सम्यक ज्ञान के द्वारा करें सम्यक आचरण : आचार्य महाश्रमण



लगभग 16 किलोमीटर विहार कर महातपस्वी पधारे होसा अग्रहरा


चतुर्दशी के अवसर पर 'हाजरी' वाचन का कार्यक्रम



25-11-2019, सोमवार, होसा अग्रहरा, मैसूर, कर्नाटक, JTN, 
जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्म संघ के एकादशम अधिशास्ता, अहिंसा यात्रा प्रणेता, शांतिदूत आचार्य श्री महाश्रमण जी का आज प्रभात वेला में के.आर. नगर से मंगल विहार हुआ। सर्द हवाओं के मध्य सड़क मार्ग के दोनों ओर स्थित चावल, इक्षु आदि के खेत एवं नारियल के विशाल वृक्ष नयनाभिराम दृश्य प्रस्तुत कर रहे थे। साथ ही काफी महीनों पश्चात तमिलनाडु के बाद यहां कर्नाटक  में कावेरी नदी निकट से दृष्टिगोचर हो रही थी। प्रकृति के मध्य लगभग 16 किलोमीटर विहार कर महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमण जी बाल गंगाधर स्वामी पब्लिक स्कूल होसा अग्रहरा में पधारे।
उपस्थित श्रद्धालुओं को पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए ज्योतिचरण श्री महाश्रमण जी ने कहा कि मनुष्य के जीवन में ज्ञान का बहुत बड़ा महत्व होता है। जिसमें ज्ञान नहीं होता वह एक तरह से पशु के समान होता है। ज्ञान बहुत आवश्यक होता है। शास्त्रों में आता है  'पढमं नाणं तओ दया' पहले ज्ञान फिर आचरण।
आचरण के लिए सम्यक ज्ञान होना आवश्यक होता है। समय सीमित है और ज्ञान का कोई पार नहीं है। कितने-कितने ग्रंथ ज्ञान से भरे हुए हैं। आदमी क्या-क्या पढ़े। व्यक्ति को सारभूत ज्ञान ग्रहण करना चाहिए। आगम का अध्ययन करें। जिनवाणी का अध्ययन, स्वाध्याय करें। उनके अर्थ को जीवन में उतारें। हमारा आचरण अच्छा रहे ऐसा प्रयास करना चाहिए।


चतुर्दशी के अवसर पर आज हाजरी का वाचन हुआ। आचार्य प्रवर ने परंपरा अनुसार मर्यादाओं का वाचन कराते हुए सभी साधु-साध्वियों को जागरूक रहने की प्रेरणा प्रदान की। बाल मुनियों को पूज्य गुरुदेव ने प्रशिक्षण देते हुए समिति, गुप्तियों के बारे में प्रश्न पूछे। अंत में सभी साधु-साध्वियों ने लेख पत्र का वाचन किया।


29 नवंबर को आचार्य श्री महाश्रमण जी का श्रवणबेलगोला में संभावित प्रवास रहेगा।

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