हम सभी संघ की शरण में है - आचार्य श्री महाश्रमण

- मर्यादा महोत्सव का दूसरा दिन : विभिन्न आयोजनों का लगा जमघट -
- आचार्यश्री ने पाँच शरणों का किया वर्णन, धर्म को बताया सर्वोच्य शरण -
- आयजित हुआ महासभा का संबोधन अलंकरण समारोह, 105 लोगो को मिला सम्मान -
आचार्यश्री महाश्रमणजी

          फरवरी 2017 राधाबाड़ी, सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल), (JTN), आचार्य श्री महाश्रमण जी के पावन सान्निध्य में तेरापंथ धर्मसंघ के मर्यादा महोत्सव के दूसरे दिन भी श्रद्धालुओं और कार्यक्रमों के जमघट में पांच घंटों का भी समय कुछ मिनटों के समान बीत गया। मर्यादा महोत्सव के दूसरे दिन भी कार्यक्रम का शुभारम्भ सर्वप्रथम ग्यारहवें अनुशास्ता आचार्यश्री के श्रीमुख से नमस्कार महामंत्र के उच्चारण के साथ हुआ। उपासक श्रेणी और मुमुक्षुवृन्द द्वारा गीत का संगान किया गया। 
         इसके उपरान्त साध्वीवर्याजी ने संघ को रथ गतिशील, चक्र के समान विजयी, चंद्र, सूर्य और मेरू की संज्ञा देते हुए कहा कि यह आचार्यश्री भिक्षु द्वारा प्रदत विलक्षण धर्मसंघ है। इस धर्मसंघ में श्रावक-श्राविकाओं का भी सम्मानपूर्ण स्थान है। संघ की आलोचना सुनने के समय कान बंद और आलोचना करने के लिए मुंह बंद हो जाना चाहिए। लोगों में संघ के प्रति गहरी श्रद्धा आस्था जागे, इसके लिए श्रावक-श्राविकाओं को जागरूक रहने का प्रयास करना चाहिए। श्रावक-श्राविकाएं कलहमुक्त, नशामुक्त, तत्वज्ञ, श्रद्धानिष्ठ, आचारनिष्ठ बने। आचार्यश्री से उन्होंने इस अवसर पर ऐसा आशीर्वाद देने की अभ्यर्थना की। 
         मुख्यमुनिश्री ने उपस्थित जनमेदिनी को अभिप्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि तेरापंथ धर्मसंघ का विशिष्ट उत्सव मर्यादा महोत्सव है। संघ रक्षाकवच के समान है। वर्तमान युग में अनुशासन ओर मर्यादा का विशेष महत्त्व है। मर्यादा के बिना व्यक्ति, राष्ट्र या संघ का कभी विकास नहीं कर सकता। नदी जब मर्यादा में रहती है तो अभिसिंचन प्रदान करती और जब मर्यादा तोड़ती है तो लोगों को तकलीफ देने वाली बन जाती है। जहां मर्यादा वहां विकास और जहां मर्यादा नहीं वहां विनाश होता है। आचार्य भिक्षु द्वारा प्रतिष्ठित मर्यादाएं आज भी इस धर्मसंघ में मान्य हैं और लोगों के लिए अनुकरणीय है। तेरापंथ धर्मसंघ में आज्ञा का विशेष महत्त्व है। आचार्यश्री करुणाशील और अनुशासन पर दृढ़ रहने वाले हैं और धर्मसंघ में सबसे बड़े निर्णायक होते हैं। लोगों में आचार्यश्री की आज्ञा के प्रति सच्ची निष्ठा हो, ऐसा प्रयास करना चाहिए। मुख्यमुनिश्री ने ‘संघ हमारा प्राण है’ गीत का सुमधुर स्वर संगान भी किया। 
         इसके उपरान्त आचार्यश्री ने मर्यादा महोत्सव में उमड़े श्रद्धालुओं पर अमृतवर्षा करते हुए कहा कि इस धर्मसंघ और मर्यादा पत्र में शरण की बात आती है। पांच प्रकार के शरण बताए गए हैं। प्रथम शरण आज्ञा को बताया गया है। जिनेश्वर भगवान की आज्ञा की शहरण में रहने का प्रयत्न करना चाहिए। जैन शासन में तीर्थंकरों की अनुपस्थिति में उनका दायित्व आचार्यों को दिया गया है। वे आज्ञा भी देते हैं। भैक्षव शासन में आज्ञा का विशेष महत्त्व होता है। समस्त साधु-साध्वियों को आचार्य की आज्ञा के उल्लघंन का त्याग होता है। तेरापंथ धर्मसंघ में आचार्यों की आज्ञा का सर्वोच्च स्थान होता है। साधु-साध्वियां तो गुरुआज्ञा की बात तो दूर श्रावक भी इंगित के प्रति भी काफी सजग रहते हैं। साधु-साध्वियों के साथ श्रावक-श्राविकाओं में गुरुआज्ञा के प्रति सजगता देखी जा सकती है। आचार्य की आज्ञा के शरण में रहने का प्रयास करना चाहिए। दूसरा शरण मर्यादा को बताया गया है। तेरापंथ धर्मसंघ में मर्यादा का भी विशेष स्थान है। मर्यादाओं के प्रति सम्मान का भाव रखने का प्रयास करना चाहिए। और मर्यादा की शरण में रहने का प्रयास करना चाहिए। यह महोत्सव भी मर्यादा का ही है। तीसरा शरण आचार्य को बताया गया है। आचार्य तेरापंथ धर्मसंघ में सर्वोच्च माने गए हैं। आचार्य के प्रति सम्मान का भाव रखने का प्रयास करना चाहिए। चौथा शरण संघ को बताते हुए आचार्यश्री ने कहा कि हम सभी संघ की शरण में हैं। संघ हम सभी के लिए शरणदाता है। जहां बात संघ की आए वहां व्यक्ति गौण हो जाता है। संघ की शरण स्वीकार करने से भी संघ का विकास हो सकता है। आचार्यश्री ने पांचवा और महत्त्वपूर्ण शरण धर्म को बताते हुए कहा कि धर्म की शरण की रहना में सर्वोच्च बात होती है। आचार के प्रति निष्ठा, अहिंसा, प्रमाणिकता, इन्द्रिय संयम और अपरिग्रह के भाव पुष्ट रखने का प्रयास करना चाहिए। आदमी को धर्म के प्रति जागरूक रहने का प्रयास करना चाहिए। 
  आचार्यश्री के निर्देशानुसार तेरापंथी महासभा के अध्यक्ष श्री किशनलाल डागलिया ने लोगों को श्रावक-संदेशिका पुस्तक के बारे लोगों को अवगति प्रदान की। इस मौके पर आचार्यश्री के दर्शन करने पहुंचे भारतीय डाक विभाग के डिप्टी डायरेक्टर श्री अमन तृप्ति घोष ने आचार्यश्री के दर्शन कर मंगल पथदर्शन प्राप्त किया और भारतीय डाक विभाग के पश्चिम बंगाल सर्किल के मुख्य पोस्टमास्टर जनरल द्वारा आचार्यश्री और 153वें मर्यादा महोत्सव के पावन अवसर पर विशेष आवरण के साथ जारी स्टाम्प को श्रीचरणों में समर्पित किया। समणी और मुमुक्षु बाइयों द्वारा एक नाट्य की प्रस्तुति दी गई। 

पूरी दुनिया को आचार्यश्री के संदेश की आवश्यकता: शाहनवाज हुसैन 

  वहीं अकस्मात पूर्व केन्द्रीय मंत्री और वर्तमान में भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री शाहनवाज हुसैन भी आचार्यश्री के चरणों में पहुंचे। आचार्यश्री के दर्शन कर शुभाशीष प्राप्त करने के उपरान्त उन्होंने अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करते हुए कहा कि यह मेरा सौभाग्य है जो आपके दर्शन करने मुझे बार-बार अवसर प्राप्त हो जाता है। आज पूरी दुनिया केवल इस जैन धर्म के आचार्यश्री के संदेश की ही आवश्यकता है, जो पूरी दुनिया को एक करने की क्षमता रखता है। मैं जब आचार्यश्री को देखता हूं तो पूरी अंधकारमय दुनिया में एक जुगनू की भांति रोशनी देते नजर आते हैं। आप जहां जाते हैं, वहां अंधकार मिट जाता है और आपके ज्ञान का प्रकाश फैल जाता है। आप जैसे महामानव इस धरती पर कभी-कभी आते हैं। आपको एक सीमा में नहीं बांधा जा सकता। उन्होंने खुद को भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता के अलावा आचार्यश्री महाश्रमणजी का प्रवक्ता बताते हुए कहा कि मैं जहां जाता हूं आपके विचारों का प्रचार करता हूं और आपके बताए मार्ग पर चलने का प्रयास करता हूं। उन्होंने आचार्यश्री से एकबार पुनः आशीर्वाद लिया और गंतव्य को रवाना हो गए इस वायदे के साथ के साथ भागलपुर के चार दिवसीय प्रवास के समय चारों दिन आचार्यश्री की सन्निधि में उपस्थित रहूंगा। महासभा द्वारा ‘संबोधन प्राप्त करता परिचय’ नामक पुस्तक महासभा के अध्यक्ष श्री किशनलाल डागलिया, महामंत्री श्री प्रफुल्ल बेताला सहित अन्य गणमान्यों ने आचार्यश्री के चरणों में अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। डा. हरिश नवल द्वारा आचार्य तुलसी पर लिखे उपन्यास ‘रेतीले टीले का राजहंस’ पुस्तक भी स्वयं लेखक डा. हरिश नवल और श्री राजेश चेतन ने आचार्यश्री के चरणों में समर्पित कर अपनी भावनाओं की अभिव्यक्ति दी और आचार्यश्री के शुभ आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके उपरान्त जैन विश्वभारती के अध्यक्ष श्री रमेशचंद बोहरा और पूर्व अध्यक्ष श्री धर्मचंद लूंकड़ द्वारा जय तिथि पत्रक को आचार्यश्री के चरणों में समर्पित किया गया तो वहीं अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष श्री बीसी भलावत महामंत्री श्री विमल कटारिया सहित अन्य लोगों द्वारा नेपाल, बिहार, सिक्कीम और बंगाल की मिलीजुली एक डायरेक्ट्री भी आचार्यश्री के चरणों में समर्पित की गई। इसके अतिरिक्त एक गीत की सीडी, और कई हिन्दी, अंग्रेजी पुस्तकों को आचार्यश्री के चरणों में उनसे संबद्ध लोगों ने समर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। महासभा के मुख्य न्यासी श्री हंसराज बेताला ने भागलपुर में आयोजित अक्षय तृतीया के कार्यक्रमों की जानकारी दी। वर्ष 2017 में कोलकाता चतुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष श्री कमल दूगड़ ने आचार्यश्री को शीघ्र कोलकाता पधारने की अर्ज की कर ससंघ अपनी भावनाओं की अभिव्यक्ति दी।

















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