मन को निर्मल बनाने का प्रयास करें : आचार्यश्री महाश्रमण

- बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री श्री सुशील कुमार मोदी ने भी किए आचार्यश्री के दर्शन -
- पटना सिटी वासियों पर बरसी गुरुकृपा, गुरुमुख से स्वीकार की सम्यक्त्व दीक्षा (गुरुधारणा) -
- सभी राजनेताओं को आचार्यश्री ने अपने आशीर्वचनों से किया आच्छादित -
आचार्यश्री महाश्रमणजी

       02.04.2017 पटना सिटी (बिहार) (JTN) : पटना सिटी में मंगल तालाब के किनारे स्थित रामदेव मेहतो सामुदायिक भवन में महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी के प्रवास के अंतिम दिन रविवार को बिहार सरकार के सत्तापक्ष की ओर लोकलेखा समिति के सभापति श्री नंदकिशोर यादव पूर्व राज्यसभा सांसद राजनीति प्रसाद तो नेता प्रतिपक्ष पेमकुमार तो वहीं बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री श्री सुशील कुमार मोदी भी आचार्यश्री की सन्निधि में पहुंचे। आचार्यश्री ने भी को अपने आशीर्वचनों से प्रेरणा प्रदान की तो वहीं सभी राजनेताओं ने भी आचार्यश्री के चरणों में अपने भावनाओं की प्रणति अर्पित किया। आचार्यश्री ने पटना सिटी वासियों पर विशेष कृपा बरसाई। उन्हें आध्यात्मिक ज्ञान के साथ-साथ अपने श्रीमुख से सम्यक्त्व दीक्षा (गुरुधारणा) देकर उनके जीवन को आध्यात्मिकता का संचार किया। 
रविवार को आचार्यश्री ने भवन के सभागार में उपस्थित श्रद्धालुओं को जीवन में जागरूक रहते हुए साधना कर अपने जीवन को सार्थक और सफल बनाने की प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि इस शरीर को चलाने के लिए आदमी खाना, पीना, कपड़ा, मकान आदि कितने चीजों की व्यवस्था करनी पड़ती है। प्रश्न यह उठता है कि आदमी को जीवन क्यों जिए। इसके लिए शास्त्रकार ने बताया कि आदमी को जागरूक रहते हुए इस शरीर के माध्यम से साधना कर अपनी आत्मा का कल्याण का प्रयास करना चाहिए। मन को निर्मल बनाने का प्रयास करना चाहिए। आदमी को जीवन में हिंसा से बचने का प्रयास करना चाहिए। 
आचार्यश्री ने प्रेरणा प्रदान करने के बाद शासनश्री मुनिश्री पानमलजी स्वामी का प्रयाण हो जाने पर एक स्मृति सभा आयोजित हुई। जिसमें मुनिश्री हितेन्द्रकुमारजी, मुनिश्री जितेन्द्रकुमारजी, मुनिश्री गौरवकुमारजी, मुनिश्रीकुमारश्रमणजी, मुनिश्री कीर्तिकुमारजी, मुनिश्रीकोमलकुमारजी, मुनिश्री मृदुकुमारजी, मुख्यमुनिश्री महावीरकुमारजी, शासनगौरव साध्वीश्री कल्पलताजी, शासनश्री साध्वी जिनप्रभाजी, महाश्रमणी साध्वीप्रमुखाजी ने उनकी विशेषताओं का वर्णन किया और उनकी आत्मा के आध्यात्मिक विकास की मंगलकामना की। आचार्यश्री ने उनकी आत्मा के आध्यात्मिक विकास करने की मंगलकामना की और स्वयं खड़े होकर चार लोगस्स का ध्यान किया। आचार्यश्री ने पटना सिटीवासियों को अपने श्रीमुख से सम्यक्त्व दीक्षा (गुरुधारणा) प्रदान की। पटना सिटीवासियों ने उसे सहर्ष स्वीकार किया। 
इसके उपरान्त आचार्यश्री की सन्निधि में उपस्थित लोकलेखा समिति के सभापति श्री नंदकिशोर यादव ने आचार्यश्री से आशीर्वाद प्राप्त करने के उपरान्त अपने वक्तव्य में कहा कि आपका हम बिहार की राजधानी में हार्दिक अभिनन्दन करते हैं। आपके बारे में तो बहुत चर्चा सुनी थी, लेकिन दर्शन और श्रवण का आज सुअवसर प्राप्त हुआ है। जीवन के गूढ़ रहस्यों को आपने जितनी सहजता से लोगों को बताया है वह आप जैसा महापुरुष ही कर सकता है। राज्यसभा के पूर्व सांसद राजनीति प्रसाद ने भी आचार्यश्री के चरणों में अपनी भावांजलि अर्पित की। बिहार सरकार में नेता प्रतिपक्ष प्रेमकुमार ने भी अपने स्वागत वक्तव्य मंे कहा कि हम सभी का सौभाग्य है कि आप जैसे महापुरुष के दर्शन हुए। आपके विचार और आपका प्रयास आने वाले दिनों में देश में परिवर्तन लाने वाला है। बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री श्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि बिहार की यह धरती तीन-तीन धर्मों के पथप्रदर्शकों की जन्मभूमि रही है। हम सभी का सौभाग्य है जो आचार्यश्री जैसे महासंत पदयात्रा करते हुए यहां आए हैं। अंत में शासन गौरव मुनिश्री ताराचंदजी स्वामी की आत्मकथा मेरी यात्रा वीतरागता की ओर को श्रीचरणों में समर्पित किया गया। आचार्यश्री ने पुस्तक को पढ़ने से लोगों को विशेष प्रेरणा प्राप्त इसकी मंगलकामना की। 








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