टिटिलागढ़ में त्रिदिवसीय प्रवास हेतु धवल सेना संग पहुंचे महातपस्वी महाश्रमण

स्वागत में उमड़ पड़े टिटिलागढ़वासी, भव्य स्वागत जुलूस के साथ अपने आराध्य का किया स्वागत 
आचार्यश्री के दर्शन को पहुंची विधायक, नगर के नगरपाल ने भी आचार्यश्री का किया अभिनन्दन 
आचार्यश्री धर्म की आराधना की दी पावन प्रेरणा, लोगों ने सहर्ष स्वीकार किए अहिंसा यात्रा के संकल्प

Ahimsa Yatra Reached at Titlagarh, Odisha


ABTYP JTN 09.03.2018 टिटिलागढ़, बलांगीर (ओड़िशा) : 48 वर्षों से आध्यात्मिक अभिसिंचन के लिए तरसते पश्चिम ओड़िशा में आध्यात्मिक मेघों के साथ जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, अहिंसा यात्रा के प्रणेता, महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी अपनी धवल सेना संग पश्चिम ओड़िशा में आध्यात्मिक अभिसिंचन प्रदान कर रहे हैं। आचार्यश्री का यह अभिसिंचन हजारों-हजारों श्रद्धालुओं को मानों नव जीवन प्रदान कर रहा है तो वहीं अन्य ग्रामीण व शहरी लोगों में भी आध्यात्मिक चेतना का विकास करने वाला बन रहा है। आचार्यश्री की यह आध्यात्मिक वृष्टि जन-जन का कल्याण कर रही है। 

शुक्रवार को बलांगीर जिले का टिटिलागढ़ पूरी तरह सजा-धजा उत्साहित, उल्लसित व उत्कंठित नजर आ रहा था। इसका मुख्य कारण था यहां 48 वर्षों बाद स्वयं भक्तों के घर चलकर भगवान पधारने वाले थे। जी हां! 48 वर्षों पूर्व अपने भक्तों को आशीर्वाद देने जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के नवमाधिशास्ता का आगमन हुआ था तो उसके बाद आज तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता के ज्योतिचरण पड़ने वाले थे। नगर के गलियों, चैराहों पर लगे बैनर, पोस्टर, होर्डिंग आदि सहज ही लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे थे। उत्साही श्रद्धालु तो अपने आराध्य की अगवानी करने अपने आराध्य की मंगल सन्निधि में खोलान भी पहुंच गए थे। आचार्यश्री ने सूर्योदय के कुछ समय पश्चात मंगल प्रस्थान किया तभी आचार्यश्री के साथ सैंकड़ों श्रद्धालुओं को हुजूम चल पड़ा। हुजूम के उत्साह को कौन कहे मार्ग में आने वाले ग्रामीण भी अपने घरों के आगे रंगोली बनाकर उस पर कलश आदि रखकर आचार्यश्री व उनकी धवल सेना के अभिनन्दन को सैंकड़ों की संख्या में खड़े नजर आ रहे थे। सभी पर आशीषवृष्टि करते, आचार्यश्री टिटिलागढ़ की ओर बढ़ते जा रहे थे। जैसे-जैसे नगर नजदीक आ रहा था, श्रद्धालुओं की संख्या दोगुनी-चैगुनी होती जा रही थी। आचार्यश्री नगर की सीमा में पहुंचे तो लगा मानों आस्थावान श्रद्धालुओं का समुद्र लहरा उठा जो महातपस्वी के चरणाभिषेक को आतुर नजर आ रहा था। उसके साथ ही उसमें घुला था ओड़िया संस्कृति का रंग क्योंकि बहुत सारे लोग को पारंपरिक परिधानों व वाद्ययंत्रों के साथ आचार्यश्री की वंदना में खड़े थे। भव्य, विशाल और सुन्दर जुलूस के साथ आचार्यश्री लोगों को मंगल आशीर्वाद प्रदान करते टिटिलागढ़ में स्थित श्री गोविन्द वाटिका पहुंचे। यहीं पर आचार्यश्री का त्रिदिवसीय प्रवास निर्धारित है। 

इस परिसर में ही बने भव्य अध्यात्म समवसरण के पंडाल में उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं को सर्वप्रथम मुख्यनियोजिका जी ने उत्प्रेरित किया। उसके उपरान्त तेरापंथ धर्मसंघ की असाधारण साध्वीप्रमुखाजी का मंगल उद्बोध प्राप्त हुआ। तत्पश्चात आचार्यश्री महाश्रमणजी लोगों को पर अपनी वाणी से अमृतवर्षा करते हुए कहा कि साधु का दर्शन पुण्य देने वाला होता है, क्योंकि साधु तीर्थ के समान होते हैं। मन, वचन और काया से किसी को कष्ट नहीं देने वाले साधु के मुख दर्शन से ही पाप नष्ट हो जाता है। आदमी में जीवन में चेहरे का नहीं चरित्र का महत्त्व होता है। इसलिए आदमी को अपने चरित्र की सुन्दरता पर ध्यान देने का प्रयास करना चाहिए। इसके लिए आदमी को धर्म की साधना-आराधना करने का प्रयास करना चाहिए। धर्म की साधना कर आदमी अपने जीवन का कल्याण कर सकता है और इस संसार में स्वयं का नाथ बन सकता है। 

आचार्यश्री ने टिटिलागढ़वासियों को अहिंसा यात्रा की अवगति प्रदान कर अहिंसा यात्रा के तीनों संकल्पों को स्वीकार करने का आह्वान किया तो उपस्थित हजारों जनमेदिनी ने एकसाथ खड़े होकर संकल्पत्रयी स्वीकार की। इसके उपरान्त आरम्भ हुआ श्रद्धा भावों से ओतप्रोत श्रद्धालुओं के भावनाओं के अभिव्यक्ति का कार्यक्रम तो सर्वप्रथम संसारपक्ष में टिटिलागढ़ से संबंधित साध्वी पुनीतप्रभाजी ने अपनी आस्थासिक्त अभिव्यक्ति से अपने आराध्य का अपनी जन्मभूमि में अभिनन्दन-वंदन किया। इसके उपरान्त साध्वी लब्धिप्रभाजी समणी मलयप्रज्ञाजी, समणी रत्नप्रज्ञाजी ने भी अपने हृदयोद्गार व्यक्त करते हुए अपने आराध्य के चरणों की वंदना की। 

टिटिलागढ़ की विधायक श्रीमती टुकनी साहू ने आचार्यश्री का मंगल प्रवचन श्रवण के पश्चात अपनी भावाभिव्यक्ति देते हुए कहा कि मैं शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी का अपने विधानसभा क्षेत्र के इस टिटिलागढ़ में हार्दिक स्वागत-अभिनन्दन करती हूं। गुरुजी! आपके आगमन से यहां की हमारी माटी पावन हो गई। आप तो जहां-जहां भी पधारते हैं वहां की भूमि अपने आप पावन बन जाती है। आप जो अहिंसा का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं, इससे सबका लाभ होगा। आपके प्रवचन से हम अपने जीवन को अच्छा बनाने का प्रयास करूंगी और आपसे लिए संकल्पों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास करूंगी। 

टिटिलागढ़ नगर के नगरपाल श्री गोर्वधन नाग ने कहा कि महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी आप तो साक्षात् भगवान के स्वरूप हैं, जो हम टिटिलागढ़वासियों को दर्शन देने के लिए पधारे हैं। टिटिलागढ़वासियों को सुखी बनाने और शांतिमय जीवन जीने की प्रेरणा देने आए हैं। आपके दर्शन कर हमारा जीवन धन्य हो गया। नगरपाल ने आचार्यश्री के समक्ष नगर की चाभी भी सौंपी आचार्यश्री आचार्यश्री से नगरवासियों के लिए मंगल आशीर्वाद की प्रार्थना की। इसके उपरान्त टिटिलागढ़ तेरापंथ समाज के सभी सदस्यों ने सामूहिक रूप से गीत का संगान कर अपने आराध्य की अभिवन्दना की। टिटिलागढ़ तेरापंथी सभा के अध्यक्ष श्री ओमप्रकाश जैन ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। श्री श्रेयांश बैद ने अपनी हस्तकलाकृति को आचार्यश्री के समक्ष अर्पित किया। कार्यक्रम का संचालन समणी कमलप्रज्ञाजी ने किया। 

Ahimsa Yatra at Odisha, Titlagarh 

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