विवेक और संयम के साथ हो भाषा का प्रयोग: आचार्यश्री महाश्रमण

20.05.2017 बोलपुर, वीरभूम (पश्चिम बंगाल)ः पश्चिम बंगाल की वीरभूम में भगवान महावीर के प्रतिनिधि, शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी का अपनी धवल सेना के साथ अहिंसा यात्रा के साथ विहरण जन-जन को मानसिक चेतना को जागृत कर रहा है। हिंसा का बढ़ता प्रभाव, बढ़ता भ्रष्टाचार और नशे की ओर भागते लोगों को सद्भावना, नैतिकता और नशामुक्ति का पथ प्रदर्शित करने के लिए शांतिदूत की यह अहिंसा यात्रा कारगर साबित हो रही है।
शनिवार को सुबह लगभग छह बजे आचार्यश्री ने आदर्श विद्यालय के प्रांगण से मंगल प्रस्थान किया। जैसे-जैसे आचार्यश्री के चरणकमल अगले गंतव्य की ओर बढ़ रहे थे, वैसे-वैसे सूर्य भी अपनी किरणों के साथ ज्यादा चमकदार होता जा रहा था, जो सामान्य लोगों के लिए आग बरसा रहा था, तो वहीं समताधारी आचार्यश्री के चेहरे पर उसके इस आतप का कोई प्रभाव नजर ही नहीं आ रहा था। समता भाव के निरंतर बढ़ते ज्योतिचरण के हौसलों के साथ श्रद्धालु भी बढ़ते जा रहे थे। भयंकर गर्मी में लगभग पन्द्रह किलोमीटर का प्रलंब विहार कर आचार्यश्री बोलपुर स्थित टेक्नो इण्डिया ग्रुप पब्लिक स्कूल में पहुंचे। जहां विद्यालय की प्रधानाध्यापिका श्रीमती मधुमिता पुरी और शिक्षिका श्रीमती संगीता मिश्रा के साथ अन्य उपस्थित श्रद्धालुओं ने आचार्यश्री का स्वागत-अभिनन्दन किया।
विद्यालय परिसर में आयोजित प्रवचन कार्यक्रम में सर्वप्रथम विद्यालय की शिक्षिका श्रीमती संगीता मिश्रा ने गीत का संगान कर आचार्यश्री का अपने विद्यालय में अभिनन्दन किया। उसके उपरान्त विद्यालय की प्रधानाध्यापिका श्रीमती मधुमिता पुरी ने अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करते हुए कहा कि मैंने जब सुना कि आचार्यश्री का हमारे विद्यालय में आगमन होगा तो मेरा मन खुशियों से भर उठा। आज हमारे विद्यालय में आपके चरणरज पड़े और आपके दर्शन का हमें सौभाग्य प्राप्त कर हम धन्य हो गए। आज के समाज में आचार्यश्री जैसे व्यक्तित्व की बहुत आवश्यकता है। आपकी जीवनशैली आश्चर्यजनक है। आप योगी महापुरुष हैं। आपकी अहिंसा यात्रा सफल हो, आपका संदेश जन-जन तक पहुंचे और लोग उसका समाचरण करें, यहीं मैं कामना करती हूं।
इसके उपरान्त आचार्यश्री ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि आदमी के व्यवहार का एक माध्यम वाणी है। बोलकर विचारों की अभिव्यक्ति दी जाती है। वाणी विचारों के आदान-प्रदान का सशक्त माध्यम है। भाषा का उपयोग बोलकर और लिखकर भी किया जा सकता है। आदमी को अपनी भाषा को बहुत अच्छा बनाने का प्रयास करना चाहिए। वाणी के दो दोष-पहला बात को बहुत लंबा कर देना और दूसरा अर्थहीन बात बोलना होता है तथा वाणी के दो गुण-परिमित बोलना और दूसरा सारपूर्ण बोलना। इसलिए आदमी को कम बोलने का प्रयास करना चाहिए और यथार्थ बोलने का प्रयास करना चाहिए आदमी को झूठ बोलने से बचने का प्रयास करना चाहिए। आचार्यश्री के मंगल प्रवचन के उपरान्त मियामिका से गुरु सन्निधि में पहुंची समणीद्वय समणी रोहिणीप्रज्ञा और समणी सत्यप्रज्ञाजी ने आचार्यश्री की अभिवन्दना की और अपनी भावाभिव्यक्ति दी। अहिंसा यात्रा प्रबन्धन समिति की ओर से विद्यालय परिवार के प्रयोगार्थ उपहार भी प्रदान किए गए। 

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