आत्मानुशासन कर स्वयं का कल्याण करें : आचार्य श्री महाश्रमण

03.06.2017 श्रीरामपुर, हुगली (पश्चिम बंगाल)। शनिवार को अपनी श्वेत सेना के साथ आचार्यश्री सिंगूर स्थित श्रीबड़ाबाजर लोहापट्टी सेवा समिति परिसर से मंगल प्रस्थान किया। विहार के साथ ही सूर्य भी अपनी किरणों के साथ आसमान में गतिमान हो चुका था। बढ़ते समय के साथ सूर्य का ताप बढ़ता जा रहा था और बढ़ती जा रही थी उमस। गर्मी और उमस दोनों मिलकर लोगों के धैर्य की परीक्षाएं ले रही थीं, किन्तु इन सभी से बेपरवाह समतासाधक आचार्यश्री महाश्रमणजी के कोमल चरण गतिमान थे तथा उनकी साधना और तप के तेज से प्रकाशित श्रद्धालु भी अपने आराध्य के साथ आगे बढ़ रहे थे। मानों वे भी सूर्य को चुनौती दे रहे थे कि हमें तुम्हारे आतप का कोई भय नहीं क्योंकि हमारे साथ हमारे आराध्य के आशीष की छाया है। गर्मी और उमस के बीच लगभग बारह किलोमीटर की पदयात्रा कर आचार्यश्री श्रीरामपुर स्थित गणेश मिल एंड एलोयज लिमिटेड में पहुंचे। श्रीरामपुर में आचार्यश्री के आगमन से श्रद्धालुओं की भक्ति देख लग रहा था मानों श्रीरामपुर में तेरापंथ के राम का पदार्पण हो गया है। कंपनी के मालिकानों ने आराध्य का स्वागत किया।
कंपनी के परिसर में ही बने प्रवचन पंडाल में उपस्थित श्रद्धालुओं को आचार्यश्री ने लोगों को आत्मानुशासन करने की प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा आदमी को अपने आप पर नियंत्रण करने का प्रयास करना चाहिए। आदमी अपने पर अनुशासन करे, तो दुःखों से मुक्त हो सकता है। आचार्यश्री ने आत्मानुशासन करने के लिए शरीरोनुशासन, वचोनुशासन, मनोनुशासन तथा इन्द्रियानुशासन-इन तरीकों का वर्णन करते हुए कहा कि आदमी अपने शरीर का अनुशासन करे। हांथ-पांव को संयमित रखने का प्रयास करना चाहिए। आदमी को अपनी वाणी पर अनुशासन करने का प्रयास करना चाहिए। अनपेक्षित बोलने से बचने का प्रयास करना चाहिए। वाणी की शक्ति का सदुपयोग करने का प्रयास करना चाहिए। आदमी को अपने मन को भी अनुशासित करने का प्रयास करना चाहिए। आदमी अपनी इन्द्रियों का संयम करने का प्रयास का प्रयास करे। इन चारों पर अनुशासन कर आदमी आत्मोनुशासन की दिशा में आगे बढ़ सकता है और दुःखों से मुक्ति की दिशा में आगे बढ़ सकता है। आचार्यश्री से पूर्व साध्वीप्रमुखाजी और मुख्यनियोजिकाजी ने भी श्रद्धालुओं को उद्बोधित किया।
अपने प्रतिष्ठान में अपने आराध्य का स्वागत करते हुए श्री महावीरलाल बेद ने अपनी भावनाओं को अभिव्यक्ति किया। बेद-नाहटा परिवार की महिलाओं ने स्वागत गीत का संगान किया। श्री सज्जन कुमार नाहटा, श्री प्रमोद घोड़ावत ने भी अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त किया। श्री ललित बोरड़, श्री नवीन नौलखा ने गीत का संगान किया। श्री राजेन्द्र पिंचा ने भी गीत के माध्यम आचार्यश्री की अभ्यर्थना की। 

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