प्रिय-अप्रिय हर परिस्थिति में समता रखें - आचार्य श्री महाश्रमण


01-12-2019, रविवार, उदयपुरा, हासन, कर्नाटक, जैन शासन प्रभावक शांतिदूत आचार्य श्री महाश्रमण जी अपनी अहिंसा यात्रा के साथ कर्नाटक के हासन जिले में सानंद गतिमान है। आज प्रातः काल आचार्यवर ने चन्नरायपटना से मंगल विहार किया। मार्ग में अनेक श्रद्धालुओं को अपना पावन आशीष प्रदान करते हुए पूज्य प्रवर उदयपुरा पधारे। विहार के दौरान तेज वर्षा भी प्रारंभ हो गई। प्रकृति के नयनाभिराम दृश्यों से परिपूर्ण नेशनल हाईवे 75 पर लगभग 12.5 किलोमीटर का विहार कर गवर्नमेंट फर्स्ट ग्रेड कॉलेज उदयपुरा में महातपस्वी महाश्रमण जी का पदार्पण हुआ।
कॉलेज प्रांगण में ज्ञान पिपासु श्रद्धालुओं पर अमृत वर्षा करते हुए अहिंसा यात्रा प्रणेता ने कहा कि चार प्रकार की शिक्षाएं जीवन में अवश्य आनी चाहिए। जिसमें पहली है बिना पूछे नहीं बोलना। व्यक्ति को कभी भी अनावश्यक नहीं बोलना चाहिए। जहां हितकर हो वही बोले अन्यथा बगैर पूछे यथासंभव ना बोले। 

दूसरा है मिथ्या संभाषण न करे। अगर बोले तो व्यक्ति यथार्थ बोले असत्य, मृषावाद से बचें। बाहर-भीतर व्यक्ति एक जैसा रहे। सरलता जीवन में रहनी चाहिए। सच्चाई के साथ ऋजुता का योग है। 

तीसरा है गुस्से को असफल करें। क्रोध को कम करने का प्रयास करना चाहिए। गुस्सा आ भी जाए तो उसे कंट्रोल करें। गाली-गलौच ना करें, हाथ ना उठाएं।
आचार्य प्रवर ने चौथी शिक्षा फरमाते हुए कहा कि समता जीवन में आए। प्रिय-अप्रिय हर परिस्थिति में समता रखें। प्रतिक्रिया न करें। प्रिय में अधिक खुशी न मनाए और अप्रिय में हताश न हों। यह बातें अगर जीवन में आ जाए तो जीवन कल्याणकारी बन सकता है।

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