आचार्यश्री महाश्रमणजी ने चेन्नई चातुर्मास संपन्न कर किया विहार

- धवल सेना के साथ किया मंगल विहार 
- नम आँखों से दी श्रद्धालुओं ने विदाई
- जनाकीर्ण हुआ नैशनल हाइवे रोड 
- पुलिस प्रशासन का मिला अतुलनीय सहयोग 
- कोयम्बटुर को दिया दायित्व हस्तांतरण, सौंपा ध्वज

चेन्नई  24-11-2018 माधावरम् स्थित जैन तेरापंथ नगर के नमस्कार सभागार में चातुर्मास की सम्पन्नता में विहार से पुर्व अन्तिम पाथेय प्रदान करते हुए आचार्य श्री महाश्रमण ने कहा कि जैन शासन में साधु का विहार क्रम बताया गया हैं। सामान्यतया अपेक्षा न हो तो साधु को एक जगह जमकर नहीं रहने का प्रावधान है, कारण विशेष अलग बात है। साधु चातुर्मास सम्पन्नता पर चातुर्मासिक स्थल को छोड़ दे। विहार करने से अनेक लाभ हो सकते हैं, तो कोई समस्या भी आ सकती हैं।
  आचार्य श्री ने आगे कहा कि जहां हमारा चातुर्मासिक प्रवास रहा, जो स्थान हैं, बाद में यहां विद्यालय शुरू करने की योजना हैं। आपने कहा भगवान महावीर हमारे आराध्य थे। आचार्य श्री भिक्षु हमारे आध्यप्रर्वतक थे। उत्तरवर्ती आचार्यों ने गण की शोभा बढ़ाई। गुरूदेव तुलसी और आचार्य श्री महाप्रज्ञजी की छत्रछाया में हम रहे। आचार्य श्री तुलसी भी पच्चास वर्ष पूर्व चेन्नई पधारे थे। ये चातुर्मासिक स्थल जहां हम रह रहे थे, साध्वियां भी पास की बिल्डिंग में विराजित थे।                 
  आचार्य प्रवर ने भवन को संभलाते हुए कहा कि इस ट्रस्ट के श्री देवराजजी आच्छा अध्यक्ष है, व्यवस्था समिति के श्री धरमचन्दजी लूंकड़ अध्यक्ष है, अन्य सभी पदाधिकारी है। जब हम यहां चातुर्मास करने आये थे, तब यह भवन जांचा था। आज वापस भूला रहे हैं, संभला रहे हैं और कोई पाट बाजोट आदि भी जो आपके थे, वापस सुपुर्द कर रहे हैं।
  मंगल पाथेय से पुर्व जैसे ही आचार्य प्रवर ने जनमेदनी को निहारा, पुरा जैन तेरापंथ नगर जय जय ज्योतिचरण, जय जय महाश्रमण इत्यादि नारों से ऐसा गुंजायमान हुआ, जैसे समुन्द्र में लहरें उठ रही हो। आचार्य प्रवर ने लगभग 08.15 बजे अन्तिम मंगल पाठ सुनाकर मंगल विहार किया।
अनुकम्पा हमारी चेतना को आगे बढ़ाने वाली
  आचार्य श्री अहिंसा यात्रा के प्रथम पड़ाव के रूप में रेड हिल्स स्थित रमेश राइस मील पहुंचने पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए आचार्य श्री महाश्रमण ने भगवान महावीर और मुनिमेघ के संवाद को बताते हुए कहा कि भगवान महावीर ने एक ओर मुनिमेघ के मन में संयम उजागर कर स्थिर करने का प्रयास किया, तो दूसरी और पशु में भी अनुकम्पा के भाव जगाने का प्रयास किया था। अनुकम्पा हमारी चेतना को आगे बढ़ाने वाली है। मोक्ष की ओर बढ़ाने वाली है। दया, कल्याण को पैदा करती है, दुःख और पाप का नाश करने वाली हैं, संसार समुद्र पार करने में नौका के समान हैं। हमारे में दया, अनुकंपा की चेतना जागृत हो। अहिंसा की साधना नहीं, तो अनेक पाप कर्म बंध हो सकते हैं। हमारे भीतर दया का भाव जागे। गुरूदेव तुलसी भी अपने प्रवचन के पश्चात दया के बारे में श्लोक बोला करते थे।
सब प्राणियों को आत्मतुल्य समझो
  आचार्य श्री ने आगे कहा कि जो तुम्हारे लिए प्रतिकूल है, वह दूसरों के लिए भी प्रतिकूल हो सकता है। जो तुम अपने लिए नहीं चाहते हो, वह दूसरों के लिए भी मत चाहो। कोई तुम्हें गाली दे और तुम्हारा अपमान करें, वह तुम्हें प्रिय नहीं है, तो वो तुम भी दूसरों के लिए मत करो। "आयतुले पयासु"- सब को अपने समान समझो। संसार में सब प्राणियों को आत्मतुल्य समझो। ज्ञानी के ज्ञान का सार है कि किसी की भी हिंसा ना हो, समता का भाव रखें। अहिंसा की साधना हो। अगर जीवन में ज्ञान है, आचार नहीं, तो सार नहीं निकलेगा।  ज्ञान के साथ आचार का समन्वय हो। आचार का एक भाग है अहिंसा।
आचार्य श्री ने रेड हिल्स के वासियों जिसमें जैन के साथ तमिल, मुसलमान लोगों को भी अहिंसा यात्रा के तीनो संकल्पों की जानकारी देते हुए, संकल्प स्वीकार कराये।
   रेड हिल्स जैन संघ की और से श्री मनोज भंडारी, श्री गणपत डागा, श्री रमेश डागा,  डागा परिवार की बहने, दीक्षिता डागा, देशना डागा और ज्ञानशाला के ज्ञानार्थीयों, संगीता डागा, डॉक्टर सुष्मिता ने अपने भावों की प्रस्तुति दी। अहिंसा यात्रा के संयोजक श्री ज्ञानचन्द आंचलिया ने अपने विचार व्यक्त किये। आचार्य प्रवर प्रवचन सम्पन्नता के बाद श्री मदनलालजी राजेशकुमारजी रमेशकुमारजी डागा* के यहां प्रवास किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन मुनि श्री दिनेश कुमार ने किया।
दायित्व एवं ध्वज हस्तांतरण
  चेन्नई चातुर्मास की सम्पन्नता के बाद आगे की अहिंसा यात्रा के दायित्व के रूप में आगामी कोयम्बटुर मर्यादा महोत्सव व्यवस्था समिति के अध्यक्ष श्री विनोद लूणिया के साथ टीम को चेन्नई व्यवस्था समिति के अध्यक्ष श्री धरमचन्द लूंकड़ ने अपने विचार रखते हुए अपनी टीम के साथ ध्वज हस्तांतरण किया। आचार्य प्रवर ने इस अवसर पर मंगल पाठ सुनाया। श्री विनोद लूणिया ने अपनी भावाभिव्यक्ति देते हुए संकल संघ को कोयम्बटुर आने का निमंत्रण दिया।
  हजारों हजारों की संख्या में चेन्नई का जैन ही नहीं, जैनेतर समाज लगभग छह माह से अपने आराध्य की आराधना में संलग्न था, लेकिन जैसे ही मिगसर वदी एकम, शनिवार की प्रात:काल सूर्य की किरणों के साथ आध्यात्म की किरणों से सबको अलौकित करने वाले महासूर्य ने माधावरम् से प्रस्थान किया, तो सबकी आँखे नम हो गई। सबने श्रद्धासिक्त भरे मन से आचार्य प्रवर को विदाई दी। तो वहीं आगामी चातुर्मास के लिए बेगंलूर, मर्यादा महोत्सव से कोइम्बटुर, अक्षय तृतीया से इरोड़ आदि क्षेत्रों को हजारों श्रद्धालु अहिंसा यात्रा की स्वागत के लिए उपस्थित हुए।
पुलिस प्रशासन का मिला अतुलनीय सहयोग
  तमिलनाडु के विशेष राजकीय अतिथि आचार्य श्री महाश्रमण के तमिलनाडु प्रवेश से लेकर आज दिन तक तमिलनाडु प्रशासन, विशेषकर पुलिस प्रशासन का सदैव अतुलनीय सहयोग रहा। आज जब प्रात: 08.15 बजे माधावरम् से रेड हिल्स की तरफ धवल सेना ने अपने चरण गतिशील किये, तो पुरा नेशनल हाइवे संकरा बन गया, तो वही जगह-जगह पुलिस ने हजारों-हजारों की संख्या में पैदल चल रहे, श्रद्धालुओं की यात्रा का पथ सुगम बनाने के लिए अपना सर्वत्र झोंक दिया।

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