अन्याय से कमाया हुआ पैसा अनर्थ का सूचक होता है : आचार्य श्री महाश्रमण जी

13 अक्टूबर 2019, तेरापंथ धर्मसंघ के 11वें अधिशास्ता महातपस्वी युगप्रणेता आचार्य श्री महाश्रमणजी ने महाश्रमण समवशरण से संबोधी ग्रंथ के माध्यम से उपस्थित श्रावकों को संबोध प्रदान करते हुए  कहा कि निर्जरा से कर्म क्षय होने पर जो सुख की अनुभूति होती है वह परमसुख है। जो सुख मुक्त आत्माओं को प्राप्त होता है वह सुख देवलोक या भौतिक संसाधनों से परिपूर्ण मनुष्यों को भी नहीं मिलता है। मोक्ष का सुख परमसुख होता है। मोक्ष का सुख हर व्यक्ति को नहीं मिलता यह अलग बात है परंतु संसार में रहकर भी कषाय मंद करके लालसा, आकांक्षा, लोभ आदि कम कर संतोष के द्वारा भी उस सुख का कुछ अंश पाया जा सकता है। सांसारिक व्यक्तियों के पास भौतिक संसाधन असीमित हो सकते हैं परंतु उनके पास वैसा सुख नहीं होता जो साधु के पास होता है। साधु के पास संसाधन के रूप में कुछ नहीं होता फिर भी आत्मिक सुख में सबसे आगे रहता है। दुनिया में गरीबी की रेखा तो निर्धारित की गई है परंतु यह भी रहना चाहिए कि अमीरी की रेखा भी निर्धारित हो। व्यक्ति को एक निश्चित सीमा रखते हुए संसाधनों का अर्जन करना चाहिए। इससे भी कुछ अंशों में संयम का पालन होता है। भौतिक साधनों का सुख तात्कालिक है परंतु त्याग और संयम से चिरकालिक सुख पाया जा सकता है। 
आदमी चाहे व्यापार या दैनिक क्रियाकर्म कुछ भी हो सब जगह प्रमाणिकता रखनी चाहिए और यह ध्यान रखना चाहिए कि उसके द्वारा अर्जित किया गया धन शुद्ध है या नहीं ? न्यायोचित तरीकों से अर्जित किया हुआ पैसा अर्थ है और अन्याय से कमाया हुआ पैसा अनर्थ का सूचक होता है। व्यक्ति को अपने जीवन में द्रव्य सीमा, साधन सीमा और संसाधनों का सीमित प्रयोग करना चाहिए। वर्तमान में मोबाइल एक बहुत बड़े नशे के रूप में उभर रहा है इसे भी कुछ अंशों में त्याग करने का प्रयास करना चाहिए। अभाव में अगर कोई व्यक्ति भोग नहीं कर सकता है तो वह त्याग नहीं होता है। व्यक्ति संसाधनों से परिपूर्ण रहते हुए किसी चीज का त्याग करता है तो वह सही मायने में त्याग होता है। आचार्य प्रवर ने ज्ञानशाला के बच्चों को भी जीवन में त्याग को प्रधानता प्रदान करने के लिए प्रेरित किया।
प्रवचन में जैन विश्व भारती द्वारा आचार्य महाप्रज्ञ जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष में प्रथम पुस्तक का लोकार्पण प्रवास व्यवस्था समिति अध्यक्ष मूलचंद नाहर जैन विश्व भारती पूर्व अध्यक्ष श्री धर्मचंद लुंकड़ द्वारा किया गया। मुख्य नियोजिका साध्वी विश्रुतविभाजी ने भी प्रवचन में अपने भाव व्यक्त किए। मध्य प्रदेश के विधायक श्री ओमप्रकाश सकलेचा, सिरोही राजस्थान के विधायक श्री संयम लोढ़ा, भारत सरकार के पूर्व मंत्री श्री पी पी चौधरी आदि ने उपस्थित होकर आचार्य प्रवर का आशीर्वाद ग्रहण किया संचालन मुनि श्री दिनेश कुमार जी ने किया ।

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