आलस्य को मनुष्य का शत्रु कहा गया है : आचार्य श्री महाश्रमण जी

आचार्यश्री महाश्रमणजी
          09 फरवरी 2018 बामुर, अंगुल, JTN, लोगों को सद्भावना, नैतिकता और नशामुक्ति का मंत्र बताने वाले आचार्यश्री महाश्रमणजी अपनी धवल सेना के साथ शुक्रवार को अनगुल जिले के बामुर स्थित युवा ज्योति हाइस्कूल में पधारे। युवा ज्योति हाइस्कूल में मंगल पदार्पण मानों बामुरवासियो में आध्यात्मिकता की ज्योति जलाने के लिए हुआ। 
          छात्रों, शिक्षकों व ग्रामीणों को पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि आदमी को नींद को बहुमान नहीं देना चाहिए। यदि आदमी को अपने जीवन में विकास करना और आगे बढ़ना है तो नींद को बहुमान देने से बचने का प्रयास करना चाहिए। कार्य से हुए थकान के उपरान्त थोड़ा विश्राम तो आवश्यक है, किन्तु आलस्यवश सोना अच्छा नहीं होता। आपको भी ज्ञानार्जन के क्षेत्र में आगे बढ़ना है तो आपको नींद, आलस्य आदि से बचने का प्रयास करना चाहिए। 
          आलस्य को मनुष्य का शत्रु कहा गया है। वह भी एक ऐसा शत्रु जो मनुष्य के शरीर में ही रहने वाला है। आलस्य करने वाले आदमी का विकास संभव नहीं हो पाता। इसलिए आदमी को आलस्य से बचने का प्रयास करना चाहिए। आदमी को ज्यादा जोर-जोर से हंसना भी नहीं चाहिए।
          ज्यादा हंसी-मजाक से आदमी की गरिमा कम हो सकती है। हंसी से हल्काई हो जाती है। छिछले स्तर की हंसी-मजाक से आदमी को बचने का प्रयास करना चाहिए। छात्रों को मैथुन कथा या विकथा से भी बचने का प्रयास करना चाहिए। मैथुन कथा में या विकथा में रस लेने वाले छात्र ज्ञानार्जन के रास्ते से भटक सकते हैं। इसलिए सदा ज्ञानार्जन के रत रहने का प्रयास करना चाहिए। ज्ञान का अच्छा विकास हो इसके लिए अर्जित ज्ञान को दोहराने का प्रयास करना चाहिए अन्यथा ज्ञान विस्मृत भी हो सकता है। परिसर में उपस्थित समस्त लोगों ने सहर्ष अहिंसा यात्रा के तीनों संकल्पों को स्वीकार किया। इसके उपरान्त प्रधानाध्यापक श्री ऋषिकेश साहू ने अपनी हर्षाभिव्यक्ति दी और आचार्यश्री से पावन आशीर्वाद प्राप्त किया।
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