राम के नाम से आदमी के भीतर से बुराइयां बाहर निकले - आचार्य श्री महाश्रमण जी


25.03.2018 मुनीगुड़ा, रायगढ़ा (ओड़िशा), JTN, रविवार को आचार्यश्री अपनी धवल सेना के साथ शिबापदार स्थित आश्रम विद्यालय से मंगल प्रस्थान किया। बढ़ती गर्मी में आज का मौसम लोगों को राहत देने वाला था, क्योंकि आज आसमान में सुबह से बादलों का पहरा था। इस कारण आसमान में विहरण करने वाले सूर्य की किरणें धरती के स्पर्श से वंचित थी। इस कारण मौसम सुहावना बना हुआ था। मार्ग के दोनों ओर कभी दूर तो कभी पास दृश्यमान हो रहे पहाड़ और वृक्षों के समूह इस क्षेत्र को वन्यक्षेत्र के रूप में स्थापित करने में अपनी भूमिका निभा रहे थे। आचार्यश्री आज लगभग 14 किलोमीटर का विहार कर मुनीगुड़ा की सीमा में प्रवेश किया तो यहां रहने वाले श्रद्धालु मानों भावविभोर उठे। उन्हें ऐसा लग रहा है जैसे उनके सोए भाग्य एक साथ जगें हों, जिसकी निष्पत्ति उनके आराध्य के उनके आंगन में दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हो रहा था। वे अपने आराध्य का अभिनन्दन करने के लिए आतुर नजर आ रहे थे। इन श्रद्धालुओं के साथ ओड़िया परंपरा और संस्कृति को दर्शाती स्थानीय पारंपरिक वस्त्रों व वाद्ययंत्रों से सुसज्जीत लोग वाद्ययंत्रों की मंगल ध्वनि के साथ आचार्यश्री का मुनीगुड़ा की धरती पर अभिवादन कर रहे थे। मुनिगुड़ा में मुनियों के आराध्य आचार्यश्री महाश्रमणजी का अभिनन्दन लोगों को भावविभोर बनाए हुए था। भव्य जुलूस के साथ आचार्यश्री मुनीगुड़ा स्थित मारवाड़ी पंचायत धर्मशाला में पधारे। धर्मशाला के सामने बने प्रवचन पंडाल में उपस्थित श्रद्धालुओं को आचार्यश्री ने मंगल उद्बोध प्रदान करने से पूर्व अपने श्रीमुख से सम्यक्त्व दीक्षा (गुरुधारणा) प्रदान की तो श्रद्धालुओं को अपने आराध्य से अमूल्य निधि प्राप्त हो गई। 

इसके उपरान्त आचार्यश्री ने लोगों को रामनवमी के अवसर पर पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि आज का दिन रामचन्द्रजी से जुड़ा हुआ है। दुनिया में समय-समय पर महापुरुष जन्म लेते हैं, मानों यह दुनिया का सौभाग्य है। रामचन्द्रजी राजा दशरथ के पुत्र थे। उनके जीवन में भी संघर्ष आए, किन्तु संघर्षों में भी वे अपने आदर्श पर चले और उनका समता भाव प्रबल बना रहा। कितने ग्रंथ और कितनी भाषाओं में रामायण आदि उनके चरित्र लिखा गया है। कितने लोग राम-राम का जप करते हैं। राम बोलने के पीछे रा बोलने से पाप बाहर निकलता है और म बोलने से पाप के आने का द्वार बंद होता है। राम के नाम से आदमी के भीतर से बुराइयां बाहर निकले। 

आचार्यश्री ने आज के दिन से जुड़े हुए आचार्य भिक्षु अभिनिष्क्रमण का भी वर्णन करते हुए कहा कि आज के ही दिन स्थानकवासी संप्रदाय से आचार्य भिक्षु ने अभिनिष्क्रमण किया था, मानों यह तेरापंथ धर्मसंघ की पृष्ठभूमि से जुड़ा हुआ दिन है। आज के दिन आचार्य भिक्षु को श्रद्धा के साथ स्मरण करते हैं।

अपने मंगल उद्बोधन के उपरान्त आचार्यश्री ने लोगों को अहिंसा यात्रा के तीनों संकल्प भी स्वीकार कराए। आचार्यश्री के स्वागत में सर्वप्रथम महिला मंडल ने स्वागत गीत का संगान किया। मुनीगुड़ा तेरापंथी सभाध्यक्ष श्री जगत प्रसाद जैन, श्री भूपेन्द्रसिंह जैन, श्री मोहनलाल जैन व सुश्री ऋषिका जैन ने अपने श्रद्धासिक्त भावों को अभिव्यक्त किया तथा आचार्यश्री से पावन आशीर्वाद प्राप्त किया। 

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