कुरसुड़ की धरा महातपस्वी का चरणरज पाकर हुई पावन


आचार्यश्री की पावन प्रेरणा से कुरसुड़वासी हुए लाभान्वित 

05.03.2018 कुरसुड़, बलांगीर (ओड़िशा)ः जन-जन को सद्भावना, नैतिकता और नशामुक्ति का संदेश देने वाली अहिंसा यात्रा अपने प्रणेता, जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ ग्यारहवें आचार्य, महातपस्वी, अखंड परिव्राजक तथा समाज सुधारक आचार्यश्री महाश्रमणजी के संग पश्चिम ओड़िशा की धरती पर इन संदेशों को प्रसारित कर रही है। जनमानस इन संदेशों को संकल्प के रूपी में स्वीकार भी कर रहा है और उसे पालन का प्रयास भी कर रहा है। 

आचार्यश्री की पश्चिम ओड़िशा की यात्रा मानों उत्साह से लबरेज है। छोटे-छोटे क्षेत्रों में भी वर्षों से अपने आराध्य की प्रतीक्षा में रत रहने वाले वाले श्रद्धालुओं को जहां अपने घर-आंगन में अपने आराध्य के दर्शन, उपासना, आध्यात्मिक प्रेरणा और पाथेय प्राप्त करने का सुअवसर प्राप्त हो रहा है तो वहीं अन्य जैनेतर लोगों को भी एक महापुरुष के दर्शन और उनकी मंगलवाणी को नजदीक से सुनने का सुअवसर प्राप्त हो रहा है। इस कारण यह उत्साह केवल जैन तेरापंथ धर्मसंघ को अथवा जैन समाज में ही नहीं, अन्य जैनेतर संगठनों में भी मानों वर्तमान में नवीन ऊर्जा का संचार हो गया है। सभी ऐसे महातपस्वी, अखंड परिव्राजक की एक झलक पाने को कितने बेकरार हैं, यह उनके चेहरे पर व्याप्त प्रसन्नता को देखकर आंका जा सकता है। 

उत्साहमय माहौल में आचार्यश्री महाश्रमणजी अपनी धवल सेना के साथ सोमवार की प्रातः सिंधीकेला से प्रस्थित हुए। मार्गवर्ती लोगों को दर्शन देते और अपने आशीर्वाद से अभिसिंचन प्रदान करते हुए आचार्यश्री निरंतर आगे बढ़ रहे थे। लगभग तीन किलोमीटर का विहार कर आचार्यश्री चांदोतारा गांव पहुंचे। जहां आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में संक्षिप्त कार्यक्रम का आयोज्य हुआ। वहां के लोगों को पावन प्रेरणा प्रदान करने के उपरान्त आचार्यश्री एकबार पुनः यात्रायित हुए और लगभग चार किलोमीटर का और विहार कर कुरसुड़ स्थित तेरापंथ भवन पधारे। उत्साहित श्रद्धालुओं, स्कूली बच्चों और अन्य ग्रामीणों ने आचार्यश्री का भावभीना स्वागत किया। 

प्रवास स्थल से कुछ दूरी निर्धारित प्रवचन पंडाल में उपस्थित श्रद्धालुओं को आचार्यश्री ने पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि कोई आदमी दूसरों पर अनुशासन करे, वह कोई खास बात नहीं होती। जो आदमी स्वयं पर अनुशासन करता है, वह खास होता है। दूसरों पर अनुशासन करना भी एक कला हो सकता है, किन्तु स्वयं पर अनुशासन करना दुष्कर कार्य हो सकता है। आदमी को स्वयं पर अनुशासन करने के लिए ध्यान-साधना का प्रयोग करने का प्रयास करना चाहिए। इसके द्वारा आदमी को अपनी आत्मा का कल्याण करने का प्रयास करना चाहिए। 

आचार्यश्री ने अपने मंगल प्रवचन के उपरान्त कुरसुड़वासियों को अहिंसा यात्रा की अवगति प्रदान की और इसके तीनों संकल्पों को स्वीकार करने का आह्वान किया तो उपस्थित विद्यार्थियों, शिक्षकों, ग्रामीणों व अन्य श्रद्धालुओं ने भी हर्षित भाव से संकल्पत्रयी स्वीकार की। 

अपने आराध्य की अभिवन्दना में कुरसुड़ की कन्याओं ने गीत का संगान किया। इसके उपरान्त श्री मुकेश जैन, सुश्री लीनू जैन, सुश्री खुशबू जैन, स्थानीय तेरापंथ युवक परिषद में मंत्री श्री मनोज जैन व निखिल अग्रवाल आदि ने अपनी हर्षाभिव्यक्ति दी। इसके उपरान्त ज्ञानशाला के ज्ञानार्थियों ने अपनी प्रस्तुति के द्वारा अपने आराध्य की अभ्यर्थना की। 




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