सर्वश्रेष्ठ दान है अभयदान : आचार्य महाश्रमण


महातपस्वी महाश्रमण जी आज लगभग 10 किमी विहार कर पधारे अक्कीहेब्बालू

 आचार्यवर ने दी अभयदान की पावन प्रेरणा


26-11-2019, मंगलवार, अक्कीहेब्बालू, मंड्या, कर्नाटक,JTN,
अज्ञान रूपी अंधकार को हरने वाले ज्ञानसूर्य पूज्य आचार्य श्री महाश्रमण जी अपनी धवल सेना के साथ कर्नाटक राज्य में अविरल रूप से गतिमान है। शांतिदूत ने आज प्रातः होसा अग्रहरा से मंगल प्रस्थान किया। विहार के मध्य एक स्थान पर ग्रामवासियों ने आचार्य प्रवर के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। लगभग 10 किलोमीटर का विहार कर शांतिदूत आचार्य श्री महाश्रमण जी अक्कीहेब्बालू स्थित गवर्नमेंट हाई स्कूल में पधारे।
वहां स्थित रंगमंदिर ऑडिटोरियम में  अमृत देशना प्रदान करते हुए परम श्रद्धास्पद आचार्यश्री महाश्रमण ने कहा दुनिया में अनेक दान है। उनमें श्रेष्ठ है, अभयदान। न डरना चाहिए और न डराना चाहिए। भयभीत व्यक्ति हिंसा में प्रवृत्त हो सकता है और डराना तो अपने आप मे हिंसा है। अहिंसा के लिए अभयदान आवश्यक है।
आचार्य प्रवर ने आगे फरमाया कि भय एक कमजोरी होती है। तीर्थंकर अभय और अभयदाता होते है। भय को पूर्णतः जीत लेने वाला व्यक्ति पूर्ण सुखी होता है। पूर्ण अभय बनना बहुत ऊंची भूमिका की स्थति होती है। आदमी को अभय की दिशा में यथासम्भव बढ़ने का प्रयत्न करना चाहिए। अभय बनने के लिए 'णमो सिद्धाणं'- निर्भय मंत्र का जप भी किया जा सकता है। 'ॐ भिक्षु' और नमस्कार महामंत्र का जप भी इस दृष्टि से किया जा सकता है। आदमी स्वयं अभय बने और दूसरों को अभयदान दे, यह अभीष्ट है।
विद्यालय के प्रधानाध्यापक श्री चंद्रशेखर जी ने पूज्य प्रवर का अभिवादन किया। आचार्यवर ने उनको अहिंसा यात्रा के संकल्पत्रयी की प्रेरणा दी।


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