नवाह्निक आध्यात्मिक अनुष्ठान : पल्लावरम (चेन्नई)

आचार्यश्री महाश्रमणजी के सुशिष्य तपस्वी डॉ. मुनिश्री अमृतकुमारजी एवं नरेशकुमारजी के पावन सानिध्य में दिनांक 21.9.17 से 29.9.17 तक पल्लावरम (चेन्नई) सभाभवन में नवाह्निक आध्यात्मिक अनुष्ठान का साधना क्रम विधिवत रूप से चला । इस अनुष्ठान में अच्छी संख्या में भाई - बहनों ने अपनी सहभागिता दर्ज करवाई । मुनिश्री अमृतकुमारजी ने सभी को विशेष प्रेरणा देते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में नवरात्रि उत्सव का सदैव महत्व रहा है । इसका कारण है कि यह शक्ति का पर्व है ,हर कार्य को संपन्न करने के लिए शक्ति की अपेक्षा रहती है ,वर्ष में दो बार रक्त नया बनता है इस समय साधना करने से शक्ति का प्रार्दुभाव होता है । आचार्यश्री तुलसी ने लोगस्स व आगम पद्यों के द्वारा नवरात्रि अनुष्ठान को आध्यात्मिक स्वरुप प्रदान किया । इसके द्वारा नवऊर्जा,उत्साह और उमंग का संचार होता है । मुनिश्री नरेशकुमारजी ने नवरात्रि के नौ दिनों तक सभी को जप अनुष्ठान करवाया ।



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