माधावरम में महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमण जी का भव्य चातुर्मासिक मंगल प्रवेश


अपने आराध्य के अभिनन्दन को उमड़ा पड़ा संपूर्ण भारत, पुलकित हो उठी दक्षिण की धरा
पूज्य प्रवर के स्वागत में स्वयं पहुंचे तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पलनीसामी

21.07.2018 माधावरम, चेन्नई (तमिलनाडु): लगभग आधी सदी बाद चेन्नई की धरती पर दूसरी बार तो वहीं दक्षिण भारत की धरती तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में अपनी धवल सेना के साथ प्रथम चतुर्मास करने पहुंचे जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, अहिंसा यात्रा के प्रणेता, अखण्ड परिव्राजक, महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी शनिवार को मंगल बेला में चेन्नई महानगर के माधावरम स्थित चतुर्मास प्रवास स्थल में वर्ष 2018 के चतुर्मास के लिए मंगल प्रवेश किया। मंगल प्रवेश करते ही कीर्तिधर महापुरुष आचार्यश्री महाश्रमणजी ने चेन्नई व तेरापंथ के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय का अंकन कर दिया। 
जन-जन में सद्भावना, नैतिकता और नशामुक्ति की भावना को जागृत करने के लिए अपनी धवल सेना के साथ 9 नवम्बर 2014 को नई दिल्ली के लालकीले से प्रस्थान करने वाले जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान देदीप्यमान महासूर्य आचार्यश्री महाश्रमणजी ने अपनी दृढ़ संकल्प शक्ति के साथ गतिमान हुए तो अपने कोमल कदमों से भारत के चैदह राज्य की धरती के साथ ही दो विदेशी धरती नेपाल और भूटान को भी पावन बना कर मानवता के संदेश को जन-जन के मानस में मानों प्रतिष्ठित-सा कर दिया। 
15 दिनों तक चेन्नई महानगर के उपनगरों की श्रमशील यात्रा के उपरान्त शनिवार को आचार्यश्री का चेन्नई के माधावरम् चातुर्मासिक प्रवेश निर्धारित था। निर्धारित कार्यक्रमानुसार सूर्योदय के कुछ समय पश्चात ही आचार्यश्री महाश्रमणजी अपनी धवल रश्मियों के साथ व्यासरपाड़ी स्थित विवेकानंद स्कूल से प्रस्थित हुए। 
 कुछ किलोमीटर की यात्रा कर आचार्यश्री जैसे ही एनीज प्राइमरी स्कूल के निकट पहुंचे तो मानों वहां संपूर्ण भारत महातपस्वी के अभिनन्दन में करबद्ध खड़ा था। पुलकित थी दक्षिण की धरा, हर्षित था चेन्नई का कण-कण और प्रमुदित थी माधावरम की धरा जहां तेरापंथ धर्मसंघ के कीर्तिधर महापुरुष आचार्यश्री महाश्रमणजी का दक्षिण की धरा का प्रथम चतुर्मास होने वाला था। अपने-अपने विभिन्न वेशभूषा में सजे, बालक, किशोर, युवा, प्रौढ़, वृद्ध पुरुष व महिला सभी अपने करबद्ध अपने आराध्य की अभिवन्दना में उपस्थित थे। हजारों जुड़े हाथ और हजारों नयन इस नयनाभिराम और अविस्मरणीय पल को अपने नयनों से निहारने को उदृधत था। निर्धारित समयानुसार अपनी विशाल श्वेत रश्मियों के साथ आचार्यश्री महाश्रमणजी ने माधावरम के लिए कदम बढ़ाए तो मानों इस मार्ग पर एक अलौकिक दृश्य बन गया। श्वेत सेना की सुसज्जीत व अनुशासित पंक्तिबद्ध कतारों के मध्य देदीप्यमान हो रहे महासूर्य और उनके पीछे विभिन्न झाकियों संग श्रद्धालुओं का अपार जनसमूह जब अपने आराध्य के पदचिन्हों का अनुगमन करते हुए गतिमान हुआ तो पूरा मार्ग जनाकीर्ण बन गया। गूंजते जयनिनादों से संपूर्ण वातावरण महाश्रमय बन रहा था। 
विशाल व भव्य जुलूस के साथ आचार्यश्री महाश्रमणजी लगभग 8.21 बजे माधावरम में बने चतुर्मास प्रवास स्थल में मंगल प्रवेश किया तो समूचा आकाश ‘जय-जय ज्योतिचरण, जय-जय महाश्रमण’ के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। आचार्यश्री ने आचार्यश्री महाश्रमण चतुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष श्री धर्मचंद लूंकड़ व उनकी संपूर्ण टीम से स्थान का अनुमति मांगी और परिसर में प्रवेश किया। 
चतुर्मास प्रवास स्थल में बने विराट महाश्रमण समवसरण में आचार्यश्री का मंगल पदार्पण हुआ तो उपस्थित जनमेदिनी से विशाल पंडाल की छोटा पड़ गया। आचार्यश्री के मंगल महामंत्रोच्चार के साथ कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। तेरापंथ महिला मंडल, तेरापंथ युवक परिषद-चेन्नई ने अपने-अपने स्वागत गीतों के माध्यम से अपने आराध्य की अभिवन्दना की। वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री अशोक खटेड़, टीपीएफ चेन्नई के अध्यक्ष श्री दिनेश धोका व श्री देवराज आच्छा ने अपने भावोद्गार व्यक्त किए। इसके उपरान्त लगभग दस बजे आचार्यश्री का स्वागत करने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री श्री ई.के. पलनीसामी मंच पर पधारे। उन्होंने आचार्यश्री को वंदन कर पावन आशीर्वाद प्राप्त करने के उपरान्त मंचासीन हुए। उनके साथ अन्य राजनैतिक गणमान्य महानुभाव भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री के आगमन के उपरान्त तमिल संगान हुआ। श्रीमती माला कातरेला ने कार्यक्रम और मुख्यमंत्री के विषय में अवगति प्रदान की। 
महाश्रमण समवरण से अपना प्रथम मंगल उद्बोधन प्रदान करते हुए आचार्यश्री ने अपने पावन प्रवचन में कहा कि आदमी के मन में मंगल की चाह होती है। मंगल के लिए मनुष्य प्रयास भी करता है। दुनिया से उत्कृष्ट मंगल धर्म को बताया गया। धर्म मंगलकारी है। जहां धर्म वहां मंगल। अहिंसा, संयम और तप धर्म है। अहिंसा परम धर्म है। जिसका मन धर्म में रत रहता है, देवता भी उसे नमस्कार करते हैं। अहिंसा अमृत के समान होती है। जहां अहिंसा होती है, वहां शांति होती है और जहां हिंसा होती है, वहां अशांति हो सकती है। 
आचार्यश्री ने चेन्नई चतुर्मास प्रवेश के संदर्भ में कहा कि हम आज चतुर्मास के लिए चेन्नई के इस माधावरम में आए हैं। आचार्यश्री ने अहिंसा यात्रा के विषय में अवगति प्रदान कर लोगों को अहिंसा यात्रा के तीनों संकल्पों को स्वीकार करने का आह्वान किया तो उपस्थित लोगों ने संकल्पत्रयी स्वीकार की। आचार्यश्री ने कहा कि सद्भावना, नैतिकता और नशामुक्ति--तीनों चीजें जीवन में रहें तो जीवन अच्छा हो सकता है। जीवन में संयम और तपस्या रहे तो जीवन मंगलकारी हो सकता है। आज तमिलनाडु के मुख्यमंत्री भी पहुंचे हैं। तमिलनाडु की जनता में खूब शांति रहे। उनके मन में सद्भावना रहे, शांति रहे। जनता नशामुक्त रहे और नैतिकता और आध्यात्मिकता का विकास हो। 
आचार्यश्री के मंगल उद्बोधन के उपरान्त मुख्यमंत्री श्री ई.के. पलनीसामी ने तमिल भाषा में अपनी भावाभिव्यक्ति देते हुए आचार्यश्री का अपनी धरती पर स्वागत-अभिनन्दन किया। तत्पश्चात महाश्रमणी साध्वीप्रमुखाजी ने चेन्नईवासियों को इस सुअवसर का लाभ पूर्ण जागरूकता के साथ उठाने की प्रेरणा प्रदान की। मुख्यमुनि महावीरकुमारजी, मुख्यनियोजिका साध्वी विश्रुतविभाजी ने भी श्रद्धालुओं को उत्प्रेरित किया। 
मुख्यमंत्री व अन्य महानुभावों को आचार्यश्री महाश्रमण चतुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष श्री धर्मचंद लूंकड़, श्री रमेशचंद बोहरा, श्री प्यारेलाल पितलिया, व अन्य पदाधिकारियों द्वारा स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया। तदुपरान्त आचार्यश्री महाश्रमण चतुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष श्री धर्मचंद लूंकड़ ने अपने हृदयोद्गार व्यक्त किए। स्वागताध्यक्ष श्री प्यारेलाल पितलिया ने भी आचार्यश्री की अभ्यर्थना की। उपासक/उपासिका श्रेणी द्वारा गीत का संगान हुआ। साध्वी प्रियंवदाजी ने अपने आराध्य की अभिवन्दना में अपनी भावाभिव्यक्ति दी। ज्ञानशाला के ज्ञानार्थियों, किशोर मंडल व कन्या मंडल द्वारा पृथक-पृथक प्रस्तुति दी गई। आचार्यश्री महाश्रमण चतुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति बेंगलुरु के अध्यक्ष श्री मूलचंद नाहर ने भी अपनी भावाभिव्यक्ति दी। तुलसी संगीत मंडली ने गीत के द्वारा अपने आराध्य की अभिवन्दना की। 










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