सामायिक साधना का एक अनुष्ठान है : आचार्य श्री महाश्रमण जी

ज्योतिचरण से पावन हुआ गोतलाम स्थित गायत्री इंस्टिट्यूशन परिसर
सामायिक की कमाई को जीवन की दशा को सुधारने का आचार्यश्री ने दिया पावन संदेश
10.04.2018 गोतलाम, विजयनगरम् (आंध्रप्रदेश), JTN, दक्षिण की धरा पर सद्भावना, नैतिकता और नशामुक्ति के संदेशों को लेकर गतिमान हो चुके अहिंसा यात्रा के प्रणेता, जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशम देदीप्यमान महासूर्य आचार्यश्री महाश्रमणजी अपनी धवल सेना के साथ मंगलवार को अपनी धवल सेना के साथ गोतलाम स्थित गायत्री इंस्टिट्यूशन परिसर में पधारे तो मानों इंस्टिट्यूशन परिसर महातपस्वी के ज्योतिचरण से पावन हो उठा। इस इंस्टिट्यूशन ग्रुप से जुड़े हुए पदाधिकारियों, कर्मचारियों व विद्यार्थियों ने महातपस्वी का हार्दिक स्वागत-अभिनन्दन किया तो आचार्यश्री ने विद्यालय परिसर में अपने पावन प्रवचन में 24 घंटों में कुछ समय धर्म-ध्यान में लगाने की पावन प्रेरणा प्रदान करते साथ ही तेरापंथी श्रद्धालुओं को सामायिक की कमाई करने की भी पावन प्रेरणा प्रदान की। 
मानवीय मूल्यों की स्थापना के द्वारा जन-जन का मंगल करने निकले महातपस्वी, शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी अपनी धवल सेना के साथ सोमवार को सान्ध्यकालीन विहार कर बोण्डापल्ली पधारे थे। जहां रात्रि में बारिश ने भी महातपस्वी की अभिवन्दना की। मंगलवार को प्रातः बोण्डापल्ली से आचार्यश्री मंगल प्रस्थान करते इससे पहले ही काफी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हो गए थे। आचार्यश्री ने प्राथमिक विद्यालय से जैसे ही मंगल प्रस्थान किया तो श्रद्धालु जयघोष करते हुए अपने आराध्य के साथ चल पड़े। गांव के बीच से निकल रहे ऐसे महातपस्वी के दर्शन करने को ग्रामीणों की उत्सुकता भी देखने वाली थी। वे भी आचार्यश्री के दर्शन को पहुंच रहे थे और आचार्यश्री उन सभी पर अपने दोनों कर कमलों से आशीषवृष्टि करते हुए गतिमान बने हुए थे। कुछ दिनों से मौसम की बात करें तो पूरे दिन भयंकर गर्मी के बाद अपराह्न का समय बादलों से भर हुआ हो जाता है। ठंडी हवाएं वातावरण को शीतल बना देती है और एकाध दिन को छोड़ दें बरसात भी हो जाती है जो सायं और रात्रि के माहौल को और शीतल बना देती है। आज जैसे-जैसे सूर्य आसमान में चढ़ रहा था, तापमान भी चढ़ता जा रहा था। आचार्यश्री लगभग नौ किलोमीटर का विहार कर गोतलाम स्थित गायत्री इंस्टिट्यूशन परिसर के गायत्री इंग्लिश मीडियम स्कूल में पधारे। परिसर के मुख्य दरवाजे पर इस इंस्टिट्यूशन से जुड़े हुए पदाधिकारियों, शिक्षकों व विद्यार्थियों ने आचार्यश्री का भव्य स्वागत किया। 
आचार्यश्री विद्यालय परिसर में उपस्थित श्रद्धालुओं को पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि संसार में चार गतियां हैं-नरक, तिर्यंच, मनुष्य और देव। इन चार गतियों और 84 लाख जीव योनियोें में जीव अपने कृत कर्मों के आधार पर फल भोगता और भ्रमण करता रहता है। पाप के फलों को भोगने के लिए नरक गति मंे जाना होता है। सामान्यतया आदमी नरक में जाने से बचने का प्रयास करता है। नरक में जाने से बचने के लिए आदमी को पाप कर्मों से बचने और धर्म-ध्यान में समय लगाने का प्रयास करना चाहिए। 
दिन-रात्रि मिलाकर 60 घड़ियां (24 मिनट की एक घड़ी) होती हैं। आदमी 58 घड़ियों में काम करे और दो घड़ियां मात्र धर्म-ध्यान में लगाए तो उसके जीवन का कल्याण हो सकता है और वह नरक में भी जाने से बच सकता है। आचार्यश्री ने तेरापंथी श्रद्धालुओं को सामायिक के माध्यम से अपने जीवन को अच्छा बनाने की पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए राजा श्रेणिक और पूनिया श्रावक की कथा सुनाई। आचार्यश्री ने कहा कि सामायिक साधना का एक अनुष्ठान है। एक मुहूर्त (48 मिनट) की सामायिक एक सुन्दर अनुष्ठान है। सामायिक अर्थात् जिसमें समय भाव की आय हो और सावद्य योग का त्याग हो। तेरापंथी श्रावक-श्राविकाएं शनिवार की सायं सात से आठ बजे के बीच सामायिक का प्रयास करे तो भी धर्म की अच्छी कमाई हो सकती है। यों तो प्रयास करना चाहिए कि प्रतिदिन प्रातः नाश्ते से पहले एक सामायिक हो जाए तो यह आत्मा के लिए अमृत प्राप्ति की बात हो सकती है। इसलिए आदमी को अपने समय को कुछ समय धर्म-ध्यान में भी लगाने का प्रयास करना चाहिए। आचार्यश्री ने मंगल प्रवचन के उपरान्त इस इंस्टिट्यूशन के प्रिंसिपल श्री लक्ष्मी नारायण व उपस्थित छात्रों को संकल्पत्रयी स्वीकार करवाई। श्री लक्ष्मीनारायण ने आचार्यश्री के स्वागत में अपनी भावाभिव्यक्ति अर्पित कर आचार्यश्री से पावन आशीर्वाद प्राप्त किया। 

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