ना हे आप अपनी आत्मा का निर्मल बनाये।
मुमुक्षु धर्मेंद्र ने आत्म कल्याण केमार्ग  पर गतिमान चरणों को शब्द देते हुए अपनी अभिव्यक्ति में कहा आज मेरे जीवन का स्वर्णिम सूर्य उदित हुआ है। आज मैं राग से विराग की ओर, आसक्ति से अनासक्ति की ओर मैने अपने कदम बढ़ाये हैं । मैं सौभाग्यशाली हूँ मुझे ऐसे  सद् गुरु  का वरदहस्त प्राप्त हुआ, जिनसे मेरे जीवन का कल्याण होने वाला है।
मैं सभी से करबद्ध खमतखामना करता हूँ और स्वयं को गुरुचरणों में प्रस्तुत करता हु । स्वागत भाषण तेरापंथ सभा मुम्बई के अध्यक्ष श्री सुनीलजी कच्छारा ने दिया । तेरापंथ महिला मंडल ने गीतिका, तेरापंथ कन्या मंडल ने शब्दचित्र द्वारा एवं पारिवारिक जन ने गीतिका, भाषण के साथ अपनी अभिव्यक्ति प्रेषित की |
मुम्बई सभा के कार्यध्यक्ष श्रीमनोहरजी गोखरू, श्री ख्यालीलालजी तातेड़,  श्री जुगराज जी नाहर ने भी भावो की प्रस्तुति दी। आभार ज्ञापन मुम्बई सभा के उपाध्यक्ष अजित  कोठारी ने किया| कार्यक्रम का संचालन मुनि प्रकाश कुमार जी और प्रायोजक सम्मान समारोह का संचालन मुम्बई सभा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष दिनेश सूतरिया ने किया।
सुव्यवस्थित रूप से चले इस कार्यक्रम की सुन्दर संयोजन में तेरापंथी  सभा, मुंबई के अध्यक्ष श्री सुनील जी कच्छारा,  मंत्री श्री नरेन्द्रजी बांठिया के साथ विभिन्न सभा संस्थाओं की टीम ने पूरा सहयोग दिया | इस अवसर पर तेरापंथ समाज के अनेक गणमान्य लोग सहित सभा- संस्थाओं के पदाधिकारी गण मौजूद थे | आज के इस कार्यक्रम में मुंबई के सभी उपनगरों से आया श्रावक समाज ने एक विशाल जन मेदिनी का रूप ले लिया । जैन तेरापंथ न्यूज़ टीम मुंबई 















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  1. ॐ अर्हम

    जय जय ज्योतिचरण
    जय जय महाश्रमण

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  2. ॐ अर्हम

    जय जय ज्योतिचरण
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