समय का अकंन हो : आचार्य श्री महाश्रमण

 24.01.2016                                                             गुलाबबाग, 24 जन.
अहिंसा यात्रा प्रणेता आचार्य श्री के नेतृत्व में सद्भावना, नैतिकता और नशामुक्ति के संदेश को लेकर चल रही अहिंसा यात्रा आज सुबह खुश्कीबाग से गुलाबबाग पहुंची।  स्कूली छात्रों का एक समूह अपने हाथों में अहिंसा यात्रा के संकल्पों का स्लोगन लेकर चल रहे थे तो दूसरे छात्रों का समूह बैंड-बाजे के साथ। कहीं शंख ध्वनि, तो कहीं भगवान महावीर के जीवन चरित्रों की झांकियां।  विभिन्न मंगल जयकारों से गूंजते वातावरण में आचार्यश्री की धवल सेना गुलाबबाग की दूरी तय कर रही थी तो ऐसा लग रहा था जैसे मानव जीवन के सभी पापों का नाश करने के लिए स्वयं पापनाशनी मोक्षदायनी गंगा अपनी धवल धारा के साथ प्रवाहित हो रही हो। सभी श्रद्धालुओं को अपने दर्शन व आशीर्वाद से पवित्र करते सबसे पहले आचार्यश्री ने नये बने नव उद्घाटित हो रहे तेरापंथ भवन पधार कर मंगल पाठ प्रदान किया। वहां से वे पाट व्यवसायिक भवन में बने भव्य पंडाल में जैसे ही पहुंचे पूरा पंडाल ‘जय-जय ज्योतिचरण, जय-जय महाश्रमण’ के जयघोष से गूंज उठा।

महातपस्वी महामनस्वी आचार्य श्री महाश्रमणजी ने अपने प्रातःकालीन उद्बोधन में फरमाया कि इस दुनिया में मूल्यवान, संचय योग्य व सबसे बलवान कोई चीज है तो वह केवल समय है। इसलिए समय का मूल्यांकन करें। उसका प्रबन्धन करें। उसका संचय करें। क्योंकि दुनिया में हर कार्य की पुनरावृत्ति हो सकती है लेकिन समय ही एक ऐसा है जो बीत गया वह लौट कर कभी नहीं आता। कहा कि जो आदमी समय को बरबाद करता है समय उसको बरबाद कर देता है। यदि आदमी अपने जीवन में सभी कार्यों का समय निर्धारित कर ले तो उसका जीवन व्यवस्थित और सुखमय बन सकता है। उन्होंने जागने, नहाने, खाने व सोने का समय निर्धारित करने पर जोर देते हुए कहा कि जब आदमी की दिनचर्या व्यवस्थित होगी तो उसका मन शांत हो सकता है और अपने जीवन को धर्म के मार्ग पर भी आगे ले जा सकता है। आचार्यश्री ने इस यात्रा के तीन महामंत्र सद्भावना, नैतिकता व नशामुक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि आदमी अपने जीवन में केवल इन्हीं मंत्रों को पालन आरंभ कर ले तो अपनी आत्मा को मोक्ष के मार्ग पर ले जा सकता है। मानव जीवन की महत्ता समझाते हुए कहा कि साधना का जो प्रयोग आदमी करता है वह प्रयोग देवता तक नहीं कर पाते। साधना ही मोक्ष का द्वारा खोलती है और साधना के लिए मानव का जीवन प्राप्त करना आवश्यक है।
आचार्यश्री के स्वागत में विधायक विजय खेमका ने विचार प्रस्तुत किए। कार्यकम का संचालन मुनि श्री दिनेशकुमार जी ने किया।

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