आदमी अनेक पाप कर्मों से भी बच सकता है : आचार्यश्री महाश्रमण


26.05.2018 तेलाप्रोलू, वेस्ट गोदावरी (आंध्रप्रदेश), JTN, मन योग शुभ भी हो सकता है और अशुभ भी हो सकता है। वचन योग भी शुभ और अशुभ हो सकता है। इसी प्रकार काय योग भी शुभ और अशुभ हो सकता है। मन में बुरे विचार आ आएं तो मन योग अशुभ हो जाता है। मन में बुरा करने का विचार आने अथवा गुस्सा आने के उपरान्त यदि आदमी अपनी जुबान से गालियां देना अथवा किसी को कटु शब्द बोलना आरम्भ कर देता है तो आदमी की वाणी भी अशुभ हो जाती है। गुस्सा और आवेश आने के उपरान्त यदि आदमी किसी को मारने-पीटने लगे तो यह काय (शरीर योग) की अशुभ प्रवृत्ति हो जाती है। आदमी को अपने मन, वचन और काय योग शुभ बनाने का प्रयास करना चाहिए। योग शुभ होते हैं तो आदमी आने पापों से बच सकता है। 

उक्त प्रेरणास्पद ज्ञान जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, अहिंसा यात्रा के प्रणेता, शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी ने शनिवार को वेस्ट गोदावरी जिले के तेलाप्रोलू गांव स्थित उषा रमा काॅलेज आॅफ इंजीनियरिंग एण्ड टैक्नोलाॅजी के परिसर में उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रदान की।अपनी धवल सेना के साथ दक्षिण भारत को पावन बनाने निकले आचार्यश्री वेस्ट गोदावरी जिले की धरा को पावन बना रहे हैं। शनिवार को आचार्यश्री प्रातः अप्पनानविडू स्थित जिला परिषद हाइस्कूल से मंगल प्रस्थान किया। आज का कुल विहार लगभग चैदह किलोमीटर का था। बढ़ती गर्मी, उमस भरा वातावरण और तन से टपकते पसीने से पूरे जन-जीवन को बेहाल बना रहे मौसम के बावजूद आचार्यश्री महाश्रमणजी के ज्योतिचरण गतिमान हुए। आचार्यश्री राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या सोलह पर गतिमान थे। आचार्यश्री की कुशल नेतृत्व में राजमार्ग से गुजरती श्वेत सेना किसी को भी अपनी ओर आकर्षित करने में सक्षम थी। भाषाई दूरी होनके बावजूद भी किसी प्रकार आचार्यश्री के विषय में जानकारी प्राप्त लोग श्रद्धा के साथ प्रणेत हो रहे थे तो आचार्यश्री भी उन्हें अपने पावन आशीष रूपी अभिसिंचन प्रदान कर रहे थे। आचार्यश्री लगभग चैदह किलोमीटर का विहार कर तेलाप्रोलू स्थित उषा रमा काॅलेज आॅफ इंजीनियरिंग एण्ड टेक्नोलाॅजी परिसर में पधारे। आचार्यश्री के चरणरज को प्राप्त कर यह काॅलेज परिसर अपने आपमें धन्यता की अनुभूति कर रहा था।

काॅलेज परिसर में बने प्रवचन पंडाल में उपस्थित श्रद्धालुओं को आचार्यश्री ने अपने मन, वचन और काय को शुभ योग में रखने की पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि आदमी को अपने मन में अच्छे आध्यात्मिक विचार लाने, धार्मिक ध्यान व सेवा आदि के भाव को रखने का प्रयास करना चाहिए। यदि आदमी के मन में गुस्सा के कारण मन अशुभ योग में जाए तो भी आदमी को अपनी वाणी और कार्या को शुभ योग में रखने का प्रयास करना चाहिए। वाणी से पवित्र स्तवन, स्वाध्याय, नाम जप आदि तो शरीर से किसी की सेवा आदि हो तो शुभ योग की स्थिति हो सकती है और इस प्रकार आदमी अनेक पाप कर्मों से भी बच सकता है। 

शनिवार होने के कारण आचार्यश्री ने उपस्थित श्रद्धालुओं को शनिवार की सायं सात से आठ बजे के बीच सामायिक करने की पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि सामायिक के दौरान सावद्य योगों को त्याग होता है, इसलिए सामायिक के माध्यम से भी आदमी अपने मन, वचन और काय योग को शुभ बना सकता है। 

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