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आत्मा के आसपास रहते हुए आदमी करे आत्मोथान का प्रयास: आचार्यश्री महाश्रमण

- महातपस्वी के चरण कमल से पावन हुआ लिलुआ -

- लिलुआवासियों ने अपने आराध्य के स्वागत में दी भावनाओं की अभिव्यक्ति -
आचार्यश्री महाश्रमणजी 

08.06.2017 लिलुआ, हावड़ा (पश्चिम बंगाल) (JTN) : नई दिल्ली से निकली अहिंसा यात्रा अपने प्रणेता, जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता, महातपस्वी, शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी व उनकी धवल सेना के साथ कोलकाता महानगर में शांति का संदेश जन-जन तक पहुंचा रही है। वर्तमान समय में मानवता के मसीहा आचार्यश्री महाश्रमणजी कोलकाता महानगर वासियों को मानवता का संदेश देकर उन्हें अपने जीवन को शांति और सुखमय बनाने की मंगल प्रेरणा प्रदान कर रहे हैं। 
इस क्रम में गुरुवार की सुबह बेलूर मठ के रामकृष्ण मिशन विवेकानंद विश्वविद्यालय परिसर स्थित प्रेमानंद भवन से सुबह की मंगल बेला में प्रस्थान किया। इस दौरान लिलुआ के श्रद्धालुओं को हुजूम अपने आराध्य के स्वागत में पहुंच चुका था। अपने आराध्य के साथ विशाल जुलूस के साथ लिलुआवासी अपने आराध्य को अपने प्रवास स्थल की ओर ले चले। लगभग तीन किलोमीटर का विहार कर आचार्यश्री अपनी धवल सेना के साथ लिलुआ के तेरापंथ भवन परिसर पहुंचे। अपने घर में अपने आराध्य को पाकर श्रद्धालु भावविभोर थे। 
भवन के समीप बने प्रवचन पंडाल में उपस्थित श्रद्धालुओं को आचार्यश्री ने अपनी अमृतवाणी का रसपान कराते हुए कहा कि आत्मा धार्मिक जगत का प्रसिद्ध शब्द है। आत्मा और अनात्मा, जड़-चेतन, जीव-अजीव में ही पूरी दुनिया समाहित है। आत्मा स्थाई तत्व है। आत्मा को न तो काटा जा सकता है, न जलाया जा सकता है, न भींगोया जा सकता है और न हीं सूखाया जा सकता है। आत्मा शाश्वत और स्थाई है, वहीं शरीर अस्थाई है। आदमी को अपनी आत्मा के हित को साधने का प्रयास करना चाहिए। आदमी को अत्मा और शरीर के भेद को जानकर साधना के माध्यम से अपनी आत्मा का हित साधने का प्रयास करना चाहिए। आत्मा की मुक्ति के लिए आदमी को साधना करने का प्रयास करना चाहिए। आचार्यश्री ने कहा कि साधु-साध्वी अपनी आत्मा के कल्याण के लिए ही अभिनिष्क्रमण किया है। 
          आचार्यश्री ने बालमुनियों और बाल साध्वियों को विशेष प्रेरणा देते हुए कहा कि ज्ञान के साथ-साथ उन्हें तार्किक शक्ति का विकास करने का प्रयास करना चाहिए। तार्किक शक्ति के द्वारा ज्ञान का बेहतर विकास किया जा सकता है। आचार्यश्री ने संयम के प्रति भी जागरूक रहने की प्रेरणा प्रदान की। चतुर्दशी तिथि होने के कारण आज आचार्यश्री के साथ समस्त साधु-साध्वी भी उपस्थित थे। आचार्यश्री ने उन्हें प्रेरणा प्रदान की तो साधु-साध्वियों ने लेखपत्र का उच्चारण कर अपने संकल्प, निष्ठा और समर्पण के भावों को दोहराया। 
अपने आराध्य के स्वागत में लिलुआ तेरापंथी सभा अध्यक्ष श्री रणजीत सेठिया, युवा सभा के मंत्री श्री दिनेश सुराणा, श्री राजेन्द्र मणोत, श्री प्रदीप कुंडलिया, श्री माणकचंद सेठिया, उपासक श्री आनंद लुणिया ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। महिला मंडल और कन्या मंडल की सदस्याओं ने स्वागत गीत का संगान किया। ज्ञानशाला के ज्ञानार्थियों ने भावपूर्ण प्रस्तुति दी। श्री अभय बरड़िया ने गीत का संगान किया। आचार्यश्री ने लिलुआ सभा के रजत जयंती मनाए जाने पर मंगल आशीर्वाद भी प्रदान किया।

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