क्षमामूर्ति ने क्षमापना दिवस पर अपने भक्तों से क्षमायाचना कर बढ़ाया मान

-लगभग सवा पांच बजे आचार्यश्री पहुंचे अध्यात्म समवसरण
-उपस्थित भक्तों और समस्त साधु-साध्वियों संग बाहर के साधु-संतों से भी आचार्यश्री ने की खमतखामणा
-आचार्यश्री ने अन्य जैन धर्म के धर्मगुरुओं से भी की खमतखामणा
-पूर्व के द्वेष भावों को छोड़ मैत्री भाव को आत्मसात करने की दी पावन प्रेरणा
-असाधारण साध्वीप्रमुखाजी से भी आचार्यश्री ने खमतखामणा
-अपने आराध्य से सम्मुख खमतखामणा कर श्रद्धालु हुए निहाल
-साधु-साध्वियों से लेकर बच्चों तक में पूरे दिन चलता रहा खमतखामणा दौर
 

27.08.2017 राजरहाट, कोलकाता (पश्चिम बंगाल)ः जैन धर्म के सबसे प्रमुख महापर्व पर्युषण महापर्व, उसका अंतिम दिन संवत्सरी महापर्व के रूप में समायोजित होने के उपरान्त संवत्सरी के बाद का दिन भी जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ में क्षमापना दिवस के रूप में उल्लासपूर्ण ढंग से मनाया गया। 
आज के दिन तो स्वयं जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अनुशास्ता, महातपस्वी, शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी ने अपने भक्तों और साधु-साध्वियों से क्षमायाचना की तो मानों क्षमामूर्ति ने स्वयं क्षमायाचना कर भक्तों और अपने साधु-साध्वियों का स्वयं मान बढ़ा दिया हो। शायद हर पूरे विश्व में अपने ढंग का अनूठा ही त्योहार होगा जिसमें वर्ष भर की भूल-चूक, गलत बात, व्यवहार, दुश्मनी आदि को दिल से भूलाकर लोग खुद क्षमा करते हैं और दूसरों से क्षमा की याचना करते हैं। इस परंपरा का निर्वहन स्वयं जिस धर्मसंघ के अनुशास्ता करते हों, भला उस परंपरा को कोई कैसे छोड़ सकता है। ऐसा यह क्षमापना महापर्व कोलकाता के राजरहाट में बने महाश्रमण विहार के प्रांगण में बने अध्यात्म समवसरण में सुबह सूर्योदय से पूर्व आरम्भ हुआ तो देर रात तक चलता रहा। 
रविवार को सूर्योदय होने से पूर्व ही कोलकाता के राजरहाट में बने महाश्रमण विहार परिसर में बना अध्यात्म समवसरण श्रद्धालुओं से पट चुका था। यहां तक पूरे परिसर में लोगों की अपार उपस्थिति अलग ही नजारा उपस्थित कर रही थी। अवसर था क्षमापना दिवस का। लगभग सवा पांच बजे जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के देदीप्यमान महासूर्य आचार्यश्री महाश्रमणजी अपनी श्वेत रश्मियों के समान धवलवस्त्रधारी साधु-साध्वियों के साथ अध्यात्म समवसरण में पधारे तो सुबह का वातावरण ‘वन्दे गुरुवरम’ की ध्वनि से पावन हो उठा। 
आचार्यश्री ने उपस्थित श्रद्धालुओं को अपने अपनी अमृतवाणी का रसपान कराते हुए कहा कि आज संवत्सरी की सम्पन्नता का संदर्भ और क्षमापना का समारोह। हमें पीछली बातों के द्वेष भावों से जुड़ी बातों को छोड़कर मैत्री का आत्मसातकरण करना चाहिए। 
आचार्यश्री ने इस दौरान जैन संप्रदाय में एक दिवस पर संवत्सरी महापर्व को मनाए जाने की इच्छा व्यक्त करते हुए कहा कि हमारा जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ, साधुमार्गी संप्रदाय व वर्धमान स्थानकवासी श्रमण संघ-ये तीन संप्रदाय एक तिथि को संवत्सरी मनाएं, ऐसी मेरी भावना है। इस विषय में साधुमार्गी संप्रदाय के आचार्यश्री रामलालजी महाराज व वर्धमान स्थानकवासी श्रमण संघ के आचार्यश्री शिवमुनिजी महाराज दोनों सह चिन्तनपूर्वक एक तिथि का प्रारूप प्रस्तुत करें। उस प्रारूप में विशेष बाधा नहीं होगी तो जैन श्वेताम्बर तेरापंथ उसे स्वीकार कर लेगा। किसी कारण से उन दोनों आचार्यों में एकमत न हो सके तो दोनों आचार्य अपने-अपने प्रारूप हमारे पास उपलब्ध करा दें, उनमें जो प्रारूप विशेष बाधा के बिना हमारी मान्यता के ज्यादा अनुकूल होगा, जैन श्वेताम्बर तेरापंथ उसे स्वीकार कर लेगा। मैं यहां खड़े-खड़े दोनों सम्माननीय आचार्यों से अनुरोध करता हूं कि वे यथासंभव इस दिशा में प्रयास करें, ताकि हम संवत्सरी की एकता की दिशा में आगे बढ़ सकें। यहीं नहीं आचार्यश्री ने दोनों संप्रदायों के आचार्यों को तेरापंथ धर्मसंघ की ओर से ‘अध्यात्म ज्योति अलंकरण से अलंकृत करने की भावना भी व्यक्त की। क्षमापना दिवस पर आचार्यश्री की जैन एकता की यह बात इस दिवस की सार्थकता में मानों चार चांद लगा दिया। 
इसके उपरान्त आचार्यश्री ने तेरापंथ धर्मसंघ की असाधारण साध्वीप्रमुखाजी, मंत्रीमुनिश्री सहित मुख्यनियोजिकाजी, मुख्यमुनिश्री और साध्वीवर्याजी सहित समस्त साधु-साध्वियों, समण-समणियों और श्रावक-श्राविकाओं से क्षमायाचना की तो ऐसा लगा मानों भगवान अपने भक्तों का मान बढ़ा रहे हों। इस दौरान साध्वीप्रमुखाजी, मुख्यनियोजिकाजी, मुख्यमुनिश्री और साध्वीवर्याजी ने भी लोगों को पावन प्रेरणा प्रदान की और अपने आराध्य से क्षमायाचना करते हुए आचार्यश्री से अपने लिए आशीर्वाद मांगा। 
इस दौरान कोलकाता चतुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष श्री कमल दुगड़ , जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा कोलकाता के अध्यक्ष श्री तेजकरण बोथरा, अणुव्रत समिति कोलकाता के अध्यक्ष श्री महेन्द्रजी, तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री प्रकाश मालू, अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल की अध्यक्षा श्रीमती कल्पना बैद, जय तुलसी फाउण्डेशन के मंत्री श्री सलिल लोढ़ा, आचार्य महाप्रज्ञ महाश्रमण एजुकेशन एंड रिसर्च फाउण्डेशन के अध्यक्ष श्री सुरेन्द्र दुगड़ व तेरापंथ विकास परिसद के सदस्य श्री बनेचंद मालू आदि ने भी अपने आराध्य के समक्ष अपनी भावाभिव्यक्ति दी और अपने आराध्य से क्षमायाचना कर आशीर्वाद प्राप्त किया। 



















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