संयम और अनुशासन के माध्यम से आदमी का सम्यक विकास संभव है : आचार्यश्री महाश्रमण

- सद्भावना, नैतिकता और नशामुक्ति के संदेशों से गूंज उठा मुजफ्फरपुर -
- लीची के लिए विख्यात मुजफ्फरपुर जिला मुख्यालय पर शांति का संदेश देने पहुंचे शांतिदूत -
- उपस्थित लोगों ने स्वीकार किए अहिंसा यात्रा के संकल्प -
आचार्यश्री महाश्रमणजी

21.03.2017 मुजफ्फरपुर (बिहार)ः अपनी लीची के विश्व प्रसिद्ध बिहार का मुजफ्फरपुर जिला मुख्यालय मंगलवार को सद्भावना, नैतिकता और नशामुक्ति जैसे मंगलकारी संकल्पों से गूंज उठा। कारण था इन्हीं मंगलकारी संकल्पों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए और जन-जन का मंगल करने के लिए जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अधिशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, अहिंसा यात्रा के प्रणेता, महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी अपनी धवल सेना के साथ नगर स्थित राणी सती मंदिर में पहुंच रहे थे। नगरवासियों ने विशाल जुलूस के साथ आचार्यश्री और उनकी इस महान यात्रा का अपने जिले भव्य स्वागत किया और उनके साथ जयघोष लगाते नगर के सिकन्दरपुर क्षेत्र में स्थित राणी सती मंदिर परिसर पहुंचे। आचार्यश्री ने भी को पर अपनी आशीषवृष्टि की। मंदिर परिसर में बने प्रवचन पंडाल में उपस्थित श्रद्धालुओं को जीवन में संयम और अनुशासन बनाए रखने का ज्ञान प्रदान किया। मुजफ्फरपुरवासी तेरापंथी परिवारों को अपने श्रीमुख से सम्यक्त्व दीक्षा प्रदान की तो वहीं आम नागरिकों ने आचार्यश्री के आह्वान पर अहिंसा यात्रा के तीनों संकल्पों को सहृदय स्वीकार कर अपने आपको अहिंसा यात्रा से जोड़ पुण्य के भागी बने। अपने नगर में आचार्यश्री के स्वागत में नगरवासियों ने विभिन्न रूपों में अपनी भावनाओं की अभिव्यक्त कर आचार्यश्री से पावन आशीर्वाद प्राप्त किया। 
बुढ़ी गंडक नदी के किनारे बसा बिहार का मुजफ्फरपुर जिला अपनी लीची के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। यहां की रसदार लीची विदेशियों के जुबान पर भी चढ़ चुकी है। तभी तो यहां की लीची बहुतायत मात्रा में अपने देश में बिकने के बजाय विदेशी बाजारों में पहुंचती है। मंगलवार को इस सुप्रसिद्ध जिले के मुख्यालय पर जन-जन के कल्याण के लिए अहिंसा यात्रा लेकर निकले जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी अपनी धवल सेना के साथ अपने चरणरज से पावन करने पहुंचे। मंगलवार को बोचहां से प्रातः की मंगल बेला में आचार्यश्री अपनी श्वेत सेना के साथ मुजफ्फरपुर शहर की विहार किया। नगरवासी भी प्राप्त इस सुअवसर के पलक पांवड़े बिछाए थे। आचार्यश्री अपनी श्वेत सेना के साथ जैसे ही मुख्यालय की सीमा के समीप पहुंचे वहीं पर उपस्थित सैकड़ों श्रद्धालुओं और नगरवासियों ने आचार्यश्री का भव्य स्वागत-अभिनन्दन किया और यह भीड़ आचार्यश्री से आशीर्वाद प्राप्त कर जुलूस के रूप में परिणित हुई और सद्भावना, नैतिकता और नशामुक्ति के जयघोष के साथ आचार्यश्री के साथ चल पड़ी। मार्ग में दोनों ओर लोगों का जमावड़ा था सभी ऐसे महान संत के दर्शन को लालायित थे जो अपने कोमल चरणों से इस भूमि को मापने निकले हैं। जैसे ही लोगों की दृष्टि आचार्यश्री पर पड़ती लोग श्रद्धा के साथ शीश झुकाते। आचार्यश्री भी समान भाव से सभी श्रद्धालुओं पर अपनी आशीषवृष्टि करते निरंतर गतिमान थे। भव्य जुलूस के साथ आचार्यश्री नगर स्थित राणी सती मंदिर परिसर में पहुंचे। जहां मंदिर परिसर के अध्यक्ष व भारी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने आचार्यश्री का अभिनन्दन किया। 
मंदिर परिसर में बने भव्य प्रवचन पंडाल में आचार्यश्री की अमृतवाणी को सुनने की लालसा से पहुंचे श्रद्धालुओं को आचार्यश्री ने अपनी मंगलवाणी का रसपान कराते हुए कहा कि आदमी के जीवन में संयम और अनुशासन की विशेष आवश्यकता होती है। बात लोकतंत्र की या प्रजातंत्र की संयम और अनुशासन के माध्यम से ही आदमी का सम्यक विकास संभव हो सकता है। आचार्यश्री ने भगवान महावीर के इस विहार क्षेत्र में आगमन पर उन्हें स्मरण करते हुए कहा कि आज चैत्र महीने की कृष्णा अष्टमी का दिन है तो जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभ के दीक्षा दिवस का भी दिन है। वैसे जैन परंपरा में आज के दिन नए वर्षी तप का आरम्भ की करते हैं। क्योंकि आज के ही दिन से भगवान ऋषभ लगभग एक वर्ष तक कुछ खाया नहीं था। भगवान ऋषभ से लोगों को सामाजिक, व्यवहारिक, राजनैतिक और आध्यात्मिक प्रेरणा प्राप्त होती है।
आचार्यश्री ने उपथित लोगों को अहिंसा यात्रा के तीन उद्देश्यों सद्भावना, नैतिकता औन नशामुक्ति के विषय में विशेष अवगति प्रदान करते हुए कहा कि यदि यह तीनों आदमी के जीवन में आ जाए तो आदमी के जीवन में शांति आ सकती है। जीवन सुखमय बन सकता है। आचार्यश्री ने मुजफ्फरपुरवासियों को नगर की दुकानों में नैतिकता की देवी को स्थापित करने, अपने हृदय में नैतिकता को स्थापित करने की भी विशेष प्रेरणा प्रदान की।
आचार्यश्री ने अहिंसा यात्रा के तीनों उद्देश्यों के बारे में विस्तार से बताया और इसके तीन संकल्पों को भी सविस्तार से वर्णन करते हुए जब लोगों से इन संकल्पों को स्वीकार करने का आह्वान किया तो उपस्थित लोगों ने सस्वर अहिंसा यात्रा के तीनों संकल्प सद्भावपूर्ण व्यवहार करने, यथासंभव ईमानदारी का पालन करने व पूर्णतया नशामुक्त जीवन जीने के लिए संकल्पित हुए। 
आचार्यश्री ने नगर में रहने वाले तेरापंथी परिवार के सदस्यों को अपने श्रीमुख से सम्यक्त्व दीक्षा प्रदान कर लोगों को यावज्जीवन के लिए देव, गुरु और धर्म के प्रति समर्पित रहने को उत्प्रेरित किया। सभी ने आचार्यश्री का सविधि वंदन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। 
अपने नगर में अपने आराध्य को पाकर जहां तेरापंथी परिवार हर्षित थे तो वहीं ऐसे महासंत के दर्शन कर नगरवासी भी अपने भाग्य की सराहना कर रहे थे और सभी ऐसे महापुरुष के स्वागत में अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करने के लिए लालायित थे। इस मौके पर महिला मंडल और कन्या मंडल की सदस्याओं ने पृथक-पृथक गीत का संगान कर अपने आराध्य की अभिवंदना की तो वहीं तेरापंथ युवक परिषद के सदस्यों ने भी गीत संगान कर अपने आराध्य की अभ्यर्थना की। अहिंसा यात्रा व्यवस्था के संयोजक श्री राजकुमार बोथरा, तेरापंथ युवक परिषद के श्री मनोज बोथरा, महिला मंडल की अध्यक्ष श्रीमती कमलादेवी डोसी ने भी अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त कर आचार्यश्री से आशीर्वाद प्राप्त किया। 
राणी सती मंदिर के अध्यक्ष श्री कैलाश झनकारिया ने अपने मंदिर परिवार की ओर आचार्यश्री का अपने मंदिर परिसर में स्वागत-अभिनन्दन करते हुए कहा कि आप जैसे महापुरुष का आगमन हम सभी के लिए सौभाग्य की बात है। आपके आगमन से पूरे नगर सहित मंदिर परिसर में पावन हो गया है। नार्थईस्ट चेंबर ऑफ कॉमर्स के श्री पुरुषोत्तम पोद्दार ने आचार्यश्री के आगमन में अपने हृदयोद्गार को अिंभव्यक्त किया। आईपीएस श्री अमिताभ राजन ने आचार्यश्री की अभ्यर्थना करते हुए अपने वक्तव्य में कहा कि भगवान महावीर की जन्मस्थली और कर्मस्थली आज आपके स्पर्श से स्पंदित हो गई है। क्योंकि ऐतिहासिक रूप में आज किसी महासंत के चरण इस धरती पर पड़े। आज आप जो तीन महान संकल्प लेकर चले हैं, उन संकल्पों की इस क्षेत्र को सबसे अधिक आवश्यकता है और मैं उम्मीद करता हूं कि इन संकल्पों के माध्यम से इस क्षेत्र के लोगों में वास्तविक बदलाव देखने को प्राप्त होगा। मैं आपके विचारों से अभिभूत हूं। श्रीमती कविता राजन ने भी आचार्यश्री की आराधना में अपने भावों को अभिव्यक्त किया और समस्त नगरवासियों से आचार्यश्री द्वारा प्रदत्त संकल्पों को अपने जीवन में उतारने का आह्वान किया। लेखिका श्रीमती अनामिका ने भी आचार्यश्री के चरणों में अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त किया। वहीं ब्रह्मकुमारी मनीषा दीदी ने कहा कि इस दिव्य वातावरण में आकर मुझे बहुत खुशी हो रही है। परमात्मा की जब विशेष कृपा होती है तो ऐसा सुअवसर प्राप्त होता है जब महासंतों के दर्शन होते हैं। आपका जीवन त्याग और तपस्या से सुसज्जीत है। हम आपका मुजफ्फरपुर में स्वागत-अभिनंदन करते हैं। उन्होंने आचार्यश्री से समय निकाल अपने विद्यालय में भी पधारने का अनुरोध किया। 




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