आत्मा को पापों से बचाएं - आचार्य श्री महाश्रमण


टिटिलागढ़ प्रवास के अंतिम दिन सम्यक्त्व दीक्षा के रूप में टिटिलागढ़वासियों को मिली सौगात 

Pujya Aacharya Shri Mahashraman ji at Titlagarh, Odisha , Day 3

ABTYP JTN 11.03.2018 टिटिलागढ़, बलांगीर (ओड़िशा) : उत्साह, उमंग, उल्लास व अहोभाव से ओतप्रोत टिटिलागढ़वासियों को त्रिदिवसीय प्रवास के अंतिम दिन अपने अराध्य के श्रीमुख से सम्यक्त्व दीक्षा (गुरुधारणा) की सौगात प्राप्त हुई तो मानों श्रद्धालु अपने आराध्य से ऐसी सौगात पाकर निहाल हो उठे। सम्यक्त्व दीक्षा के निर्धारित समय पर आचार्यश्री ने श्रद्धालुओं को दीक्षा प्रदान कर उन्हें अपने जीवन में संकल्पों को पालन करने की पावन करने की प्रेरणा प्रदान की। इसके उपरान्त श्रद्धालुओं ने अपने आराध्य को सविधि वंदन इस सौगात को अपने सिर-माथे धारण कर अभ्यर्थना की। 

बलांगीर जिले के टिटिलागढ़ में त्रिदिवसीय प्रवास के अंतिम दिन रविवार को नगर स्थित श्री गोविन्द वाटिका परिसर में बने अध्यात्म समवसरण में उत्साही श्रद्धालु अपने आराध्य की निकट उपासना, दर्शन और प्रवचन श्रवण को समय से पूर्व ही उपस्थित हो चुके थे। श्रद्धालुओं को पहले महाश्रमणी साध्वीप्रमुखाजी व साध्वीवर्याजी द्वारा मंगल संबोध प्राप्त हुआ। 

उसके उपरान्त मंच पर उदित हुए तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें देदीप्यमान महासूर्य, शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को पहले अपनी अमृतवाणी का रसपान कराते हुए कहा कि आदमी को अकेलेपन का चिन्तन करना चाहिए। आदमी यह सोचे कि वह अकेला है। वह अकेला जन्मा है, अकेला कर्म करता है, अकेले ही कर्मों का फल भोगता है ओर अकेले ही मृत्यु को प्राप्त हो जाता है। इस असार संसार में कोई अपना नहीं। आदमी को अपने किए गए कर्मों का फल स्वतः भोगना होता है, उसमें कोई भागीदार नहीं बनता है। इसलिए आदमी को अकेलेपन का चिन्तन कर अपने कर्मों को अच्छा बनाने का प्रयास करना चाहिए। कर्म अच्छे होंगे तो आदमी की आत्मा का कल्याण हो सकता है और बुराइयों से बच सकता है। आदमी एक आत्मा मात्र शाश्वत है, बाकि सब दुनिया में संयोग वाले हैं। जिनका संयोग होता है, उनका वियोग होता है। इसलिए आदमी अकेलेपन का अनुभव करे और अपनी आत्मा को पापों से बचाने का प्रयास करे, तो उसकी आत्मा कल्याण को प्राप्त कर सकती है। 

मंगल प्रवचन के उपरान्त आचार्यश्री ने टिटिलागढ़वासियों को अंतिम दिन अनमोल सौगात प्रदान करते हुए अपने श्रीमुख से सम्यक्त्व दीक्षा ग्रहण करवाई। अपने आराध्य की इस कृपा से श्रद्धालु अतिशय भावविभोर थे। आचार्यश्री के मंगल प्रवचन के उपरान्त मुख्यमुनिश्री ने अपने सुमधुर स्वर में गीत का संगान किया तो आचार्यश्री ने भी साथ में उस गीत का आंशिक संगान किया। तत्पश्चात् बेंगलुरु के श्री कांतिलालजी ने आचार्यश्री के समक्ष अपनी भावाभिव्यक्ति दी। टिटिलागढ़ महिला मंडल और कन्या मंडल ने संयुक्त रूप से अपनी प्रस्तुति दी। महिला मंडल अध्यक्ष श्रीमती कृष्णा जैन ने अपनी हर्षाभिव्यक्ति दी। पश्चिम ओड़िशा प्रान्तीय सभा के पूर्व मंत्री श्री सुरेन्द्र कुमार जैन, श्री ईश्वरचंद जैन ने भी अपने आराध्य के समक्ष अपने भावसुमन अर्पित किए। नवदीक्षित समणी ओजस्वीप्रज्ञाजी ने भी आचार्यश्री के चरणों की अभ्यर्थना अपने भावों से की। अंत में महिलाओं द्वारा गीत का संगान किया गया। 


Acharya Mahashraman at Titlagarh Day 3



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